राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान हर नागरिक का संवैधानिक दायित्व : डॉ. चौहान

 
राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान हर नागरिक का संवैधानिक दायित्व

कहा, शरिया या कुरान के नाम पर कानून और संविधान की अवहेलना की इजाजत नहीं

करनाल।

 राष्ट्रगान 'जन-गण-मन', राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम ' और राष्ट्रध्वज तिरंगे का सम्मान प्रत्येक भारतीय नागरिक का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है। जो लोग इस जिम्मेदारी का निर्वहन करने में तकलीफ महसूस करते हैं, उनकी राष्ट्र के प्रति निष्ठा संदिग्ध है। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें लज्जित और दंडित किया जाना आवश्यक है। 

भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने आज यहां जारी एक वक्तव्य में कहा कि साधारण स्कूल हो या इस्लामिक शिक्षा देने वाले मदरसे, सब भारत के कानून के दायरे में आते हैं। किसी को राष्ट्रीय प्रतीकों और मर्यादाओं के उल्लंघन की इजाजत नहीं दी जा सकती। वह मदरसों में राष्ट्रगान गायन की अनिवार्यता के संदर्भ में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे।

भाजपा नेता डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में राष्ट्रगान की अनिवार्यता के लिए अलग से आदेश जारी करने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि वहां बड़ी संख्या में ऐसे धार्मिक शिक्षा संस्थान बताए जाते हैं जिन्हें राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत से बेवजह परेशानी है। हरियाणा में कहीं ऐसी स्थिति सामने आने पर शिक्षा मंत्री कंवरपाल गुज्जर ने स्पष्ट कर दिया है कि हम भी आवश्यक आदेश जारी कर आड़ा तिरछा चलने वालों को सीधा करने में कोई परहेज नहीं करेंगे।  

ग्रंथ अकादमी उपाध्यक्ष डॉ.  वीरेंद्र सिंह चौहान ने कहा कि शरिया अथवा कुरान के नाम पर किसी को भी इस बात की इजाजत नहीं दी जा सकती कि वह भारतीय कानून और संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना करें। इस्लामिक शासन  की चाह रखने वालों को 1947 में भारत माता के टुकड़े करके अलग इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ पाकिस्तान दे दिया गया था।  
भारतीय गणतंत्र में किसी नए 'पाकिस्तान' को क्षेत्रीय या वैचारिक आधार पर पनपने नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा कि देश की नई पीढ़ी राष्ट्रीय अस्मिता के सवाल पर ढुलमुल रवैया अपनाए जाने के सख्त खिलाफ है।
 

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