वीरांगना ऊदादेवी स्मारक व प्रतिमा को बर्बरता पूर्वक तोड़ने के दो साल बाद भी नही हुई कार्यवाही, प्रदेश सरकार भी बनी है मूकदर्शक

वीरांगना ऊदादेवी स्मारक व प्रतिमा को बर्बरता पूर्वक तोड़ने के दो साल बाद भी नही हुई कार्यवाही, प्रदेश सरकार भी बनी है मूकदर्शक

कानपुर |

हमारे देश में जहाँ संविधान के प्रति श्रद्धा व नेताओं, अधिकारियों को इसकी कसमें खाते और रक्षा करने का वादा करते हमेशा सुना जाता है | परन्तु जहाँ पैसे और रुतबे की बात आती है तो यही अधिकारी अनुसूचित जाति व निचले तबके के लोगों पर अपने उसी अधिकार व कसमों को तोड़ते हुए भी देखे जाते है |

दुर्भाग्य है हमारे देश का की जहाँ महात्मा गाँधी, मदन मोहन मालवीय, पंडित दींन दयाल उपाध्याय व बी० आर० आंबेडकर जैसे महापुरुषों ने जन्म लिया और इस देश के लोगों को समानता के सूत्र में पिरोने का काम किया परन्तु आज के अधिकारी इस संवैधानिक अधिकार की धज्जियाँ उड़ा रहे है |

ऐसा ही एक प्रकरण दो वर्ष पूर्व कानपुर नगर नौबस्ता के चंदीपुरवा में देखने को मिला, जहाँ बिना किसी सूचना के आवास विकास के अधिकारी पूरे पुलिस बल के साथ अनुसूचित जाति स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीरांगना ऊदादेवी स्मारक को कुछ स्थानीय भुमफिययों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बड़ी ही बर्बरता पुर्वक जेसीबी द्वारा तोड़ दिया|

इस अशोभनीय प्रकरण में ही दिनांक 25 अक्टूबर 2016 को घटना को कवरेज कर रहे पत्रकार राजीव शुक्ला व सहयोगी जी०के० वर्मा को पुलिस द्वारा लाठियों से पीटा भी गया | इस स्मारक पर वीरांगना ऊदादेवी की प्रतिमा पासी समाज के स्थानीय लोगो तथा स्थानीय विधायक के द्वारा स्थापित कराई गई थी जिसका संरक्षण व रख-रखाव पासी प्रगति संस्थान द्वारा पिछले 30-35 वर्षों से किया जा रहा है |

इस स्मारक पर 16 नवम्बर को प्रत्येक वर्ष वीरांगना ऊदादेवी का शहीदी दिवस के साथ–साथ स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती आदि राष्ट्रीय पर्व मनाये जाते रहे हैं | बीते दो वर्षों में प्रशासन द्वारा इस अशोभनीय प्रकरण के विषय में कोई भी कार्यवाही नहीं की गई जिसकी कारण स्थानीय लोगों और पासी समाज में काफी रोष है ,

जो अब बड़े आन्दोलन का रूप ले रहा है | स्थानीय लोगो की माने तो तब से अब तक भूमाफियाओं द्वारा इस स्मारक की जमीन पर कई बार कब्ज़ा करने का प्रयास हो चुका है | प्रशासन को कई भी इसकी सूचना दी जाती रही है परन्तु कोई कार्यवाही नहीं की गई है |

इस प्रकरण में प्रशासन की निष्क्रियता को निम्न बिदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है :

  • 25 अक्टूबर 2016  को वीरांगना ऊदादेवी की प्रतिमा व स्मारक को जेसीबी द्वारा ध्वस्त कर मलबा तक गायब कर दिया गया, घटना को कवर कर रहे पत्रकार राजीव शुक्ला व जी०के० वर्मा पर पुलिस द्वारा लाठियों से पीटा गया जिसमें आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई |
  • 8 नवम्बर 2016 को घटना के तुरंत बाद, घटना के विरोध में स्मारक के निकट धरना प्रदर्शन भी किया गया जिसमें सांसद, विधायक, अन्य सामजिक संगठन व समाज सेवियों नें भारी संख्या में हिस्सा लिया और घटना की कड़ी निंदा की | सांसदों द्वारा उक्त स्मारक को दुबारा बनवाने का वादा भी किया गया परन्तु आज तक ऐसा नहीं हो सका |
  • दिसंबर माह में हाई कोर्ट नें इस प्रकरण में दिशानिर्देश जारी करते हुए स्मारक की जमीन का चिन्हांकन व सीमांकन का निस्तारित करने का आदेश दिया जिस पर आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई |
  • दिसंबर 2016 से फरवरी 2017 तक हाई कोर्ट के दिशानिर्देश पर कार्यवाही को लेकर एस०एस०पी व डी०एम० कानपुर को कई पत्र लिखे गए जिसका आज तक न कोई जवाब आया और न ही किसी के कान पर जूं तक रेंगी |
  • मई 2017 में भारतीय जनता पार्टी की नई सरकार आते ही, आवास विकास मंत्री नें इस प्रकरण में कमिश्नर आवास विकास को पत्र लिखकर स्मारक का सीमांकन व चिन्हांकन कराने को कहा, जिस पर कमिश्नर ने एसडीएम को भी पत्र लिखा इस पर भी आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई |
  • अक्टूबर 2017 में इस क्रम में उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश से मिलकर उन्हें पत्र के माध्यम से घटना पर कार्यवाही हेतु प्रार्थना की परन्तु कोई कारवाही नहीं हुई |
  • अक्टूबर 2018 में उप मुख्यमंत्री ने घटना की जांच डी०एम० कानपुर को दी, परन्तु कोई निस्तारण नहीं किया गया |
  • बीते दो सालों में यहाँ सभी कार्यक्रम इसी स्मारक के निकट मनाये जाते है और कई सांसद, विधायक शिरकत करते है , परन्तु आश्वासन के सिवाय आजा तक किसी ने कुछ नहीं किया |

इस आधार पर जो निष्कर्ष निकलता है, और स्थानीय लोगों की माने तो, अनुसूचित समाज आज भी वहीँ है जहाँ पहले था, पहले भी अनुसूचितजाति के लोगों  की जामीने सवर्णों द्वारा हथियाई जाती थी

और आज भी अनुसूचित जाति की वीरांगना ऊदादेवी के स्मारक के साथ भी यही हो रहा है | सभी सरकारें अनुसूचित जाति के लोगों को ऊपर उठाने, पढने-लिखने व सुविधाएँ देने का प्रयास करती रही है परन्तु उन्हें आज तक न्याय पाने का अधिकार किसी ने नहीं दिया |

पासी प्रगति संस्थान व अन्य सामाजिक संगठनों ने अब इस पूरे प्रकरण के विरोध में एक जुट होकर देश के विभिन्न शहरों में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीरांगना ऊदादेवी के शहीदी दिवस के माध्यम से प्रशासन की निष्क्रियता पर विरोध प्रदर्शन करेगी |

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