बच्चों के भविश्य की लुटिया डुबोने पर आमादा ‘गुरू जी’  षैक्षिक वातावरण दुरूस्त करना तो दूर एमडीएम मंे भी घपला

बच्चों के भविश्य की लुटिया डुबोने पर आमादा ‘गुरू जी’  षैक्षिक वातावरण दुरूस्त करना तो दूर एमडीएम मंे भी घपला
  • उप्रावि ऐतबारपुर के निरीक्षण में खुली पढ़ाई की पोल

उन्नाव।

सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर कब सुधरेगा। आखिर यह सुधरेगा भी या नहीं। कम से कम जो हाल है उसमें तो इसके सुधरने की उम्मीद दूर-दूर तक कहीं दिख नहीं रही है। इन स्थितियों से अभिभावक बेहद चिंतित हैं।

सरकारी स्कूलों में घटती बच्चों की संख्या इसी का नतीजा भी है। यूं तो सरकारी स्कूलों की दयनीय दशा और गिरती शिक्षा से सभी वाकिफ हैं। कहने को शिक्षा का स्तर सुधारने की दिशा में भले ही सरकार गंभीर है लेकिन वास्तविकता के धरातल पर स्थिति भिन्न व उलट है। सरकार द्वारा तमाम प्रयास किए गए कि बच्चों का शिक्षा के ￧ति लगाव बढ़े और साथ विद्यालयों में आकर्षक छात्रवृटी  मध्याु   भोजन, निःशुल्क पुस्तकें जैसी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।

यही नहीं बल्कि विद्यालयों में कुशल शिक्षकों की तैनाती की गई है ताकि नौनिहालों को बेहतर शिक्षा दी जा सके। बावजूद इसके शिक्षा का स्तर पर उठने की कौन कहे और गिरती जा रही है वहीं जिले में तमाम यासों के बावजूद शिक्षा व्यवस्था पटरी पर नहीं आ रही है।

कहीं सरकारी तंत्र की उदासीनता तो कहीं स्कूलों से शिक्षको का गायब रहना व्यवस्था को सुधारने में बडी बाधा है। साक्षरता की दृष्टि से उन्नाव उपहार देश के अति पिछडे जिलों में एक है। यहां सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त है। आम जनता का विश्वास सरकारी स्कूलों पर नहीं है। गरीब और मजदूर तबके के लोग ही अपने बच्चो को सरकारी स्कूलो में पढने के लिये भेजते है लेकिन विभागीय अधिकारियों की उदासीनता शिक्षा के स्तर को उठाने में सबसे बडी बाधक है।

जिले के सूदूर ग्रामीण अंचलो के स्कूलों में शिक्षक ही नहीं जाते हैं। कई स्कूलों में औजी के शिक्षक तैनात है। अभिभावकों का कहना है कि कभी उच्चाधिकारी निरीक्षण में नहीं आते जिसका फायदा उठाकर शिक्षक महीनों तक स्कूलों से गायब रहते है। ज्यादातर शिक्षक बीआरसी में मीटिंग बता कर स्कूलों से गायब रहते हैं।

ब्लाक सफीपुर के अंतर्गत उच्च प्र थमिक विद्यालय ऐतबारपुर में जब मीडिया की टीम ने निरीक्षण किया तो सहचर के पद पर तैनात राघवेन् अनुपस्थित थे। सहायक शिक्षक रोली सोनकर अपनी कक्षा में शिक्षण कार्य कराती मिली किन्तु इंचार्ज शिक्षक शरद कुशवाहा शिक्षा के स्तर की लुटिया डुबोते दिखे।

दो शिक्षकों के सहारे विद्यालय चलाना कोई बडी बात नहीं लेकिन शिक्षक भी शिक्षित होने चाहिए। वहीं जब इंचार्ज शिक्षक से देश के राज्यपाल का नाम व राष्टᆰगीत के बारे में पूछा गया तो मास्टर साहब नहीं बता पाए। साथ ही उन्होंने विद्यालय में बाउन्डवाल न होने से विद्यालय में बहुत नुकसान होने की भी बात कही।

उन्होंने यह भी बताया कि इसकी शिकायत हम अपने शिक्षा विभाग में कई बार कर चुके हैं लेकिन आजतक कोई कोई सुनवाई नहीं हुई।

वहीं बच्चों से पूछकर शिक्षा स्तर की जानकारी ली गई तो कक्षा 8 के बच्चों को जिलाधिकारी मुख्यमंत्री व प्र धानमंत्री का नाम नहीं मालूम था व बोर्ड पर उज्जवल भी नही लिख पायें जिसपर एक छात्र ने बताया कि मास्टर साहब क्लास में नहीं आते और न ही पढाते है। ऐसे में ये सवाल उठना बेहद लाजमी है कि क्या बच्चों का भविष्य सही हाथों में है।

जब शिक्षक ही शिक्षित नहीं तो बच्चों का भविष्य कैसे निखारेंगे। जब निरीक्षण रसोई का किया गया तो 40 छात्रो पर मात्र 2.5ली दूध ही उपलब्ध था जिसपर रसोईया ने बताया कि बच्चों को देने के लिये केवल इतना ही दूध आता है।

ऐसे में एमडीएम के मानकों को नकारते हुये इंचार्ज शिक्षक शरद कुशवाहा सरकार के आदेशो की धज्जिया उडाते हुये छात्रों के हक पर भी डाका डाल रहे है।

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