महिलाओं की ड्राइविंग क्षमता को कम आंका जाता है

महिलाओं की ड्राइविंग क्षमता को कम आंका जाता है

महिलाओं की ड्राइविंग क्षमता को कम आंका जाता है। इसे लेकर चुटकुले तक बनाए जाते हैं, मगर एक हालिया अध्ययन के मुताबिक अनुवांशिक तौर पर महिलाएं पुरुषों से बेहतर गाड़ी चलाती हैं। 

विषम परिस्थितियों में रहतीं स्थिर: इस अध्ययन में पाया गया है कि ऑटो-स्पोर्ट की दुनिया में महिला ड्राइवर अनुवांशिक रूप से अपने पुरुष साथियों की तुलना में स्थितियों से बेहतर तरीके से निपटती हैं। बेशक दोनों के शारीरिक प्रदर्शन को लेकर लंबे समय से बहस जारी है। मगर अध्ययन में पाया गया है कि महिलाएं गाड़ी चलाते वक्त खराब परिस्थितियों का सामना करने में भी ज्यादा सक्षम हैं। विषम परिस्थितियों में तो वह ज्यादा स्थिर रहती हैं। 

होती हैं ज्यादा तेज-तर्रार: अध्ययन के मुताबिक महिला और पुरुषों की शारीरिक फिटनेस में कोई अंतर नहीं होता है लेकिन सही प्रशिक्षण और अनुभव के साथ महिलाएं ज्यादा तेज तर्रार होती हैं। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने तीन पुरुष एवं तीन महिलाओं का अध्ययन किया। इसमें उन्होंने देखा कि लिंग के आधार पर क्या वाकई कोई अंतर है। इसमें पाया गया कि दोनों की शारीरिक क्षमता बराबर है। शोधकर्ताओं ने दोनों के हृदय एवं श्वास गति, पूरी बॉडी, त्वचा के तापमान, तनाव आदि का विश्लेषण किया। हालांकि माहवारी के वक्त महिलाओं का शारीरिक तापमान खुद ही ज्यादा होता है। 

महिला ड्राइवरों का प्रोत्साहन जरूरी: मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता डेविड फग्र्यूसन का कहना है कि महिलाओं में खतरों से सुरक्षित तरीकों से लड़ने की अधिक क्षमता होती है। वहीं मोटरस्पोर्ट कमीशन में एफआईए वुमन की सदस्य कारमेन जॉर्डा ने महिला ड्राइवर्स को  फिजिकल रेसिंग अवसरों के लिए कम प्रोत्साहित किए जाने की आलोचना की है।  

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