उड़ता हिमाचल

उड़ता हिमाचल

 हितेन्द्र शर्मा 

भारत सर्वाधिक युवा आबादी वाला देश है, यह हमारे लिए गर्व का विष्य है। लेकिन युवाओं को उन्के कौशल, क्षमता एंव शैक्षणिक योग्यता के अनुसार रोजगार न मिलने के कारण देश के यह अनमोल रत्न मुख्यधारा से भटकते जा रहे है।

पीढ़ी अंतराल, कुठ़ित समाज एंव पूर्वाग्रह से ग्रसित आका भी युवाओं के विकास में बाधक है। नशाखोरी आज एक फैशन है। विवाह, सेवानिवृति जैसे सभी सार्वजनिक आयोजनों में नशा परोसना इज्जत से जोड़कर देखा जाता है। नशा कारोबारियों को समाज में प्रतिष्ठित माना जाता है। ऐसे में नशे के आकर्षण से कौन बच सकता है।

शराब, भांग, अफीम, चरस व गांजा के बाद वर्तमान में चिट्टा हिमाचल की एक कड़वी सच्चाई है, चिट्टे के नशे के चलन से आज प्रदेश "उड़ता हिमाचल" के नाम से कलंकित हो रहा है। समाचार पत्रों में अधिकांश शैक्षिणक संस्थानो के छात्रों और युवा पीढ़ी का इस नशे का प्रयोग करते पकड़े जाने की खबरें है। नशाखोरी की आदी होती युवा पीढ़ी जुर्म की चरम सीमा तक जा सकती है। चोरी, कुकृत्य, बलात्कार व हत्या जैसे गंभीर जुर्म का अंदेशा सदैव बना रहता है। क्योकि निरन्तर फैलती नशे की प्रवृति जुर्म करवाने में ही सहायक है।

इस जहर से समाज को बचाने वाले अपने ही प्राण, परिवार व अस्तित्व को बचाने के लिए मोहताज हो गए है। यह एक अविश्वसनीय, अकल्पनीय व रहस्यमयी नेटवर्क है, इसमें अनुमान के अनुसार निम्न स्तर पर नशा फैलाने वाले दरिंदे एक आम युवा को अपना कम से कम सतर हजार से एक लाख का ग्राहक समझते है, कल्पना कीजिए इनके आका जो प्रारम्भ में मुफ्त में यह जहर चखाते है वह हमारी नस्लों को मौत के दरवाजे पर पहुचा कर, नरक से बदतर जीवन जीने पर मजबूर करते है और मानसिक गुलाम बनाकर अपना करोड़ो/अरबों का धंधा चमकाते है।

सभी नागरिको, शिक्षण संस्थानों, प्रशासन व समाजिक संस्थाओं को मिलकर सम्पूर्ण एकजुटता से इस जहरीले संकट, नशाखोरी से युवा पीढ़ी को बचाने हेतु संघर्ष करना होगा यदि आप खामोश रहेगें तो एक दिन बेजान खामोशी प्रदेश/देश में फैलनी स्वाभाविक है।

 

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