स्मारक अनुरक्षण समिति द्वारा जय हिन्द इंटर कालेज आवास विकास ​​​​​​​

बाराबंकी में ‘‘हम और हमारा संविधान’’ विषय पर आयोजित सेमिनार
 
स्मारक अनुरक्षण समिति द्वारा जय हिन्द इंटर कालेज आवास विकास

स्वतंत्र प्रभात

बाराबंकी डा भीमराव अम्बेडकर मेमोरियल सेवा समिति एवं पार्क, स्मारक अनुरक्षण समिति द्वारा जय हिन्द इंटर कालेज आवास विकास बाराबंकी में ‘‘हम और हमारा संविधान’’ विषय पर आयोजित सेमिनार में संविधान की प्रस्तावना पर व्याख्या हुई और प्रस्तावना के पहले वाक्य ‘‘हम भारत के लोग’’ की व्याख्या करते हुए मुख्य वक्ता पूर्व आईपीएस अधिकारी अशोक कुमार वर्मा ने कहा कि भारत एक प्रजातांत्रिक देश है तथा भारत के लोग ही सर्वोच्च संप्रभु है, अतः भारतीय जनता को जो अधिकार मिले हैं वही संविधान का आधार है। श्री वर्मा ने कहा कि हमारा संविधान भारत को एक संपूर्ण प्रभुत्त्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिये तथा इसके समस्त नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त कराने के लिये तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता तथा अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिये दृढ़ संकल्पित है।श्री वर्मा ने कहा कि वर्तमान परिदृष्य में पंथ निरपेक्ष, समता, बंधुत्व और व्यक्ति की गरिमा की परिभाषा बदलती जा रही है, भारत का संविधान धर्म से सत्ता संचालित करने की इजाजत नही देता है। सत्ता सभी धर्माें का सम्मान करेगी और इसलिए संविधान में धर्मनिरपेक्ष की व्याख्या की गई है। भारत के हर नागरिक की गरिमा है और उसे समान अवसर मिलने का हक है।

विकास और अवसर पाने के अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति, जिनकी ज्यादा संख्या है, उनके उत्थान को ध्यान में रखकर सत्ता का संचालन करने की अनुमति संविधान दे रहा है। विडम्बना है कि आज कुछ पूंजीपतियों को ध्यान में रखकर सत्ता का संचालन हो रहा है। श्री वर्मा ने कहा कि आडम्बर और पाखण्ड को जितना बढ़ावा मिलेगा, जनता वास्तविकता से कोसों दूर होती जायेगी। सेमिनार में उप्र शासन के पूर्व संयुक्त सचिव भगवती प्रसाद यादव ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में लोकतांत्रिक शब्द का इस्तेमाल वृहद् रूप से किया गया है, जिसमें न केवल राजनीतिक लोकतंत्र बल्कि सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र को भी शामिल किया गया है। व्यस्क मताधिकार, समाजिक चुनाव, कानून की सर्वोच्चता, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, भेदभाव का अभाव भारतीय राजव्यवस्था के लोकतांत्रिक लक्षण के स्वरूप हैं। इसे मजबूत रखने की जिम्मेवारी जनता और सत्ता दोनों की है।सेमिनार में विषय प्रवर्तक उद्बोधन में साहित्यकार प्रदीप सांरग ने कहा कि देश संविधान से चलता है, देश की सत्ता संविधान से चलती है, संविधान क्या है, क्या है उसके प्रावधान इसकी जानकारी आम जनमानस को होनी चाहिए तभी लोकतंत्रीय गणतंत्र का मजबूत किया जा सकता है।बार एशोसियेशन के अध्यक्ष नरेन्द्र वर्मा ने कहा कि स्वतंत्रता व्यक्ति के विकास के लिये अवसर प्रदान करता है। लेकिन स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल संविधान में लिखी सीमाओं के भीतर ही किया जा सकता है।

बार के पूर्व अध्यक्ष रघराज वर्मा ने कहा कि आज हर घरों में संविधन की पुस्तक होनी चाहिए, जिस तरह लोग रामायण और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उसी तरह घरों में बच्चों के साथ सविधान का पाठ करना चाहिए। सेमिनार का संचालन करते हुए समिति के अध्यक्ष रत्नेश कुमार ने कहा कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना को तीन भिन्न रूपों में देखा जा सकता है- सामाजिक न्याय, राजनीतिक न्याय व आर्थिक न्याय। सामाजिक न्याय से अभिप्राय है कि मानव-मानव के बीच जाति, वर्ण के आधार पर भेदभाव न माना जाए और प्रत्येक नागरिक को उन्नति के समुचित अवसर सुलभ हो। आर्थिक न्याय का अर्थ है कि उत्पादन एवं वितरण के साधनों का न्यायोचित वितरण हो और धन संपदा का केवल कुछ ही हाथों में केंद्रीकृत ना हो जाए। राजनीतिक न्याय का अभिप्राय है कि राज्य के अंतर्गत समस्त नागरिकों को समान रूप से नागरिक और राजनीतिक अधिकार प्राप्त हो, चाहे वह राजनीतिक दफ्तरों में प्रवेश की बात हो अथवा अपनी बात सरकार तक पहुँचाने का अधिकार।समिनार में सभी का अतिथियों का स्वागत उपाध्यक्ष अमरेश बहादुर, राजेन्द्र कनौजिया एवं कोषाध्यक्ष गंगाराम, सचिव मंशाराम कनौजिया ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन महासचिव राम औतार ने किया।

इस अवसर पर अशोक वर्मा की धर्मपत्नी डा अवन्तिका सिंह, व्यवसाई प्रदीप यादव, वीणा सुधाकर ओझा महाविद्यालय के प्राचार्य डा बलराम वर्मा, सांसद के निजी सचिव दिनेशचन्द्र रावत, जेएल भास्कर, राजाराम आर्य, साहित्यकार विष्णु शर्मा कुमार, आंखे फाण्डेशन के अध्यक्ष सदानंद वर्मा, ग्रीन गैंग के अध्यक्ष रजत वर्मा, शशि प्रभा, गुलजार बानो, उमादेवी, प्रदीप कुमार, अमित कुमार, इण्डियन स्टूडेंट पावर के अध्यक्ष सिद्धार्थ कनौजिया, भारतीय बौद्ध महा सभा के अध्यक्ष सुन्दरलाल भारती सहित समिति के पदाधिकारी राम प्रगट कनौजिया, सियाराम वर्मा, सहदेव प्रसाद, कमलेश कुमार, विनोद कुमार, बलराम रावत, जियालाल रामनरेश गौतम सहित एक सैकड़ा गणमान्य लोगों ने सेमिनार में भाग लिया

   

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