विधवा ने लगाई गुहार पेंशन नहीं देना है तो मौत ही दे दो

विधवा ने लगाई गुहार पेंशन नहीं देना है तो मौत ही दे दो

 

बहराइच। 

जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर खड़ी विधवा सुन्दरपती अपने अधिकारों के लिए पिछले लगभग 18 वर्षों से विभाग का रास्ता नापने के बाद अब न्याय की दरकार में जिलाधिकारी से लेकर प्रधानमन्त्री तक अपनी पीड़ा व्यक्त कर न्याय न मिलने की दशा में उसे अपनी मौत के लिए फ़रियाद करनी पड़ रही है। पीड़िता के पुत्र कौशल कुमार वर्मा द्वारा जिलाधिकारी,मुख्यमंत्री व प्रधानमन्त्री सहित अन्य कई जिम्मेदार लोगों तक मामले की जानकारी भेजकर आरोप लगाया गया है कि जिला विकास कार्यालय में तैनात विभाग के बाबू संजय मिश्रा सहित कई अन्य ने सरकारी दस्तावेजों में हेराफेरी कर उसकी माँ को पेंशन से वंचित कर दिया।
   एक ओर जहाँ प्रशासन व शासन बुजुर्गो व पेंशन धारियों के प्रकरण को लेकर नित नए नए निर्देश जारी किया करती है वहीं दूसरी ओर ऐसे ही लोगों को विभागीय कर्मचारियों की उदासीनता व उपेक्षाओं के कारण विभागों के चौखट रगड़ते हुए भी देखा जाता है। और यहां भी जो प्रकरण सामने आया है उसमें एक विधवा अपने ही अधिकारों के लिए 1या 2 वर्षों से नहीं बल्कि लगभग 18 वर्षों से प्रताड़ित होती देखी जा रही है।मामला सन 2000- 2001 का बताया जा रहा है जिसमें मोहल्ला खत्रीपुरा निवासी पीड़िता सुन्दरपती का कहना है कि उसके पति स्वर्गीय जगदीश शरण वर्मा जिला विकास कार्यालय बहराइच में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत थे जिनकी दो शादियों के बीच वे 2000 में रिटायर हो गए और दिनांक  03. 06 2001 को उनकी मृत्यु हो गई।उसने बताया कि उनकी मौत के बाद उसके द्वारा पेंशन के लिए जिला विकास कार्यालय में एक प्रार्थना पत्र दिया गया लेकिन विभाग द्वारा उसे दिए गए जवाब में स्वर्गीय जगदीश की दूसरी पत्नी मधुबाला के नाबालिग पुत्र प्रदीप कुमार वर्मा के पेंशन स्वीकृत की बात बताई गई। सुंदर पति द्वारा बताया गया कि ऐसा जवाब मिलने के बाद मेरे द्वारा 14. 03.2003 को एक पत्र तत्कालीन जिलाधिकारी संजय प्रसाद को देकर मामले से अवगत करवाया गया जिस पर जिलाधिकारी द्वारा गहनता से परीक्षण करने के बाद दिनांक 11 .12. 2003 को एक आदेश जिला विकास अधिकारी के नाम से पारित करते हुए उल्लेख किया कि श्रीमती सुंदर पति जीवित हैं तथा स्वर्गीय जगदीश शरण वर्मा की प्रथम पत्नी है अतः पारिवारिक पेंशन की परिभाषा के अनुसार वही पेंशन की पात्र हैं। लेकिन तब से लेकर अब तक उन्हें सिर्फ दौड़ाया ही जाता रहा है। उसके द्वारा जहाँ मामले का सबसे बड़ा गुनहगार पूर्व लिपिक व वर्तमान प्रशासनिक अधिकारी संजय मिश्रा को बताया जा रहा है।वही उसके पुत्र कौशल कुमार वर्मा द्वारा बताया गया कि उसके पिता की मौत के बाद वहां के बाबू व वर्तमान वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी संजय मिश्रा की जबरई व हठवादिता से ही पिछले 18 वर्षों से सब कुछ उसकी माँ के हक़ में होने के बाद भी उन्हें आज तक पेंशन नहीं मिला।जबकि हिन्दू ला एक्ट में पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी की कोई मान्यता ना होने के बाद भी सरकारी दस्तावेजों में छेड़छाड़ कर हमारे स्वर्गीय पिता की दूसरी मृतक पत्नी मधुबाला के लड़के प्रदीप कुमार वर्मा के नाम पेंशन निर्गत कर दिया गया।जिसमें संजय मिश्रा के साथ साथ उसके सहायक राम फेरन वर्मा व अन्य की भी संलिप्तता बताने के साथ कहा गया कि इन लोगों द्वारा मेरी मां को परिवारिक पेंशन ना दिए जाने हेतु दस्तावेजों को कूट रचित तरीके से प्रस्तुत कर संयुक्त निदेशक कोषागार को प्रेषित करते हुवे अभिलेखीय हेरा फेरी कर प्रदीप कुमार वर्मा के नाम से पेंशन निर्गत कर दी गई। जिसमें कोषागार बहराइच की भूमिका भी संदिग्ध बताते हुवे बाबू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को भी गुनाहगार बताया गया।
 श्री वर्मा द्वारा यह भी बताया गया कि उक्त हुए खेल में तत्कालीन जिलाधिकारी संजय प्रसाद द्वारा उक्त लोगों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर दंडनात्मक कार्यवाही करवाने के साथ साथ प्रदीप कुमार वर्मा द्वारा ली गई पेंशन की रिकवरी करवा कर हमारी मां सुंदर पति को पेंशन देने की बात कही गई।लेकिन आज मरणासन्न की ओर अग्रसर व मामले के 18 वर्ष बीत जाने के बाद भी मेरी मां को एक रुपया भी नहीं दिया गया है।जिसमें सबसे बड़ी भूमिका संजय मिश्रा की रही है,और आज भी वे कहते हैं तुम्हारी माँ जगदीश की पत्नी नहीं है।जबकि स्व0 इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में इमरजेंसी के दौरान सरकारकारी कर्मचारियों व उनकी पत्नियों के लिए के लिए लागू की गई नसबंदी योजना के अंतर्गत हमारी माँ सुन्दरपती द्वारा नसबंदी सर्टिफिकेट लगाने के बाद ही हमारे स्व0 पिता की नौकरी सुरच्छित हो सकी थी।फिर आखिर विभाग किस बिना पर हमारी माँ को उनकी पत्नी क्यों नहीं मान रहा है।
 श्री वर्मा द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि संजय मिश्रा धमकी देते हैं कि जब तुम तब हमारा कुछ नहीं कर पाए तो अब क्या कर पाओगे, तुम्हें पता  नहीं कि न तो डीएम हमारा कुछ कर पाएंगी न मंत्री। सचिवालय तक हमारे लोग बैठे हुए हैं। श्री वर्मा ने बताया कि श्री मिश्रा का कहना है कि ज्यादा उड़ने की कोशिश मत करो नहीं तो दुनिया से ही उड़ जाओगे।अब भगवान के घर पर जाकर हिसाब कर लेना।
 उक्त के संदर्भ में जब तरुण मित्र द्वारा संजय मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वो साफ़ साफ़ झूठ बोल रहा है वो हमसे मिला ही नहीं।श्री मिश्रा ने कहा कि जब सरकारी अभिलेखों में सुन्दरपती का नाम कहीं दर्ज ही नहीं है तो उन्हें किस आधार पर पेंशन दे दिया जाय।
जब उनसे पूंछा गया कि आखिर किन परिस्थितियों में जगदीश की दूसरी मृतक पत्नी मधुबाला के नाबालिग पुत्र प्रदीप कुमार वर्मा को पेंशन निर्गत कर दी गई, तो कहा हमने स्व0 जगदीश द्वारा उपलब्ध करवाए गए दस्तावेजों के के आधार पर ही कार्यवाही की है।
उक्त प्रकरण में जब डी0डी0ओ0 वीरेंद्र सिंह से पूंछा गया कि जब हिन्दू ला एक्ट में पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी करने का प्राविधान नहीं है फिर किस आधार पर स्व0 जगदीश की मृत दूसरी पत्नी के नाबालिग पुत्र को पेंशन निर्गत कर दिया गया।तो उन्होंने कहा कौन कितनी पत्नियां रखता है इससे मतलब नहीं है,मतलब स्व0 जगदीश द्वारा अपना नॉमिनी घोषित करने से है।उन्होंने संजय मिश्रा से मंगवाई गई फाइल को खोलकर स्व0 जगदीश द्वारा प्रदीप को अपना नॉमिनी घोषित किये जाने का दस्तावेज दिखाते हुवे कहा कि अब सच्चाई आप खुद ही देख लीजिए।
लेकिन जब उक्त प्रकरण के सन्दर्भ में पीड़ित द्वारा जिला कोषागार पर लगाए गए आरोपों को लेकर कोषागार अधिकारी अशोक कुमार प्रजापति से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला हमारे समय का नहीं है इसलिए मैं अभी बहुत कुछ नहीं कह सकता आप मामले की पूरी जानकारी उपलब्ध करवाइये जो भी उचित कार्यवाही होगी उसे की जायेगी।
 लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल  यह है कि जब हिंदू ला एक्ट में बगैर पहली पत्नी को तलाक दिए दूसरी शादी करने का प्राविधान है ही नहीं  फिर विभाग द्वारा स्व0 जगदीश की दूसरी मृतक पत्नी के   पुत्र को वैध मानकर उसके नाम पेंशन की संस्तुति करते हुवे जिला अधिकारी के आदेशों की अवहेलना आखिर किन हालातों में की?जब साक्ष्य दस्तावेजों के अनुसार सुंदरपती को ही जगदीश की प्रथम पत्नी बताया जा रहा है तो विभाग आखिर किन परिस्थतियों में साच्छ्यों को झुठलाते हुवे जल्दबाजी कर गया?जबकि संजय मिश्रा द्वारा दिखाये गए दस्तावेजों में कुछ ऐसे भी थे जो प्रशाशनिक जांच में झूठे साबित किये जा चुके थे।जिसमें वारिसान से सम्बंधित एक दस्तावेज अपनी भ्रष्टता के लिए चर्चित पूर्व लेखपाल बशीर अहमद द्वारा जारी किया गया प्रमाण पत्र भी था।जिसे जांच में तहसीलदार द्वारा ख़ारिज भी कर दिया गया था।
हालांकि सूत्रों की माने तो संजय मिश्रा भ्रष्ट किस्म के कर्मचारी बताये जाते हैं,जिन पर कई योजनाओं के साथ साथ फाइलों में हेरा फेरी के भी आरोप लगाए जा रहे हैं।
कुछ लोगों का यह भी कहना है कि संजय मिश्रा आखिर किन हालातों में वर्षों से एक ही जिले में चिपके हुवे हैं,कहा यह भी जाता है कि यदि संजय मिश्रा के कार्यकाल में अब तक आई सरकारी योजनाओं की ही किसी ईमानदार एजेंसी से जांच करवा ली जाय तो इस विभाग में हुवे करोड़ों अरबो का घोटाला सामने आ सकता है।
 फिलहाल मामला जो भी हो लेकिन मामले में लंबे अंतराल से न्याय पाने के लिए लगातार अपनी माँ के हक के लिए अपनी मां के साथ खड़े कौशल कुमार वर्मा ने एक बार फिर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री,मुख्य सतर्कता आयुक्त भारत सरकार, जिलाधिकारी बहराइच व पुलिस अधीक्षक सहित अन्य को शिकायती पत्र भेजकर न्याय ना दिलवाये जाने की स्थिति में अपने साथ साथ अपनी मां को भी इच्छा मृत्यु का आदेश दिए जाने की गुहार लगाई गई है।

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