मकर संक्रांति की वैज्ञानिकता

डा. कमाल अहमद सिद्दीकी एसोसिएट प्रोफेसर वनस्पतिविज्ञान, राजकीय महाविद्यालय बिलोहा, गैंसड़ी, बलरामपुर.

 
मकर संक्रांति की वैज्ञानिकता

स्वतंत्र प्रभात


बलरामपुर सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है. संक्रांति के लगते ही सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण आ जाते हैं. संक्रांति से ही दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती है. दिन बड़ा होने से सूर्य का प्रकाश अधिक समय तक रहने लगता है और रात छोटी होने से अंधेरे का समय घटने लगता है. समस्त जीवधारियों, पशु पक्षीयों, पेड़- पौधों के वृद्धि और विकास के लिए प्रकाश नितांत आवश्यक होता है .मकर संक्रांति से संसार सुषुप्ति से जाग्रति की ओर अग्रसर होता है. मकर संक्रांति से प्रकाश काल अधिक होने से प्राणियों में चेतना एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होती है. इसलिए संक्रांति को अंधेरे पर प्रकाश के जीत के पर्व के रूप में मनाया जाता है. इसलिए मकर संक्रांति पर्व न केवल भारत अपितु पूरी मानव जाति के लिए उल्लास का पर्व है . सम्भवतः संपूर्ण विश्व का यह एक ऐसा अद्भुत पर्व है जो किसी स्थानीय घटना, मान्यता,परंपरा या विश्वास से संबंधित नहीं है बल्कि वैश्विक भूगोल पर आधारित एक खगोलीय घटना है जो प्राणी मात्र के कल्याण की भावनाओं से ओतप्रोत होकर सम्पूर्ण भूलोक में नव स्फूर्ति और आनंद का संचार करती है. 

    मकर संक्रांति के समय पूरे देश में विशेषत: उत्तर भारत में ठंड का मौसम होता है सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करने से मौसम में बदलाव होता है इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी होने के साथ ही विभिन्न प्रकार की बीमारियों के प्रकोप का खतरा बढ़ जाता  है.इसीलिए इस अवसर पर पवित्र नदियों में स्नान करने, खिचड़ी ,तिल, गुड़ या इनसे तैयार व्यन्जनों का सेवन करने की परम्परा है.हिमालय से निकलने वाली पवित्र नदियाँ औषधीय जड़ी- बुटियों और लाभकारी मिनरल से युक्त होती हैं.जिससे इनका जल पवित्र,निर्मल,    पित्त नाशक, वात- विकार निवारक तथा त्रिदोष को शांत करने वाला बन जाता है.मकर संक्रांति पर नदियों मे वाष्पन की क्रिया होती है. इसलिए इस अवसर पर इन नदियों में स्नान करने  से तमाम तरह के रोगों से मुक्ति मिलती है खिचड़ी में दाल, हरी मटर- सब्जी,  अदरक, नमक ,हल्दी और घृत आदि का प्रयोग होता है.ये सभी पोषक तत्व के रुप में पाचन शक्ति को दुरुस्त करने,शरीर को गर्मी देने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और रोगाणुओं से लड़ने में मदद करते हैं. गरम तासीर वाले तिल और गुड़ का सेवन सेहत के लिए लाभदायक होता है . तिल और गुड़ को मिला कर कई स्वादिष्ट  पकवान बनाये जाते हैं. गुड़ के साथ मिलकर तिल की पौष्टिकता कुछ अधिक ही बढ़ जाती है.सामान्य रुप में लोग इसे स्वाद के लिए प्रयोग करते हैं परन्तु ये गुड़और तिल वास्तव में औषधीय गुणों की खान हैं .

गुड़ स्वाद और सेहत का खजाना कहा जाता है.इसे एक सुपर फूड  कहा जाय तो अतिशयोक्ति नहीं होगी. गुड़ शक्तिवर्धक फूड के रुप में शरीर को  ऊर्जा प्रदान करता है. यह भूख खोलने वाला और गैस- एसिडिटी से छुटकारा दिलाते हुए पाचन शक्ति को  बढ़ावा देने में मदद करता है .गुड़ में आयरन की प्रचुर मात्रा होने के कारण यह रक्त के लाल रंग हीमोग्लोबिन को बढ़ाने में सहायक है. गुड़ में पाये जाने वाले कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूती प्रदान करते हैं. सर्दी - जुकाम, खांसी में गुड़ लाभकारी है . गुड़ के सेवन से माइग्रेन में आराम मिलता है.  गुड़ एक अच्छा मूड बूस्टर  है गुड़ सेवन आपके मूड या चित्तवृत्ति को खुशनुमा बनाने में मदद करता है. 

     आयुर्वेद मे तिल कफनाशक, पुष्टिवर्धक और तीव्र असर कारक औषधि के रूप में माना जाता है. तिल स्वभाव से गर्म होता है इसलिए सर्दियों में विशेषत: मकर संक्रांति के अवसर पर  तिल को विभिन्न पकवानों या मिठाईयों के रूप में सेवन किया जाता है. तिल में मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड, ओमेगा-6, प्रोटीन और फाइबर  प्रचुर मात्रा में  मिलते हैं जो उसे पोषण का एक काम्बो पैक बना देते हैं यह भरपूर ऊर्जा देने के साथ ही कोलेस्ट्रॉल कम करने ,मोटापा घटाने, वजन कम करने और मसल गेन करने में सहायक होते है. तिल में कैल्शियम ,मैग्नीशियम, मैंगनीज, कापर, जिन्क, आयरन, विटामिन बी-6 और विटामिन -ई की उपलब्धता बहुत अच्छी मात्रा में होती है .इसके सेवन से हड्डी और दांत को मजबूती मिलती है और हड्डी  सम्बंधित रोग ओस्टिओपोरोसिस से छुटकारा मिलता है. तिल में मानसिक दुर्बलता को कम करते हुए तनाव कम करने, हृदय की माँस पेशियों को सक्रिय करने, खून में श्वेत रक्त कणिकाओं को  विकसित करने तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बढा़ने  का गुण  होता है . तिल में मौजूद  विशिष्ट डाइटरी प्रोटीन मांशपेशियों को मजबूती प्रदान करने ,त्वचा में कांति और त्वचा में आवश्यक नमी बनाए रखने में सहायक होते हैं. तिल में पाये जाने वाले कुछ एंटीऑक्सीडेंट कैंसर कोशिकाओं के  वृद्धि रोकने में मददगार होते हैंऔर महत्वपूर्ण अमीनो अम्ल मूड बूस्टर के रुप में मदद करते है.
 

   

FROM AROUND THE WEB