जातिवाद का ज़हर आखिर बोया किसने?

अरे हम गर्व से राम कहें,तो आप भी जय परशुराम कहाएँ!!

गोण्डा –
उन्नतिशील,स्वच्छ समाज की संरचना में अथवा एकता,समानता के बीच बाधा बनती आ रही जाति,वादिता का पोषण करने वाले राजनैतिक खेमों के षड्यंत्र में आज पूरा समाज संलिप्त पाया जा रहा है।

ये सबसे बड़ी गलती है जो इस देश की संस्कृति को खतरे में डाल सकती है जिसकी चिंता में तमाम बुद्धजीवी विप्र श्रेष्ठ ब्राह्मणों ने समाज की कुंठा को तोड़ने के लिए संघठनों की आवश्यकता को महसूस किया और विरुद्ध प्रपंचों की गहरी जड़ों पर प्रहार करने की दिशा में अपने को संघठित करने की कोशिशें की जाने लगीं,
ये कोशिशें केवल स्वयं की उन्नति के लिए नही अपितु समूची मानवजाति और इस देश की सनातन संस्कृति को जीवंत बनाये रखने की पहल है और इसकी दुंदुभी के लिए अत्याचार विध्वंशक जय श्री परशुराम जय घोष का नारा दिया गया..

अब मात्र इतने से ही उपरोक्त की सत्यता का परीक्षण किया जा सकता है।

ब्राह्मण कभी किसी जाति सम्प्रदाय से द्वेष की भावना नही रखता इसका सबसे बड़ा उदाहरण ये है की क्षत्रिय कुल वंश में जन्मे प्रभू श्री राम का नाम महिमा का गुणगान और भक्ति विधान और यदुवंशीय कुल में जन्मे भगवान श्री कृष्ण की भक्ति आचरण ब्राम्हणों को सहज स्वीकार है यही नही विभिन्न कुल धर्मों के देवी देवताओं की पूजा अर्चना जय घोष सब कुछ बिना भेद भाव हम करते आ रहे है।

किन्तु अन्य कोई न तो हमें स्वीकार करता है और न हमारे कुल श्रेष्ठ का जय घोष पसन्द करता है।

हम जय श्री राम
जय श्री कृष्ण
इत्यादि-इत्यादि भगवन नामों का सहर्ष श्रवण आचरण करते हैं।
मगर कभी किसी गैर ब्राह्मण के मुख से जय परशुराम का उच्चारण सुनाई नही देता,
उद्घोष की तो बात दूर की अगर मोबाइल का रिंग टोन बज जाए तो उस पर भी आपत्ति होती है।

क्यों?
इसका क्या कारण हो सकता है?

जब हम ब्राह्मण बिना किसी भेदभाव के सभी जाति धर्म को स्वीकार करते हैं तो हमसे परहेज करने का आशय वे स्पष्ट कर सकते है जो इस मिथ्या परपंच का प्रचार प्रसार करते हैं की ब्राह्मण अन्य का शोषण करते हैं अथवा अन्य जातियों के प्रति द्वेष भावना रखते है।

हम श्री राम कृष्ण का गान करें!!
केवट,सबरी का सम्मान करें!!

गुरु गोविन्द को शीश झुकाएं
नानक की गाथा गा कर हम
जीवन निर्मल स्वच्छ बनाएं
फिर भी दुनियां वाले हम पर द्वेष पूर्ण आरोप लगाएं??

अरे हम गर्व से राम कहें,तो आप भी जय परशुराम कहाएँ!!

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