दैवीय आपदा से जूझता और सरकारी सहायता के बावजूद बे मौत मरते किसान और उनकी बेबसी पर विशेष संम्पादकिय

दैवीय आपदा से जूझता और सरकारी सहायता के बावजूद बे मौत मरते किसान और उनकी बेबसी पर विशेष संम्पादकिय

भारत जैसे देश में किसान को भगवान कहा जाता है और यहां पर समय समय से किसानों पर कुछ ऐसी फिल्में आधारित है। जिसमें भगवान को भक्त किसान के घर आकर उसकी चाकरी भी करनी पड़ती है और लक्ष्मी जी को भी विवश होकर अपने पति परमेश्वर के साथ किसान के घर रूप बदलकर रहना पड़ा है।

किसान को भगवान इसलिए  कहा जाता है क्योंकि वह जीव जंन्तु, पशु पक्षियों से लेकर  मनुष्यों तक का पेट भरता है और खुद नंगा भूखा सो जाता है। वह जिस कड़ी मेहनत व लगन से अपनी जान हथेली पर लेकर भगवान के सहारे खेती करता है यह जगजाहिर है।

आज भले ही सरकार किसानों को  खाद बीज दवा पानी और उसके विकास के नाम पर तमाम योजनाएं चलाती हो लेकिन दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आज भी देश के विभिन्न हिस्सों में हमारे किसान भाई कर्ज के तले दबकर रौदे जा रहे है।और आत्महत्या करने  पर भी विवस है।किसान और उसकी किसानी निम्न, मध्यम एवं उच्च तीन श्रेणी में विभाजित है।

निम्न श्रेणी के किसान वह होते हैं जिनके पास एक हेक्टेयर  या उससे कम खेती होती है जिन्हें  खेतिहर किसान मजदूर कहा जाता है। ऐसे किसानों के यहां अगर बाहर से कोई कमाई करने वाला नहीं है तो वह खेती नहीं कर सकता है

क्योंकि आजकल के जमाने में खेती करने में भी पर्याप्त धन व समुचित साधन की आवश्यकता होती है। एक एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के पास साल भर खाने तक का अनाज कभी कभी नहीं पैदा हो पाता है।

बीमारी आजारी शादी ब्याह जैसे  घर गृहस्थी,धार्मिक कार्य यज्ञ अनुष्ठान आदि को चलाने के लिए अन्ततः एक कर्ज़ ही सहारा होता है और उसे न चाहते हुए भी मजबूरी में लेना पड़ता है।

आज भले ही हमारी सरकार किसानों के लिए तमाम बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करवा रही हो उसके बावजूद आज भी लोगों को प्राइवेट यानी साहूकारों का सहारा लेना पड़ता है कभी- कभी तो घर गृहस्थी चलाने में घर के सारे जेवर और खेती तक गिरवी रख देना या बेच देना पड़ता है।

मध्यम वर्ग का किसान वह होता है जिसके पास 2 से ढाई एकड़ भूमि होती है। इनमें वह लोग आते हैं जिनके घर में बाहर से आमदनी का थोड़ा बहुत जरिया होता है। वह बाहरी कमाई को खेती में लगाकर खेती से पैदा होने वाले अनाज से अपना पेट भर लेते हैं

और किसी तरह घर गृहस्थी चला लेते हैं। तीसरा उच्च किसान वह होता है जिसके पास दो से 4-5 एकड़ या उससे अधिक भूमि होती है।खेती में सबसे छोटे किसान को जहां अपनी लागत पूंजी बचाना मुश्किल हो जाता है वही मध्यमवर्ग के किसानों  का हानि लाभ बराबर रहता है बशर्ते उसकी फसल प्राकृतिक आपदा दैवीय प्रकोप एवं अन्य किसी प्रकार से बच जाए। 

तो कहने का मतलब है कि खेती से लाभ 2 एकड़  से अधिक भूमि वाले किसानों को ही औसत मिल सकता है और वहीं व्यवसायिक खेती भी कर सकते हैं।यही कारण है कि  छोटे एवं मध्यम वर्ग के किसानों की हालत आज भी दयनीय बनी हुई है

क्योंकि खेती की लागत दिनो दिन बढ़ती जा रही है और दैवी प्रकोप ही नहीं जंगली जानवर एवं आवारा छुटा पशुओं व अन्ना मावेशियो के आतंक से बरबादी का खतरा बढ़ता जा रहा है।जलवायु परिवर्तन के चलते करीब-करीब हर साल किसान को बाढ़ तूफान सूखा बीमारी का सामना करना पड़ता है ऐसी हालत में महंगी पूंजी लगाकर  उसे वापस करने में उसे लाले लग जाते हैं।

आज छोटे एवं मध्यम वर्ग के जो किसान मजदूर के सहारे खेती करते हैं उन्हें तेजी से बढ़ती मजदूरी के साथ ही साथ महंगी किटनाशक दवाईया ,बीज, जुताई,बुवाई निराई गुड़ाई, खाद पानी का भी सामना करना पड़ रहा है। धान की एक दो बीघा खेती करने के लिए आज की तारीख में कम से डेढ़ से दो हजार रुपए लग जाते हैं इसके बाद खाद दवा पानी के नाम पर भी डेढ़ से दो हजार रुपए लग जाते हैं।

इस तरह कुल मिलाकर पांच हजार रुपए के आसपास लग जाते हैं जबकि 3 से 5 कुंटल से ज्यादा पैदावार नहीं हो पाती है जबकि साधन संपन्न बड़े किसानों को कम लागत में अच्छी पैदावार मिल जाती है जिससे उनकी हालत सुधर जाती है।

छोटे किसानों को लागत अधिक लगानी पड़ती है लेकिन फायदा उन्हें नहीं होता है क्योंकि वह साधन के अभाव में न तो समय पर जुताई बुवाई करा पाते हैं और न ही निकाई  दवाई बीज सिंचाई ही कर पाते हैं। समय पर जुताई बुआई सिंचाई निकाई दवाई खाद पानी उपलब्ध न हो पाने के कारण उसकी हालत पतली रहती है।

हमारी सरकार द्वारा किसानों की आमदनी दूनी करने का बीड़ा उठाया गया है साथ ही किसान सम्मान योजना की शुरुआत भी की गई है जिसका लाभ चुनाव के पहले ही तमाम भाग्यशाली किसानों को बिना किसी दौड़भाग के एक नहीं दो दो किस्त के रूप में मिल चुका है लेकिन जो किसान प्रधानमंत्री की सम्मान योजना से वंचित रह गए हैं

अब उन्हें अपना पंजीकरण कराने के लिए इधर उधर नामित अधिकारियों कर्मचारियों के पास व उनके दफ्तरों मे दौड़ना पड़ा रहा है। किसान को देश की रीढ़ माना जाता है इसलिए छोटे किसानों के वजूद को बचाए रखना राष्ट्रहित में जरूरी है क्योंकि उसी बेवश बेचारे  किसान के त्याग बलिदान के बल पर देश हरा भरा सोन चिर्रैया जैसा बना हुआ है।और इसी लिये किसान भाइयों को जय जवान जय किसान कहा जाता है।

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