अभिनेता,राजनेता,ब्यवसायी और अधिकारियों के प्रयासों से 36 वर्ष की रामलीला पेश कर रही है सामाजिक समरसता की मशाल

अभिनेता,राजनेता,ब्यवसायी और अधिकारियों के प्रयासों से 36 वर्ष की रामलीला पेश कर रही है सामाजिक समरसता की मशाल

यादों के झरोखे से श्री छेदीलाल धुरिया

70 वर्ष की उम्र पार करने आज भी स्वयं अपने मंचन से पात्र को जीवन्त करने वाले छेदी लाल धुरिया को मंचन करने का यह 36वाँ वर्ष है।

छेदीलाल धुरिया बताते है कि आधुनिकता के इस दौर में मन्चन से आम जन मानस को जोड़ के रखना कठिन होता जा रहा है। पहले लोग शाम 6 बजे से लेकर सुबह 4 बजे तक भी मन्चन देखने के लिए पूरे मनोयोग से जुड़े रहते थे फिर भी नए उम्र के कुछ लड़को की रुचि देखकर लगता है कि आज भी रामलीला का क्रेज बना हुआ है और आगे भी रहेगा।

श्री धुरिया पुराने समय को याद करते हुए बताते है उस दौर में ना ही साज सज्जा की इतनी ब्यवस्था थी ना ही रामलीला में इतनी चमक धमक थी। हम लोग हल पर लालटेन और गैस के उजाले में रामलीला का मंचन करते थे। मन्च बनाने के लिए ऊँचे टीले वाली जगह ढूंढ़ते थे साथ ही मेकअप आदि के लिए भी आज की तरह की ब्यवस्था नही थी।

संक्षिप्त इतिहास

महादेवा गाँव की रामलीला की शुरुआत भी काफी ऐतिहासिक है 1984 में समिति के जागरूक युवको श्री कप्तान लाल श्रीवास्तव, श्री अशोक श्रीवास्तव,श्री जयकेश त्रिपाठी, श्री दिनेश शुक्ल,श्री छेदीलाल धुरिया, स्व.श्री राम आसरे शुक्ल आदि ने बुजुर्गों स्व.श्री अवधेश त्रिपाठी, स्व.श्री महेश नारायण दुबे,डॉ राम तीरथ दूबे, स्व.डॉ. राजधर दूबे आदि के सानिध्य में रामलीला समिति की नींव रखी।

तत्कालीन ब्यवस्था में 34 रुपये चन्दा के रूप में प्राप्त हुआ था और मन्चन लालटेन के उजाले में हुआ था। समय के साथ जागरूक युवा समिति से जुड़ते गए और आज मन्चन का ऐतिहासिक स्वरूप प्राप्त कर चुका है।

समिति से जुड़े ज्यादातर कलाकार एवं पदाधिकारी उच्च शिक्षा प्राप्त कर ब्यवसाय,प्रशासन एवं राजनीति में प्रतिष्टित स्थान प्राप्त कर गाँव से बाहर निवास करते है परन्तु रामलीला हेतु विशेष अवकाश लेकर भागीदारी करने जरूर आते है।समय के साथ रामलीला में बदलाव हेतु एक सँयुक्त हस्ताक्षरी खाते का संचालन किया जा रहा जिसमे गाँव मे ना आ पाने वाले लोग ऑनलाइन माध्यम से चन्दा भेज देते है।

 मुम्बई में बैरी कंगना भोजपुरी फिल्मों अभिनय कर चुके श्री रमेश दुबे ने बताया कि आज के दौर में रामलीला जैसे आयोजन सामाजिक समरसता एवं पौराणिक महत्त्व को समाज की आगामी पीढ़ी तक पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करते है।

हमारे गाँव की रामलीला सामाजिक समरसता का एक अनूठी मिसाल है क्योंकि ना केवल हर जाति के लोगो का सक्रिय सहयोग रहता है अपितु हमारे यहाँ के ढोलक और तबला वादक विगत 20 सालों से मुस्लिम समुदाय के वादकों द्वारा बजाया जाता है। इस तरह के प्रायोजन होते रहने चाहिये इसीलिए हम लोग वर्ष में एक बार अपने गाँव मे जरूर आते है।

 अन्तराष्ट्रीय सङ्गठन के लिए फतेहपुर जनपद में काम कर रहे समिति के ब्यवस्था प्रभारी श्री महेन्द्र शुक्ल ने बताया कि आम जनमानस में महादेवा की रामलीला को लेकर एक अलग ही उत्साह रहता है। कई बार आस पास के जिलों मे जाने पर वहाँ के लोग महादेवा की रामलीला का जिक्र करते है जिससे हम लोग गौरवान्वित महसूस करते है।

कई बार गाँव के कुछ रिश्तेदार महादेवा की रामलीला देखने के लिए विशेष रूप से आते है। पात्रों द्वारा अभिनय कला का एक अनूठी प्रस्तुति के लिए महादेवा की रामलीला हमेशा याद की जायेगी।

प्रतापगढ़ में रहकर सुदूर क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु स्तरीय कोचिंग का विकल्प देने वाले समिति के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ संजय द्विवेदी ने बताया सबके सहयोग एवं सलाह से समिति के कार्यकर्ता महीनों दिन रात मेहनत करते है तब जाकर 7 दिन का कार्यक्रम का आयोजन हो पाता है।

आयोजन को सफल बनाएं जाने हेतु युवाओं का लगाव एवं बुजुर्गों का मार्गदर्शन बहुत जरूरी है।दर्शकों का हमारे गाँव की रामलीला से विशेष लगाव है कुछ तो ऐसे दर्शक है जो दो महीने पहले से ही रामलीला की तारीख पूछते रहते।

देखकर दंग रह जायेंगे

मुम्बई में बृहद ब्यवसायिक प्रतिष्ठान सन्चालित करने वाले समिति के निर्देशक श्री कृष्णा त्रिपाठी ने बताया की समय के साथ दर्शकों को जोड़कर रखने हेतु आवश्यक परिवर्तन एवं नवाचार अतिमहत्त्वपूर्ण है।

इस बार धनुष यज्ञ को ज्यादा से ज्यादा जीवन्त बनाये रखने हेतु विशेष प्रयास किये गए है साथ ही साज सज्जा में परिवर्तन कर आधुनिकता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

इसके अतिरिक्त रामलीला एवं हमारी पौराणिक कथाओं के प्रति आजकी पीढ़ी को जागरूक करने के लिये केबीसी के तर्ज पर प्रश्नोत्तरी श्रृंखला की शुरुआत भी की जाएगी जिसमें सबसे ज्यादा प्रश्नों का सही जवाब देने वाले बच्चे बच्चियों को आखिरी दिन सम्मानित किया जायेगा।

गाँव मे निवास करने वाले युवकों द्वारा एक माह पूर्व ही रिहर्सल शुरू कर दिया जाता है जिसमे प्रतिदिन नए लड़को को अभिनय की बारीकियां सिखाई जाती है।

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