गुरुपूर्णिमा महोत्सव जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज होंगे शामिल।

गुरुपूर्णिमा महोत्सव जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ जी महाराज होंगे शामिल।

काशीधर्मपीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नारायणानन्द ने सन्त हृदय महाकवि की पंक्ति करहु_सदा_सेवक_सन_प्रीती के अनुसार चातुर्मास्य एवं गुरुपूर्णिमा महोत्सव आयोजित करने के लिए नारायण_आश्रम, पिठैरा-बम्होड़ी, तहसील- लखनादौन, जिला- सिवनी, मध्यप्रदेश का स्थान सुनिश्चित किया है।

 नारायण आश्रम लखनादौन में प्रत्यभिज्ञा मत के पारगामी महापुरुष के साधनारत होने से उक्त आश्रम पुण्य समृद्धि का स्थान बन चुका है। इतना ही नहीं ऐसे पवित्रतम स्थल पर पुण्यसंवर्धन हेतु भक्तहितार्थ स्वामी ने हमारी कामनानुसार भगवान भोलेनाथ तथा भगवती माँ अन्नपूर्णा के विशाल मन्दिर की पूर्णता हेतु हम सभी को समवेत होने हेतु आदेशित किया है।  क्योंकि- 

कर्मणा जायते जन्तु:कर्मणैव विलीयते।                                                               

सुखं दुःख भयं क्षेमं कर्मणैव आविद्यते।।

 पुण्य कर्म जन्य क्रिया से उत्पन्न होता है। बिना कर्म-क्रिया से किसी भी फल की प्राप्ति नहीं होती, कर्मफल से ही जीव शरीर धारण करता है। कर्म से ही जीव जन्म धारण करता है। कर्म से ही सुख-दुःख होता है।भय कल्याण सब कर्म से ही मिलते हैं, बिना कर्म किये नहीं मिलते यह विवेचना काम्य-कर्म वांछित पुरुषों के लिए है। ज्ञानी तो पुण्य और पाप को धो डालता है, निर्धूय_पुण्य_पापे_विरजो_भवति तब मोक्ष पाता है। ज्ञानी के जितने कर्म होते हैं सबके सब अन्तःकरण शुध्दि के लिए किये जाते हैं। ऐसे सत्पुरुषों के लिए भगवान भाष्यकार का वचन है- 

उपसीदेद_गुरुं_प्राज्ञं_यस्मादबन्ध_विमोक्षणम्

                      साथ ही 

गुरुपदेशेनयदात्मदृष्टि:सैव प्रशस्ताखिल देव दृष्टि:

गुरु के उपदेश से होने वाला आत्मदर्शन ही समस्त देवताओं का प्रशस्त दर्शन है। गुरुपूर्णिमा पर्व ऋषि, महर्षियों, संतों, धर्मज्ञों और साहित्यकारों का सदा-सर्वदा सौभाग्यपर्व होता आया है। यह गुरु पर्व(व्यास पूर्णिमा) महोत्सव अक्षय संस्कृति का प्रतीक है, जो अमरत्व की साधना संधान के लिए समायोजित होता आया है। यह गुरुपूर्णिमा पर्व जीवन का सारतत्व यज्ञ है, इस गुरुपर्व यज्ञ में परम्परा प्राप्त धर्माचार्यों द्वारा अर्जित अमृतकणों का वर्षण होता है। साधना, उपासना और आराधना कराने वाले मनीषियों को समाज सदा-सर्वदा कर्तृत्व कर्म से वन्दन करता आया है, यही हमारी सनातन संस्कृति तथा विरासत है। भारतीय समाज आत्मोन्नति, साधना की परम समृद्धि इस महापर्व में प्राप्त कर विश्वकल्याण, आत्मकल्याण का संपादन करता है एतदर्थ गुरुपूर्णिमा पर्व पर गुरुपूजन का फल अनन्त और अचिन्त्य है। यह पर्व शिष्यों के लिए पुण्य का आनंदवन है। वेद, रामायण, महाभारत, पुराण, धर्मशास्त्रादि ने अपने-अपने ढंग और मर्यादा से इस पुण्यरूप पर्व का चिन्तन किया।

उसी पुण्यरूप पर्व का स्मरण करने के लिए हम सभी गुरु भाई-बहनों को गुरुपूर्णिमा_दिनांक- 16 जुलाई, दिन- मंगलवार 2019 को परमार्थ पथ के पथिक पूज्य धर्मपीठाधिपती_धर्माचार्य_स्वामी_नारायणानन्द_तीर्थ_जी_महाराज के आशीर्वचन श्रवण करने हेतु उपरोक्त सुनिश्चित स्थान पर अवश्य समवेत होना चाहिए।दर्शन-पूजन द उक्त जानकारी जन्मभूमि ग्राम लरौद तह मौदहा जिला हमीरपुर शंकराचार्य आश्रम लक्ष्मीनारायण मंदिर के प्रभारी सचिव आनंददेव महाराज ने बताया।

 

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