ईक लड़की 

ईक लड़की 

ईक लड़की 

लेखक मान सिंह नेगी 

 हम आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे सीमांचल रेल से जो दिनांक 9-एक-2016, को 15 घंटा देरी से आई थी.  

हम मेट्रो में सीनियर सिटीजन की कुर्सी पर कब्जा करके बैठे हुए थे. 

 हमारे साथ एक बूढ़ी महिला बैठी थी. 

हम अपनी एक गंदी आदत के तहत मोबाइल में व्यस्त थे.

 शायद मोबाइल को लेकर हम बहुत ज्यादा ही पजेसिव है.

 जैसे ही हम मोबाइल से हटे हमारी नजरें सामने बैठी एक लड़की की तरफ गई. 

लेकिन तुरंत ही हमने अपने आप को नियंत्रित किया. हमने अपना ध्यान वहां से हटाया.

 लेकिन जब दूसरी बार हमारी नजर उसकी नजरों से मिली. 

हमे वह मधुर गीत याद आ गया. 

चोरी चोरी नजरे मिली चोरी चोरी दिल ने कहा चोरी मे है मजा.

इस बार हम उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए औजारों से नहीं बच सके.

 उसने हम पर एक के बाद एक नए हथकंडे अपनाए अपनी ओर आकर्षित करने के लिए. 

लेकिन हमारे साथ भी वही हुआ जो अक्सर बकरे की मां के साथ होता है. 

 शायद आपने सुना भी होगा आखिर बकरे की मां कब तक खैर मनाएगी एक दिन तो कसाई के चापड़ के नीचे आएगी.

 यही सोचकर हम बेचारे मरते क्या ना करते ध्यान भटका और उसके गोल चेहरे पर ठीक नाक से नीचे जरा हटके हमारे दिल ने अपने प्यार की सरगम छेड़ दी.

 जिस सरगम की तान से हमारा बच निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन था.

 अब हम वैसे ही नाच रहे थे. हम वैसे ही कर रहे थे. जो वह चाह रही थी. 

हमें अहसास होने लगा जैसे सपेरा नागिन को वश में कर लेता है.

ठीक उसी प्रकार उसने दोबारा हमें फंसाने के लिए अपनी दूसरी चाल भी चल दी.

 इस बार उसका वार पहले वार  से भी ज्यादा घातक था.

 हालांकि हम पहले ही उसके जाल में फंस चुके थे.

जैसे मछुआरे के जाल में मछली फंस जाती है.

 उसके बावजूद उसने झटका मारकर चेहरे पर अपने लंबे बाल गिराए फिर धीरे-धीरे से अपनी कोमल उंगलियों से जिस तरीके से लंबे घने केशों को हटाया. 

 वह खंजर सीधा हमारे दिल में ऐसा धंसा. 

हमारी सारी नियंत्रित तपस्या भंग हो गई. 

हालांकि मृग नैनी मैनका के तारकस के आगे मुनि विश्वामित्र की तपस्या भी भंग हो गई थी. 

 हम तो अभी मात्र 23 साल के थे. 

फिर हम कैसे उस मृगनैनी के तरकस से बच सकते थे.

 वह मेट्रो का सफर लगभग 1 घंटे का सफर मात्र 10 मिनट में कैसे बदल गया? 

 वह आज भी पहली बना हुआ है.

 प्यार के इस आंख मिचोली के खेल को खेलते खेलते.  

जब हमें अहसास हो गया शिकारी ने शिकार को पूरी तरह से अपने कब्जे में ले लिया है.

 तब हमने भी साहस करके पूछा आपका क्या नाम है? 

शायद पहले प्यार की, पहली दोस्ती की शुरुआत कुछ इसी प्रकार होती है.

 इससे पहले वे अपना नाम बताती हमने कहा सपना क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी? 

 वह भी तपाक से बोली दोस्ती और तुमसे, क्यों नहीं? 

इतने प्रयास यूं ही कोई किए हैं.

 आपको अपने प्रेम जाल में फंसाने के लिए.

 कितने पापड़ हमें बेलने पड़े हैं.

 यह आप और हम से ज्यादा कोई नहीं समझ सकता.

 अब आप और हम, हम और आप दोस्त बन गए. वह बोली मैं सपना नहीं माधुरी और आपका नाम? 

 हमने भी कहा मान सिंह नेगी.

 कहो सच कहा ना हमारी ईक  अनजान लड़की से आज दोस्ती हो गई.

एक तू और एक मै जो भी तन मन मे हो रहा था. मैट्रो सफर मे वो तो होना हीं था. 

 इतिश्री

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