साहित्य एंव संस्कृति का अद्भुत, अतुलनीय एंव ऐतिहासिक समागम

साहित्य एंव संस्कृति का अद्भुत, अतुलनीय एंव ऐतिहासिक समागम

हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी, मंथन साहित्य मंच, हिमवाणी संस्था एंव हिमाचल फिल्म सिनेमा के संयुक्त तत्वावधान में एक "सांस्कृतिक एंव साहित्यिक कार्यक्रम" का भव्य आयोजन सरस्वती विद्या मंदिर कुमारसैन के सभागार में किया गया।

इस कार्यक्रम में हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी के सचिव डॉ कर्म सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्होंने मुक्त कंठ से आयोजन के सफल एंव सराहनीय प्रयासों की प्रशंसा की।

कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित सशस्त्र सीमा बल के डिप्टी कमांडेंट आर के कुम्भारे, रमेश गौतम कमांडेंट होमगार्ड, कंवर मृगेन्द्र सिंह परिहार निदेशक मिल्कफैड, देवराज शांडिल उप-प्रधान ग्राम पंचायत भरेडी, डा. हमेन्द्र बाली, दीपक ठाकुर प्रधानाचार्य, मनजीत भारद्वाज अध्यक्ष एकल अभियान, राजीव भारद्वाज सचिव, हरीश सोनी पंचायत सदस्य, पूर्व अधिकारी प्रिंस राज ने शिरकत कर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

प्रतिष्ठित साहित्यकारों सहित इस कार्यक्रम में स्थानीय शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं तथा लोक संस्कृति से जुड़े स्थानीय लोगों की प्रस्तुतियां रही। कार्यक्रम में स्कूली बच्चों द्वारा सरस्वती वंदना, स्वागत गीत, एकल पहाड़ी गीत, नाटी, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नाटक, कविता पाठ तथा शिलारु महिला मंडल द्वारा लुप्त होते पारंपरिक विवाह गीत लाणे, नैंणी, जाति, गांगी विद्या की सूंदर प्रस्तुति सहित लोक नृत्य, एकल गीत, लघुनाटिका, पारम्परिक गीत आंचडी, पहाड़ी लोकगीत, जति पहाड़ी बोली, पारम्परिक गीत, आंचडी, विवाह गीत, संस्कार गीत के अद्भुत मंचन से ऐतिहासिक कार्यक्रम में मंच के माध्यम से लुप्त होती संस्कृति का अभूतपूर्व प्रचार एंव प्रसार किया गया।

लोक संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए हितेंद्र शर्मा, ताजी राम कश्यप, संजीत शर्मा द्वारा संचालित मंथन साहित्य मंच कुमारसैन एवं संजीव कुमार, कल्पना गांगटा, ज्ञानी शर्मा, उमा ठाकुर द्वारा संचालित हिमवाणी संस्था शिमला तथा केसी परिहार द्वारा संचालित हिमाचल फिल्म सिनेमा जैसी संस्थाएं अपने अपने स्तर पर साहित्य के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य कर रही है।

साहित्य को गांव के अंतिम मुंडेर तक पहुंचाने के इस प्रयास में युवा साहित्यकार रविता चौहान, सुप्रसिद्ध गजलकार कुलदीप तरुण गर्ग, हास्य कवि नरेश दयोग, ताजी राम कश्यप, आचार्य संजीत शर्मा, गीतकार विशु र ठाकुर, हितेन्द्र शर्मा, सतीश शर्मा, राजेश सारस्वत, राकेश शर्मा, पूजा सेमटा शर्मा, युविका शर्मा, वैदाशी शर्मा, प्रेशिका शर्मा, मनोज, विक्की, संजीव कुमार, कल्पना गांगटा, ज्ञानी शर्मा, उमा ठाकुर, मधु शर्मा, कुशल, स्नेह नेगी, अभिषेक तिवारी, प्रीति शर्मा, दीपक, कृष्णा, इशिता, आयुष, आर्यन, दीया, नीरज, इशु व हर्षित लोक संस्कृति से जुड़े रंगारंग कार्यक्रम तथा काव्य पाठ से कार्यक्रम को अतुलनीय बना दिया।

आईटीआई के छात्रों की संगीत मंडली सहित डीएवी, केपीएस, राज पब्लिक स्कूल, आईटीआई सहित सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कुमारसैन के बच्चों की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को अनेक मायनों में ऐतिहासिक बना दिया।

कार्यक्रम संयोजक हितेन्द्र शर्मा, संजीव कुमार, कल्पना गांगटा, उमा ठाकुर ने अपने अपने विचारों  द्वारा संस्था की गतिविधियों की जानकारी दी। कल्पना गांगटा और रविता चौहान द्वारा मंच का कुशल संचालन किया गया। वास्तव में इस संयुक्त मंच का मानना है कि यह प्रयास तभी सफल हो सकते हैं जब साहित्यक गोष्ठियां बंद कमरों से निकल कर गाँव की मुंडेर को छुएंगी। ग्रामीण परिवेश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं, जरुरत है तो बस उन्हें मंच प्रदान करने की।

साथ ही लुप्त होती विद्याओं को आने वाली पीढ़ी तक सहेज़ कर रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है, ख़ास कर बुद्धिजीवी साहित्यकार अपनी लेखनी से युवा पीढ़ी को साहित्य सृजन के लिए प्रेरित कर सकते हैं। नशे के गर्त से उन्हें बचा सकते हैं। लोक संस्कृति के इस अनमोल खजाने को युवा पीढ़ी को साथ में जोड़ कर आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेज कर रखना हम सभी का दायित्व है। सभी को आगे आ  कर अपने अपने स्तर पर हिमाचल की समृद्ध लोक संस्कृति  को “विश्व पटल” तक पहुँचाने का प्रयत्न करना चाहिए।

(हितेन्द्र शर्मा, संयोजक एंव अध्यक्ष साहित्य मंच मंथन)

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