भाजपा के कार्यकाल में देश के युवाओं पर लगा  बेरोजगारी का श्राप 

भाजपा के कार्यकाल में देश के युवाओं पर लगा  बेरोजगारी का श्राप 

बेरोजगारी की समस्त समस्याओं की जननी है| इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है| जहां विश्व के तमाम विकसित देशों ने इस समस्या के निजात के लिए अनेक विकल्पों की संभावना खोज ली है,वहीं भारत में यह समस्या अपना विकराल रूप धारण कर रही है| देश में बेरोजगारी के खात्मे के लिए समय-समय पर राजनीतिक संगठनों ने बीड़ा उठाया था| बेरोजगार मतदाताओं को लुभाने के लिए अनेक वादे हुए लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद  बेरोजगारी में लगातार वृद्धि दर देखी जा रही है| देश के गांव और शहरों में बेरोजगारी का प्रभाव समान रूप से देखा जा रहा है| जिसके कारण देश में आपराधिक गतिविधियों एवं आत्महत्या के आंकड़ों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है|

गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ें बताते हैं कि 2005 से 2015 के बीच देश में 26 हजार 229 लोगों ने गरीबी से परेशान होकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली | भले ही 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार ने नीतिगत रूप से स्व-रोजगार, कौशल विकास, रोजगार निर्माण, मेक इन इंडिया, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, प्रधानमंत्री रोजगार निर्माण योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री रोजगार जैसे कार्यक्रमों से देश के लोगों को सपना दिखाकर प्रतिवर्ष दो करोड़ रोजगार देने का वादा किया गया हो | लेकिन देश के लोगों को रोजगार मिलने के बजाय कार्यरत कर्मचारियों के रोजगार लगातार छिन जाने के अनेक मामले सामने आए हैं |

भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के  लेबर ब्यूरो ने 1 लाख 56 हजार 563 हाउसहोल्ड के वार्षिक रोजगार-बेरोजगार सर्वे में पाया है कि भारतीय जनता पार्टी के कार्यकाल में देश में सबसे अधिक बेरोजगारी बढ़ी है| सर्वे के अनुसार  2011-2012 में बेरोजगारी की दर 3.8 फीसदी थी जो बढ़कर 2012-2013 में 4.7 फीसदी, 2013-14 में 4.9 फीसदी,  2014-2015 में मंत्रालय ने सर्वे के आंकड़े जारी नहीं किए, 2015-2016 में यह दर घटी नहीं बल्कि और बढ़ गई,  2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर पिछले 45 साल के उच्चतम स्तर पर रही। सीएमआईई के अनुसार शहरों में बेरोजगारी की दर 7.8 प्रतिशत, ग्रामीण स्तर पर 5.3 प्रतिशत, शहरी क्षेत्रों में 15 से 29 वर्ष के पुरुषों के बीच बेरोजगारी दर 18.7 प्रतिशत जबकि शहरी इलाकों में महिलाओं के बीच 2017-18 के दौरान 27.2 प्रतिशत बेरोजगारी दर्ज की गई।

नेशनल सेंपल सर्वे ऑफिस (NSSO) के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के मुताबिक, साल 2017-18 में बेरोजगारी दर 6.1 फीसदी रही|  सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के अनुसार, 2013-14 से बेरोजगारी के आंकड़ों में जबरदस्त उछाल आया है और  दिसंबर 2018 तक बेरोजगारी दर बढ़ कर 7.4 प्रतिशत हो गई है| रिपोर्ट के अनुसार 2018 में एक करोड़ 90 लाख लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा | सेंटर फॉर इंडियन इकॉनोमी (सीएमआईई)के अनुसार 2017 के शुरुआती 4 महीनों में 15 लाख कर्मचारियों की नौकरी खत्म हो गई | उद्योगपतियों की कंपनियों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में बीएसएनल में कार्यरत 50 हजार कर्मचारियों के रोजगार खतरे में है |

अगस्ता में इंडिया टुडे-कार्वी के सर्वे के अनुसार 60 प्रतिशत लोगों ने बढ़ती हुई बेरोजगारी के जिम्मेदार मोदी सरकार की रणनीतियों को माना है| नवंबर 2016 में लागू की गई नोटबंदी के कारण  सक्रिय रूप से नौकरी तलाशने वाले बेरोजगारों की तादाद बीते साल जुलाई के 1.40 करोड़ के मुकाबले दोगुनी बढ़कर अक्तूबर में 2.95 करोड़ पहुंच गई | मोदी सरकार की नीतियों ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर जबरदस्त हमला किया है, जिसके कारण हिंदुस्तान के छोटे दुकानदार एवं व्यापारियों पर को सबसे अधिक नुकसान हुआ है|  फिर जीएसटी जैसे कानूनों ने भले  ही कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों को जरूर फायदा पहुंचाया हो लेकिन देश के गरीब वर्गों की कमर तोड़ के रख दी है| 

1994 में नाफ्टा पर हस्ताक्षर होने के बाद भी कई राज्यों में विनिर्माण क्षेत्र से आने वाली नौकरियां मेक्सिको में चली गईं | भारत में कामकाजी लोगों की कुल आबादी का आधा प्रतिशत कृषि क्षेत्र में कार्यरत है| लेकिन सरकारी नीतियां देश के किसानों को कृषि के लिए ऋण उपलब्ध नहीं करवाने के कारण किसान आत्महत्या के मामलों के आंकड़े में बढ़ोतरी हुई है | कृषि के क्षेत्र में रोजगार की संभावनाओं पर सरकार की कोई नीतियां नहीं है| धन के असमान वितरण के तहत कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों को के लिए सरकारी खजाने की चाबी खोल देना, देश के किसानों और गरीबों से मुंह मोड़ लेना,  मनरेगा जैसे कार्यक्रमों से बजट में कटौती कर देना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य पर लगातार घटता हुआ बजट, करोड़ों अरबों रुपए लूटकर विदेश भागने वाले अपराधियों पर कोई कानूनी कार्रवाई न होना,  योजनाओं को प्रचारित प्रसारित करने के लिए विज्ञापनों पर अरबों रुपए खर्च होना लेकिन जमीनी तल पर कोई कार्य न होना | देश की अथाह संपत्ति गैर जिम्मेदाराना कार्यों में बर्बाद कर देना देने से देश के युवा बेरोजगारी के चक्रव्यहू में फसते ही चले गए | मोदी सरकार के कार्यकलापों ने देश के युवाओं को बेरोजगार के दलदल में धकेला है| इस तरह लगातार बढ़ती हुई बेरोजगारी देश में अपराध एवं अशांति का  सबब न  बन  जाए | समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले समय में सौहार्दपूर्ण वातावरण के लिए अनेक  चुनौतियां पैदा हो जाएंगी |

 

 

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