ट्रांसपोर्ट नगर योजना को फ्री होल्ड किया जाने पर गुस्साए ट्रांसपोर्ट नगर व्यापारी

ट्रांसपोर्ट नगर योजना में भूमि का आवंटन 90 वर्षों के पट्टे के आधार पर आवंटित किया था
 
35 वर्षों 1986 से लखनऊ विकास प्राधिकरण से अपनी समस्याओं पर ध्यान देने व सुधार करने की लगातार मांग की जाती रही है
35 वर्षों 1986 से लखनऊ विकास प्राधिकरण से अपनी समस्याओं पर ध्यान देने व सुधार करने की लगातार मांग की जाती रही है
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर अध्यक्ष राकेश सिन्हा व महामंत्री हरिप्रसाद यादव ने बताया कि ट्रांसपोर्ट नगर आवंटियो की तरफ से एसोसिएशन द्वारा विगत 35 वर्षों 1986 से लखनऊ विकास प्राधिकरण से अपनी समस्याओं पर ध्यान देने व सुधार करने की लगातार मांग की जाती रही है

इसी क्रम में आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहेंगे कि उस समय लालजी टंडन मंत्री नगर विकास उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हमारी समस्याओं को संज्ञान में लेते हुए मौखिक आदेश दिया गया था कि आप अपने आवश्यकतानुसार निर्माण कार्य शुरू करें ताकि शहर में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में कोई बाधा न हो और आपकी बाकी समस्या जैसे सड़क, बिजली, पानी, टेलीफोन लाइन, नाली, सीवरेज लाइन पार्किंग सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट फायर स्टेशन आदि।आधारभूत सुविधा यथाशीघ्र आपके लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा प्रदान की जाएगी तथा ध्यान देने का तथ्य यह है कि लखनऊ जिला प्रशासन द्वारा लखनऊ विकास प्राधिकरण के सहयोग से ट्रांसपोर्ट नगर योजना का शुभारंभ 1982 में किया गया था। लेकिन जो आधारभूत सुविधाएं प्राधिकरण द्वारा उस समय दी जानी चाहिए थी।

वह उपलब्ध न होने के कारण ट्रांसपोर्ट नगर योजना में कोई भी आना नहीं चाहता था। लेकिन मंत्री लालजी टंडन के प्रयासों व आश्वासन के कारण ट्रांसपोर्ट नगर में ट्रांसपोर्ट्स एजेंसी, गोदाम, दुकानदार, मैकेनिक कारखाना और इससे जुड़ी हुई तमाम सर्विसेज के लोग आने का प्रयास करने लगे लेकिन प्राधिकरण ने भूमि आवंटन के पश्चात मूलभूत सुविधाएं एवं किसानों के की प्रति कर राशि न मिलने के कारण किसानों के उत्पन्न विरोध से कब्जे की समस्या करीब 20 से 25 वर्ष तक चलती एवं लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा रजिस्ट्री व कब्जा देने में करीब दो दशक लगभग 20 वर्ष का समय लिया गया।

प्राधिकरण के पास दशकों तक कब्जा न होने के कारण विकास कार्यों में भी अत्यधिक देरी हुई। जिससे इस योजना के शुरू के 30 वर्ष में यहां के आवंटी को बहुत सारी समस्याओं व नुकसान से गुजरना पड़ा तथा यह भी अवगत कराना चाहेंगे कि लखनऊ विकास प्राधिकरण ने हमें इस ट्रांसपोर्ट नगर योजना में भूमि का आवंटन 90 वर्षों के पट्टे के आधार पर आवंटित किया था।

 इसमें शर्त थी कि आप प्रत्येक 30 वर्ष के बाद दो बार में यह पट्टा रिन्यूअल करा सकते हैं परंतु हमें आज तक मूलभूत सुविधाओं के लिए प्रतिदिन संघर्ष करना पड़ रहा है हमारे ट्रांसपोर्ट नगर के सम्मानित आवंटित द्वारा भवन कर, जलकर, रोड टैक्स, आयकर एवं जीएसटी भी दिया जा रहा है

जिससे सरकार को भारी राजस्व प्राप्त हो रहा है लेकिन यहां की सड़कों की खस्ताहाल होने की वजह से आए दिन एक्सीडेंट सड़क जाम व यहां सड़कों के गड्ढे से ट्रकों एवं मालवाहक वाहनों का फस जाना बहुत आम बात है। पानी सीवरेज लाइन, सीवरेज ट्रीटमेंट, प्लांट, फायर स्टेशन, पार्किंग, पार्क, डाकघर, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र जैसी मूलभूत आवश्यक सुविधा आज भी नदारद है जो लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा लखनऊ ट्रांसपोर्ट नगर योजना के आवंटन के समय वादों में शामिल थी एवं जिसका भुगतान लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आवंटितयो से लिया गया था।

जिसमें पत्रांक संख्या एसटी/ एसपीसी यातायात/97 दि0 31 जनवरी 1997 के माध्यम से तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए शहर के अंदर ट्रांसपोर्टेशन से संबंधित सभी कार्य पर रोक लगाकर शहर में स्थापित ट्रांसपोर्ट, एजेंसी, गोदाम, थोक व्यापारियों और उनसे जुड़े हुए अन्य कार्यों के लोगों को शहर से बाहर ट्रांसपोर्ट नगर योजना में विस्थापित करने का आदेश दे दिया। जिसके कारण सभी आवंटन को रातों-रात लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा आधारभूत सेवाओं का विकसित न किए जाने के बावजूद ट्रांसपोर्ट नगर योजना में विस्थापित होना पड़ा।

 उस समय नगर विकास मंत्री लालजी टंडन द्वारा आवश्यक वस्तुओं की पूर्ति हेतु मौखिक आश्वासन दिया गया कि आप सब आबंटी यथाशीघ्र अपनी आवश्यकतानुसार निर्माणकर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति निर्बाध तरीके से करें का प्रयास करें और जो मूलभूत सुविधाएं एवं आवंटन कब्जा जैसी समस्याओं को यथाशीघ्र ही आप सबको प्राधिकरण द्वारा पूरा कर दिया जाएगा। ट्रांसपोर्ट नगर योजना कि आज की असुविधा देखकर यह लगता है कि सारी जिम्मेदारी ट्रांसपोर्ट नगर योजना के आवंटितयो की है। लखनऊ विकास प्राधिकरण तथा लखनऊ नगर निगम किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी या वादा निभाने को तैयार नहीं है। आ आश्चर्यजनक रूप से एसोसिएशन को संज्ञान में आया है कि पत्र संख्या 29/उपा का/21 दि0 8 सितंबर 2021 को जारी आदेश में कहा गया है

 कि पट्टे के भूखंडों में लेवी लेते हुए अधिकतम 10 वर्ष तक निर्माण करने की अनुमति दी जा सकती है। इसके बाद नोटिस जारी करते हुए सुनवाई उपरांत भूखंड को निरस्त कर पुनः प्रवेश किया जा सकता है। मेरे संज्ञान में आया है कि प्राधिकरण में 10 वर्ष के पश्चात भी लीज पर आवंटित भूखंडों में लेवी लेते हुए मानचित्र स्वीकृति दी फ्रीहोल्ड, नामांतरण, लीज बढ़ाने या अन्य समस्त कार्यवाही संपादित की जा रही है जो अधिनियम के अधीन नहीं है।

 अतः इसे संबंध में आदेशित किया जाता है कि इस प्रकार के प्रकरणों में समस्त कार्यवाही तत्काल रोक दी जाए। आदेश के क्रम में अपर सचिव ज्ञानेंद्र वर्मा ने ट्रांसपोर्ट नगर के कुछ सम्मानित व्यक्तियों को नोटिस दि0 22 सितंबर 2021 को भेजा है जिसमें इसका विषय ट्रांसपोर्ट नगर योजना पर निर्धारित अवधि में निर्माण कार्य न करने पर लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन एवं उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 धारा 18/4 के अधीन संपत्तियों को निरस्त कर पुनः प्रवेश किए जाने के संबंध में कहा कि  भूखंड का कब्जा द्वितीय पक्ष को लीज डीड निष्पादित होने पर निम्न अनुसार दे दिया जाएगा और द्वितीय पक्ष द्वारा वर्तमान में लागू महायोजना व भवन निर्माण उपविधि के अनुसार स्वीकृति मानचित्र के आधार पर नियम व शर्तों के अनुसार निर्माण कार्य किया जाएगा।

द्वितीय पक्ष उक्त भूखंडों का लीज डीड कब्जा लेने के दि0 से 3 वर्ष के अंदर अपनी लागत से निर्माण पूर्ण कर लेगा विपक्ष इस भूखंड पर प्रचलित भवन का निर्माण विधि के अनुसार निर्माण करेगा तथा स्वीकृति भूउपयोग के अनुसार ही उपयोग में लाया जाएगा। उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 धारा 18/4 का उल्लेख ट्रांसपोर्ट नगर के आवंटन के साथ हुए रजिस्टर्ड लीज डीड में कोई भी उल्लेख नहीं है तो किस आधार पर आज इस अधिनियम का उल्लेख करके प्राधिकरण द्वारा मानसिक उत्पीड़न करने का प्रयास किया जा रहा है। 18 सितंबर 2021 से पहले ट्रांसपोर्ट नगर योजना में लगातार कई दशकों से ले भी लेते हुए मानचित्र स्वीकृति फ्रीहोल्ड नामांतरण प्लीज बढ़ाने या अन्य समस्त कार्यवाही संपादित की जा रही है जिसके अनेक उपाध्यक्ष ने अपने आदेश में भी किया है।

अचानक समस्त की गई कार्यवाही नियम विरुद्ध कैसे हो जाती है। जबकि पूर्व में लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा नियमों के आलोक में समस्त कार्रवाही संपादित की जा रही है। तो आवंटी गणों को आरोपित करना न्यायपूर्ण नहीं है।

आश्चर्यजनक का तथ्य यह है कि यदि ट्रांसपोर्ट नगर योजना में ऐसा कोई भी नियम था तो ट्रांसपोर्ट नगर के 10 वर्ष के उपरांत 1991 में लखनऊ विकास प्राधिकरण द्वारा सारे पट्टे समस्त रहते रद्द क्यों नहीं किए गए इसके कारण कारणों की जांच की अत्यंत आवश्यक एसोसिएशन ट्रांसपोर्ट नगर योजना के आवंटनयो की समस्यायो के संबंध में विगत कई दशकों से लखनऊ विकास प्राधिकरण के अधिकारियों से पत्राचार के माध्यम से संपर्क करने का प्रयास कर रही है। इस विषय में 3 वर्ष पूर्व लखनऊ विकास प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष द्वारा एक कमेटी का गठन किया गया था

 जिसमें ट्रांसपोर्ट नगर योजना के आवंटितयो को फ्री होल्ड किए जाने के संबंध में निर्णय लेने के लिए कमेटी बनाई गई थी। पूरे लखनऊ में सभी योजना लीज पर दी जाती रही है और सबका फ्रीहोल्ड किए जाने का नियम है। अतः ट्रांसपोर्ट नगर के आवंटी यह चाहते हैं कि हमारी भी योजना को फ्री होल्ड कर दिया जाए और यहां की आवश्यक मूलभूत सुविधाओं का निर्माण करके सुचारू रूप से चलाने में एवं ट्रांसपोर्ट व्यवस्था संचालित करने में यहां के आवंटीयो से आवेदन के समय किए गए

 वादों को पूर्ण करते हुए प्राधिकरण द्वारा ट्रांसपोर्ट नगर योजना हेतु उचित अवसर प्रदान करने का निर्देश दिया। लखनऊ विकास प्राधिकरण ट्रांसपोर्ट नगर योजना लखनऊ के पिछले 3 वर्षों से स्वयं फ्रीहोल्ड प्लॉट नए को बेच रहा है। ऐसे में पुराने आवंटी को फ्री होल्ड किए जाने में कोई विधिक समस्या नहीं है।  

इस कोविड-19 के समय में ट्रांसपोर्ट नगर के संबंध में कोई भी नई नीति निर्धारित करने से पूर्व यहां के प्रभावित आवंटितयो की समस्या व व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए व्यवहारिक तथा मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए एसोसिएशन में बैठक के उपरांत ही विकास नीति बनाने की आवश्यकता है ट्रांसपोर्ट नगर योजना के विकास नीति के बारे में कोई भी निर्णय यहां के प्रभावित आवंटियो को बिना विश्वास में लिए करना कहीं से भी न्यायोचित या विधिक नहीं है।

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