पशुशाला बनकर रह गया लाखों की लागत से बना आंगनबाड़ी केंद्र 

आंगनबाड़ी केंद्र में लटक रहा ताला और बरामदे में बंधे दिखे कई जानवर 

पशुशाला बनकर रह गया लाखों की लागत से बना आंगनबाड़ी केंद्र 

ग्रामीणों ने बताया कभी नहीं खुलता आंगनबाड़ी केंद्र और हर तीसरे चौथे माह बांटा जाता है पोषाहार 

लखीमपुर खीरी विकासखंड  नकहा के के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बेल्हौरा के ग्राम बिलहरी में सरकार द्वारा लाखों रुपए की लागत से बनवाए गए आंगनबाड़ी केंद्र में हमेशा तला ही लटकता रहता है और इस आंगनवाड़ी केंद्र पर हमेशा जानवर बांधे जाते हैं जिसके चलते यह आंगनबाड़ी केंद्र पशु शाला में तब्दील होकर रह गया है ऐसा ग्रामीणों का आरोप है। एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार जहां बच्चों और गर्भवती धात्री महिलाओं एवं किशोरियों की स्वास्थ्य के प्रति खास सजगता दिखाते हुए सरकार के खजाने का मुंह खोले हुए हैं। 
 
वहीं विभागीय जिम्मेदारों की खाओ कमाओ नीति और भ्रष्ट आचरण के चलते बाल विकास परियोजना हकीकत के धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है जिसका जीता जागता उदाहरण विकासखंड निकाह के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बिलौरा के ग्राम बिलहरी में देखा जा सकता है। जहां के ग्रामीणों ने हमारे स्वतंत्र प्रभार संवाददाता को बताया कि यह सरकार द्वारा लाखों की कीमत से बना आंगनबाड़ी केंद्र जब से बना है तब से आज तक इसका ताला नहीं खुला शायद ही एक दो बार खुला हो तो खुला हो।
 
आंगनबाड़ी कार्यकर्ती की मनमानी के चलते इस पर हमेशा तला ही लगा रहता है और अब यह केंद्र जानवरों के बांधने का अड्डा बनकर रह गया है आंगनबाड़ी कार्यकर्ती द्वारा ना तो केंद्र संचालित किया जाता है और ना ही पोषाहार एवं पुष्टाहार का वितरण ही किया जाता है गर्भवती महिलाओं धात्री और किशोरियों तथा नौनिहालों के लिए आने वाले पौष्टिक आहार के खुले आम बिक्री कर ली जाती है। यह पोषाहार हर तीसरे महीने में वितरण कर कोरम पूरा कर लिया जाता है उसमें भी आदि सामग्री दी जाती है तो आदि सामग्री नहीं दी जाती है। 
 
ऐसा कई महिलाओं का ऑन कैमरा आरोप है। बिलहरी निवासी रामवती ने बताया की कभी भी केंद्र खोला नहीं जाता है कभी कभार आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपने घर पर केंद्र लगातीहैं जब मन कहता है तो नहीं कहता तो नहीं लगाती हैं और किसी को पोषाहार नहीं देती हैं पोषाहार लेने गए रामवती से कई बार उनका विवाद भी हो चुका है। जिसकी शिकायत भी की गई परंतु आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है। विभागीय लापरवाही के चलते लाखों की लागत से बना आंगनबाड़ी केंद्र जहां पशुशाला में तब्दील हो गया है वही गरीब धात्री महिलाओं किशोरियों के लिए आने वाला पोषाहार दुधारू पशुओं का आहार बनकर रह गया है।

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