टाटा देश का विश्वाश.......

टाटा देश का विश्वाश.......

 

26/11 से जुड़ी जो फिल्म .........

होटल मुंबई में नहीं दिखाया गया। परसों रिलीज हुई फिल्म 'होटल मुंबई' में ताज होटल के कर्मचारियों, प्रबंधकों, पुलिस और सुरक्षा बल की भूमिका पर तो काफी कुछ दिखाया गया, लेकिन रतन टाटा का कही भी जिक्र नहीं है।

हमले के बाद ताज समूह के प्रमुख रतन टाटा ने जो फैसले लिए, वे भारतीय कार्पोरेट जगत में ही नहीं, दुनियाभर में एक मिसाल हैं।

शायद इसीलिए टाटा समूह को इतने सम्मान से देखा जाता है।  हमले के दिन ताज होटल में जितने भी कर्मचारी काम पर थे (चाहे वे अस्थायी हो या ठेका मज़दूर) रतन टाटा ने सभी को परमानेंट ऑन ड्यूटी माना। जितने कर्मचारी घायल हुए, उन सभी का पूरा इलाज टाटा ने करवाया और उस अवधि का वेतन भी दिया। 

ताज के आसपास जितने भी ठेले वाले थे (और जितने सुरक्षाकर्मी थे) उन सभी के लिए टाटा समूह ने वही नीति रखी, जो अपने स्टॉफ के लिए थी। उन सभी का इलाज टाटा ने अपनी ओर से करवाया। प्रत्येक ठेले वाले को 60-60 हजार रुपये दिए गए।

सभी का इलाज निजी अस्पतालों में करवाया, जितने दिन होटल बंद रहा, सभी को उनके घरों पर वेतन पहुंचाया गया। - हमले में ताज समूह के 80 से ज्यादा कर्मचारी हताहत हुए थे। प्रत्येक कर्मचारी के घर रतन टाटा खुद गए। घायलों के बाहर से आने वाले रिश्तेदारों को टाटा ने अपनी तरफ से फाइव स्टार होटल प्रेसीडेंट में ठहराया। 

समूह के 46 मृत कर्मचारियों के बच्चों को टाटा के संस्थानों में आजीवन मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक मृत कर्मचारी के परिवार को उतनी धनराशि दी गई है, जितनी की वह आजीवन कमाई करता। 36 से 85 लाख रुपये दिए गए। पूरे परिवार का मेडिकल बीमा टाटा की तरफ से किया गया है।

जिन कर्मचारियों ने कंपनी से क़र्ज़ ले रखा था, वह माफ कर दिया गया। - ताज होटल के स्टॉफ ने अपनी जान की परवाह न करते हुए अतिथियों को बचाने का काम किया। थॉमस जार्ज नामक एक कर्मचारी ने ऊपरी मंजिल से 54 लोगों को आपातकालीन द्वार से बाहर निकाला और 54 वें व्यक्ति को बाहर निकालते समय आतंकवादी की गोली से उनकी मौत हो गई।

टाटा समूह का कारोबार पूरी दुनिया में है। जब ताज होटल के रिनोवेशन का काम शुरू हुआ तब सबसे कम खर्च का टेंडर एक पाकिस्तानी फार्म का था, जिसे अस्वीकार कर दिया गया।

Anand Vedanti Tripathi

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