बुलंद हौसलों के साथ भांभर रेंज के जंगलों मे वनाधिकारी टी.एन.त्रिपाठी के संरक्षण व सहयोग से वन माफिया कर रहे बड़े पैमाने पर अवैध वन कटान

बुलंद हौसलों के साथ भांभर रेंज के जंगलों मे वनाधिकारी टी.एन.त्रिपाठी के संरक्षण व सहयोग से वन माफिया कर रहे बड़े पैमाने पर अवैध वन कटान

बुलंद हौसलों के साथ भांभर रेंज के जंगलों मे वन माफिया कर रहे बड़े पैमाने पर अवैध वन कटान ।  

वनाधिकारी टी.एन.त्रिपाठी के संरक्षण व सहयोग से काटे जा रहे वेशकीमती हरे पेड़ । 

बलरामपुर

बलरामपुर जनपद में सोहेलवा वन्य जीव प्रभाग में वनसंपदा का अपार भण्डार है । हजारों एकड़ में फैले यहां के जंगलों मे शीशम , शाखू , सहगौन , असना ,  खैर , टिकुई इत्यादि प्रजाति के वेशकीमती पेड़ पाये जाते है । इसके अन्तर्गत आनेवाला भांभर रेंज प्रमुख रुप से है जो भारत और नेपाल की सीमा पर स्थित है । तथा यहां के जंगलों में प्रमुख रूप से शाखू ,सहगौन , शीशम ,तथा खैर आदि के पेड़ों की भरमार है । यह जंगल सेंचुरी क्षेत्र में भी आता है ।

परन्तु आजकल भांभर रेंज के जंगलों के अन्दर ठुड़वलिया , बीरपुर , चंदनपुर , नरिहवा ,रेहरा , बेलभरिया ,आदि बीटों में बड़े पैमाने पर अंधाधुंध कटान जारी है ।वनमाफियाओ के द्वारा दिन रात शीशम ,सहगौन ,शाखू जैसे वेशकीमती हरे पेड़ों पर आरे चलाये जा रहे हैं । इन हरे पेड़ो का अवैध कटान कर पहचान छिपाने के लिए या तो एक विशेष तरह का काला केमिकल उनके जड़ो पर लगा दिया जाता है ताकि वह पुराने बूट लगे या तो उनके जड़ो को खोदकर सबूत ही मिटा दिये जाते है ।

जंगल से सटे ग्रामीणों का कहना है कि रेंजर टी.एन.त्रिपाठी का संरक्षण और सहयोग वनमाफियाओ को भरपूर प्राप्त है जिससे बेखौफ वनमाफिया अपने बुलंद हौसलो के साथ जंगल के अवैध कटानो मे लिप्त रह कर मोटी कमाई कर रहे हैं । जिसमें हर रोज लाखों रुपये का आमदनी वनकर्मियों का भी हो रहा है । जंगल के इन हरे भरे पेड़ों को काटकर बैलगाड़ी , साइकिल आदि के सहारे वन कर्मियों की मिलीभगत से वनमाफियाओ के द्वारा पड़ोसी देश नेपाल में पहुंचा दिया जाता है   जिससे लाखों की मोटी कमाई होती रहती है और काफी पिछड़ा क्षेत्र होने के कारण किसी को पता भी नहीं चलता है ।

यही नही अवैध रूप से काटे गये इन जंगली पेड़ो को पचपेड़वा बाजार मे लगे दर्जनों आरा मशीनों पर पहुंचा कर चिरान करके उनका स्वरूप बदल कर सबूत नष्ट कर दिया जाता है । इन्हीं जंगली लकड़ियों के सहारे पचपेड़वा बाजार में दो दर्जन फर्नीचर के दुकान भी चलाये जा रहे है । जहां पर कुशल कारीगरों के द्वारा सोफा ,बेड ,कुर्सी ,मेज आदि बना कर महंगे दामों पर बेचा जा रहा है । यहां से भी वनकर्मियों को मोटा रकम माहवारी के रूप में मिलता रहता है ।

यही नही यहाँ जंगल के अन्दर से आने वाले पहाड़ी नाले भांभर तथा मनोरमा में सफेद सोना कहा जाने वाला बालू का भी अपार भण्डार है जिसमें वनकर्मियों की मिलीभगत से सुगानगर डुमरी , भगवानपुर , हर्रैया , मड़नी , मानपुर सोनबरसा , धन्धरा , लालपुर , भुवनडीह ,आदि गांवों के पास    रातदिन खनन माफिया बालू का अवैध खनन कर लाखों की मोटी कमाई कर रहे हैं । जिसके कारण यहां का प्राकृतिक संतुलन बिगड़कर पर्यावरण प्रदूषित तो हो ही रहा है साथ ही साथ भारत सरकार को लाखों रुपए राजस्व का चूना भी वनकर्मियों और वनमाफियाओ के गठजोड़ से लगाया जा रहा है ।

जब इन अवैध कटानो की शिकायत यहाँ के ग्रामीणों द्वारा मीडिया या उच्चधिकारियों से किया जाता हैं तो वनमाफियाओ द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी जाती है तो वनकर्मियों के द्वारा फर्जी मुकदमों मे फंसा देने की बात कहकर डराया और धमकाया भी जाता है । जिसके कारण जंगल से सटे गांव के लोग चुप रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं । इसी का लाभ उठाकर बड़े पैमाने पर वेशकीमती हरे पेड़ो का अवैध कटान और बालू खनन कर यहाँ के वनमाफिया मालामाल हो रहे है तो वनकर्मी भी कमाई करने में उनसे कतई कमजोर नहीं है ।

यदि यही हाल रहा तो सेंचुरी क्षेत्र के इस घने जंगल में वह दिन दूर नहीं जब अगुंलियों पर आसानी से गिनती करने लायक ही पेड़ बचेंगे । वन विभाग यदि इस सेंचुरी क्षेत्र के जंगल को बचाना चाहता है तो उसके उच्चधिकारियों को भांभर रेंज के इस वेशकीमती जंगल की जांच कर यहां कार्यरत विभागीय कर्मचारियों के ऊपर कार्यवाही करना चाहिए । इस पूरे मामले पर जब हमने डीएफओ रजनीकांत मित्तल से दूरभाष पर सम्पर्क करना चाहा तो बार बार मोबाइल की घंटी बजने के बावजूद उनके द्वारा फोन नही रिसीव किया गया ।

हालांकि डीएफओ साहब भी यहां के सभी हालातो से भलीभांति परिचित हैं कि भांभर रेंज में क्या हो रहा है ।  कभी कभी उनका आगमन यहां शायद अपने हिस्से की रकम लेने के लिए ही हुआ करता है । खैर , अन्दर खाने विभागीय सांठगांठ जो भी हो परन्तु शिकायत करने पर कोई जांच और कार्यवाही न होने से संदेह के दायरे मे यह बड़े अधिकारी महोदय भी आ ही जाते है ।

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