अखण्ड सौभाग्य के लिए व्रत

अखण्ड सौभाग्य के लिए व्रत

ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को वट सावित्री व्रत 3 जून को है। अमावस्या तिथि दो जून को शाम 4:39 बजे से शुरू होकर तीन जून को दिन में 3: 31 तक रहेगी। महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती हैं।

अखण्ड सौभाग्य के लिए व्रत
स्वास्तिक ज्योतिष केन्द्र अलीगंज के ज्योतिषाचार्य एसएस नागपाल के अनुसार, इस बार वट सावित्री व्रत पर पड़ने वाले चार संयोग इस दिन को विशेष बनाएंगे। पहला सोमवती अमावस्या है। दूसरा संयोग सवार्थ सिद्धि योग, तीसरा संयोग अमृत सिद्धि और चौथा संयोग त्रिग्रही योग का बन रहा है। इस दिन शनि जयंती है। बरगद-पीपल पूजने से शनि, मंगल, राहू के अशुभ प्रभाव दूर होंगे। वट वृक्ष के नीचे इस दिन सावित्री सत्यवान की कथा सुनी जाती है। उन्होंने बताया कि इस दिन चार संयोग बनने से व्रत रखने से घर-परिवार में सुख-शांति का योग है।

वट सावित्री व्रत 2019: इस तारीख को है वट सावित्री, वट वृक्ष का है खास महत्व

महिलाएं ये व्रत अखण्ड सौभाग्य के लिये करती हैं। ये व्रत सावित्री द्वारा अपने पति को पुन:जीवित करने की स्मृति के रूप में रखा जाता है। वट वृक्ष की जड़ों में ब्रह्नाजी, तने में विष्णु जी और डालियों-पत्तियों में भगवान शिव का वास होता है। वट पूजा से अखण्ड सौभाग्य और उन्नति की प्राप्ति होती है। 

कच्चा सूत लपेटकर 108 बार परिक्रमा भी की जाती है

प्रात: स्नान के बाद बांस की टोकरी में सप्त धान्य और ब्रह्ना जी की मूर्ति रखें।दूसरी टोकरी में सत्यवान व सावित्री की मूर्तियों को रखकर वटवृक्ष के नीचे जाकर ब्रह्माजी की पूजा के बाद सत्यवान और सावित्री की पूजा करके बड़ (बरगद) की जड़ में जल देते हैं। वट वृक्ष पूजन में वट के तने पर कच्चा सूत लपेट कर 108 परिक्रमा का विधान है। न्यूनतम सात बार परिक्रमा अवश्य करनी चाहिए।

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