विश्व भौतिकता वाद के कारण फैल रही अशांति से मानव स्तीत्व खतरे में : प्रो.रजनीश

विश्व भौतिकता वाद के कारण फैल रही अशांति से मानव स्तीत्व खतरे में : प्रो.रजनीश

            रिपोर्टर - अजय कुमार उपाध्याय

हाटा,कुशीनगर -

विश्व भौतिकता वाद के कारण तेजी से अंधकार की तरफ बढ़ता जा रहा है। चारो तरफ अशान्ति फैलती जा रही है। इसके कारण कब उसका अस्तित्व समाप्त हो जाय कुछ कहा नहीं जा सकता है।

इससे बचने का एकमात्र उपाय शान्ति व संतुष्टि है जो हमें संस्कृत से प्राप्त हो सकती है। ऐसे में शान्ति व संतुष्टि के लिए संस्कृत भूमिका अहम है।

ये बातें रविवार को नगर के श्रीनाथ संस्कृत महाविद्यालय के सभागार में महाविद्यालय के 95 वें स्थापना दिवस पर संस्कृत एवं भारतीय संस्कृति विषय पा आयोजित संगोष्ठी को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए कुलपति महात्मा गांधी अन्तर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्घा महाराष्ट्र प्रो. रजनीश कुमार शुक्ल ने कही।

उन्होंने कहा कि ज्ञान  मनुष्य को उत्पादक बनाता है तथा संतुष्टि प्रदान करता है। भातिक दिक्कतों को ज्ञान के माध्यम से ही समाप्त किया जा सकता है। व्यक्ति को ज्ञान विद्या व अविद्या से प्राप्त होते हैं।

गोष्ठी के मुख्य वक्ता गोरखपुर विश्वविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो़ मुरली मनोहर पाठक ने कहा कि सत्य की रक्षा से ही संस्कृति की रक्षा संभव है। समाज मानवीय मूल्यों से दूर भाग रहा है। इससे मूल्य तेजी से गिर रहा है और भारतीय संस्कृति का क्षरण हो रहा है। पाश्चात्य सभ्यता को समाज तेजी से अपनाते हुए अपनी संस्कृति को भूलता जा रहा है। 

संस्कृत भारतीय संस्कृति की पोषक है। दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो़ दीप्ति त्रिपाठी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए संस्कृत के मूल ग्रन्थों का अध्ययन जरुरी है। संस्कृत के ह्रास के कारण संस्कृति पर खतरे के बादल मड़रा रह हैं। संस्कृति के पारम्परिक ज्ञान संस्कृत में ही निहीत है। संस्कृत भाषा जैसी विश्व की कोई भी भाषा नहीं है। 

उन्होंने कहा कि भाषा विज्ञान भारत के व्याकरण परम्परा से है और संस्कृत के ज्ञान परम्परा को कार्यन्वित करने की आवश्यकता है। पूर्व न्याय विभागाध्यक्ष सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय प्रो़ वशिष्ठ त्रिपाठी ने कहा कि संस्कृत प्राचीन भाषा है और सभी विज्ञानों में सर्वश्रेष्ठ है। संस्कृत के विलोप के कारण ही भारतीय संस्कृति का पतन हो रहा है। इसकी रक्षा के लिए तथा देश की सुरक्षा के लिए संस्कृत का उत्थान अति आवश्यक है।

कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय प्रबन्ध समिति ने महाविद्यालय के 95 वें स्थापना दिवस के अवसर पर देश के ख्यातिलब्ध संस्कृत भाषा के पुरोधा पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्ष संस्कृत दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रो़ दीप्ति त्रिपाठी व पूर्व न्याय  विभागाध्यक्ष सम्पूर्णानन्द विश्विद्यालय प्रो़ वशिष्ठ त्रिपाठी को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया। 

कार्यक्रम को हाटा विधायक पवन केडिया व नगरपालिका अध्यक्ष मोहन वर्मा,शिक्षक विधायक ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व निदेशक द्वारिकाधीश संस्कृत एकेडमी द्वारका गुजरात प्रो़ जयप्रकाश नारायण द्विवेदी ने की। आगन्तुकों का स्वागत प्रबन्ध समिति के मंत्री गंगेश्वर पाण्डेय ने की तथा आगन्तुकों के प्रति आभार प्रबन्ध समिति के प्रबन्धक अग्निवेश मणि ने व्यक्त किया।

इस दौरान प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश पाण्डेय,जोखन प्रसाद वर्नवाल,प्राचार्य डा़ राजेश चतुर्वेदी,प्रो़ रमेश कुमार द्विवेदी,प्रो़ अनन्त मिश्रा,प्रो़ हरेराम त्रिपाठी,पूर्व प्राचार्य चन्द्रेश्वर पाण्डेय,गौरव त्रिपाठी,बी़आऱ पाठक,नन्द किशोर नाथानी, रामसुभाष पाण्डेय आदि उपस्थित रहे।

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