पिछले 8 वर्षों से मूक बधिर दम्पति पेंसन के इंतजार में: मिशन बदलाव

जीविकोपार्जन के लिये उत्तरप्रदेश के ईंट भट्ठे में मजदुरी करने को विवश दिव्यांग एवं मजदूर
 
पिछले 8 वर्षों से मूक बधिर दम्पति पेंसन के इंतजार में

पिछले 8 वर्षों से मूक बधिर दम्पति पेंसन के इंतजार में: मिशन बदलाव

जीविकोपार्जन के लिये उत्तरप्रदेश के ईंट भट्ठे में मजदुरी करने को विवश दिव्यांग एवं मजदूर

 गुमला ( झारखण्ड )


मिशन बदलाव का गांव चलो गांव बदलो अभियान के तहत  जितेन्द्र कुमार,शिव कौसल,विक्रम कुमार और संदेश उराँव  ने घाघरा प्रखण्ड के ईचा गांव का दौरा किया। जिसमे मिशन बदलाव के सदस्यों को मूक बधिर दंपति के  माँ ने बताया कि  दोनों दंपति  जन्म से ही बोल नही सकते हैं ।उसके  पिता अपने बच्चों के परवरिश के लिये ईंट भट्ठे उत्तरप्रदेश में काम करने जाते है।उसका एक भाई राँची नगर निगम में कूड़े कचरा उठाने का काम करता है। उसके बाद और एक भाई  उत्तर प्रदेश के ईंट भट्ठा में मजदूरी करने को विवश है। मिशन बदलाव के सदस्यों  ने कहा कि दंपति जीविका यापन के लिए उत्तरप्रदेश के ईंट भट्ठे में काम कर रहे हैं। जहां उनको 1000 ईंट ढोने के एवज में 100 रुपया मिलता है। लेकिन  लॉकडाउन  के वजह से अपने गांव में ही है। दंपति के माता ने बताया कि  पेंसन बनाने के लिये  दलालों ने 4 हजार रुपये भी ठग लिया  लेकिन पेन्शन नहीं बना। वे सभी सरकारी कार्यालय का भी चक्कर लगाया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

मिशन बदलाव के सदस्य ने बताया कि  परिजनों  अब थक हार चुके हैं और उसकी  माता पिछले 8 वर्षो से अपने बच्चे के मूक बाधित पेंशन के लिए भी परेशान है ।परिजन गुमला से घाघरा दौड़ लगा के थक चुके हैं ।अब उनको आशा नहीं  है कि वो अपने बच्चे को पेंशन दिला पायेंगे।परिजनों ने बताया कि मूक बाधित प्रमाण पत्र के लिए उनके परिजनों के दौड़ने के बाद भी  प्रमाण पत्र  नहीं बना।
मिशन बदलाव के सदस्यों ने  बताया कि दंपति बहुत गम्भीर समस्याओं से गुजर रहे हैं।और इनका जीवन अंधकार में है और अन्य राज्यों में मजदूरी करने को विवश हैं।इनकी  समस्या को ध्यान देते  हुए मिशन बदलाव के राजकुमार ने  मुख्यमंत्री  एवं प्रशासन को ट्वीट के माध्यम से  अवगत करा दिया है।

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