प्रचार प्रसार के आभाव में दम तोड़ रही गरीब बच्चों के पढ़ने की उम्मीद

प्रचार प्रसार के आभाव में दम तोड़ रही गरीब बच्चों के पढ़ने की उम्मीद
  • क्रासर-2 वर्षों में 100 बच्चों को भी नहीं मिल पाया योजना का लाभ

हृदय कान्त बाजपेयी

उन्नाव-

गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार ने राइट टू एजुकेशन कानून बनाया।जिसके अंतर्गत प्राईवेट स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले के लिए 25/ सीटों का आरक्षण निर्धारित किया है।पिछले वर्ष यह योजना जनपद में लागू हुई लेकिन प्रचार प्रसार के आभाव में यह योजना दम तोड़ रही है।

जनपद में अभी तक इस योजना का लाभ 100 से भी कम बच्चों को मिल पाया है।आरटीई योजना के अंतर्गत निजी स्कूलों में 25 फीसदी आरक्षण बीपीएल छात्रों के लिए दिया गया है।जिन परिवारों की सालाना आय एक लाख रुपये या एक लाख रुपये से कम हो वह इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।जिसके लिए उन्हें ऑनलाइन आवेदन करना होगा।इस योजना में प्रवेश 5 या 6 वर्ष के बच्चों का किसी भी निजी स्कूल में नर्सरी या कक्षा 1 में कराया जा सकता है।

अन्य कक्षाओं के लिए प्रावधान नहीं है लेकिन इसमें 14 वर्ष तक छात्र छात्राओं के लिए निःशुल्क शिक्षा की व्यवस्था है। जिसका पूरा खर्च सरकार वहन करती है।लेकिन प्रचार प्रसार के आभाव में यह योजना सिर्फ खानापूर्ति ही नजर आ रही है।लोगों को अब तक इस योजना की जानकारी ही नहीं है

जिससे कई बीपीएल परिवार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पाने से वंचित हो रहें हैं।इस वर्ष इस योजना के अंतर्गत मात्र 74 आवेदन ही प्राप्त हुए जिनमें से 64 छात्रों का चयन हुआ।जबकि पिछले वर्ष 36 आवेदनों में से 34 छात्र चयनित हुए थे।

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