बच्चों की बेहतर परवरिश के नौमंत्र

बच्चों की बेहतर  परवरिश के  नौमंत्र

बच्चों के सपने को दें अहमियत-
आपका बच्चा जो बनना चाहे, उसे वही बनने दें। बच्चे पर अपनी मर्जी कभी न थोपें। जीवन के प्रति आपका जो नजरिया है, उससे अपनी संतान को प्रभावित करने की न सोचें। बच्चे को ठीक वही करने की जरूरत नहीं है, जो आपने अपने जीवन में किया। हो सकता है कि बच्चा अपनी रुचि और समझ से चलकर जीवन में उस जगह तक चला जाए, जिसकी आपने कल्पना तक न की हो। बच्चों के साथ मित्र जैसा व्यवहार करने से बच्चे अपने पेरेंट्स से कुछ नहीं छुपाते हैं।

बड़ा करने की जिद कैसी- यह बेहद जरूरी है कि बच्चे को बच्चा ही रहने दें। उसे बड़ा बनाने की जल्दी न मचाएं क्योंकि बच्चे को बड़ा तो नहीं बना सकते, उसका बचपन जरूर छीन लेंगे। इसलिए बच्चे को अपनी उम्र के हिसाब से सिखने दें। बच्चा जब बच्चे की तरह बर्ताव करता है तो खुशियां फैलाता है। बच्चे को आराम से बड़ा होने दीजिए। बड़ो जैसा व्यवहार करने के लिए दबाव न बनाएं।

धर्म के प्रति सोच खुद विकसित करने दें- बच्चा स्वाभाविक तौर पर अध्यात्म के निकट होता है। उसे जीवन में अध्यात्म और धर्म के प्रति सोच-समझ खुद विकसित करने दें। उस पर अपने पूर्वाग्रह न लादें। किसी अन्य धर्म के प्रति गलत बातें ना बताएं।ना करें हर मांग पूरी- कुछ पेरेंट्स मानते हैं कि बच्चों को प्यार करने का मतलब उनकी हर मांग को पूरा करना होता है। जो पेरेंट्स बच्चों की हर मांग को पूरा करते हैं। उनके बच्चे जिद्दी हो जाते है। जिद करने पर बच्चों को वही चीज दिलाएं जो जरूरी है। जब बच्चे ऐसी जिद करते हैं, जिन्हें पूरा नहीं किया जा सकता तो उन्हें प्यार से समझाना चाहिए।

पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद, संगीत व अन्य क्षेत्र में भी बढ़ावा दें- ज्यादातर माता-पिता ये सोचते हैकि बच्चा दिनभर पढ़ता ही रहे। ऐसा सोचना गलत है। बच्चे में चहुंमुखी विकास के लिए बच्चे का खेलना भी जरूरी है। कईबच्चे पढ़ाई में इतने अच्छे नहीं होते, जितने की संगीत और खेलकूद में। आपको चाहिए की बच्चों को उनके शौक को भी पूरा करने में मदद करें।ना करें भेदभाव- कईमाता-पिता अपने बेटों को बेटियों से ज्यादा अहमियत देते हैं। ऐसी गलती भूलकर भी ना करें। दोनों बच्चों की परवरिश एक समान करें। भेदभाव करने से बच्चियों के कोमल मन पर बुरा असर पड़ता है। माता-पिता का चाहिए कि वो अपनी बेटियों को बढ़ने के समान अवसर दें ताकि वो अपका नाम रोशन कर सकें। 

गहरी दोस्ती करें-
अपने बच्चे पर खुद को थोपना छोड़ दें। उसका बॉस बनने की बजाय उससे गहरी दोस्ती करें। अपने को उससे उपर रख कर उस पर शासन ना चलाएं बल्कि खुद को उससे नीचे रखें ताकि वह आपसे आसानी से बात कर सके।

 

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