इलाहाबाद विश्व विद्यालय का चुनाव असमंजस में

इलाहाबाद विश्व विद्यालय  का चुनाव असमंजस में

‌ इलाहाबाद विश्वविद्यालय में   चुनाव को लेकर असमंजस  

‌17 में 14 नामांकन वापस।

‌स्वतंत्र प्रभात
‌ प्रयागराज

‌इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे छात्रों की गुरुवार को  उस समय जीत हुईजब छात्र परिषद चुनाव के तहत कक्षा प्रतिनिधियों के लिए नामांकन कराने वाले 17 में से 14 प्रत्याशियों ने अपने नाम ही वापस ले लिए। 

‌वहीं दो प्रत्याशियों के नामांकन पर आपत्ति आई है जबकि एक अन्य प्रत्याशी इसलिए नाम वापसी नहीं करा सका क्योंकि उसकी रसीद खो गई थी। उसे विश्वविद्यालय के गेट से वापस कर दिया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन  हड़बड़ा  कर नाम वापसी के लिए खोला गया काउंटर ही निर्धारित समय से 20 मिनट पहले  बंद कर दिया गया। 

‌छात्र मांग कर रहे हैं कि नामांकन वापसी के लिए अतिरिक्त समय दिया जाए। चार अन्य छात्र भी अपना नाम वापस लेना चाहते हैं। छात्र परिषद के पांच पदों के लिए चुनाव मैदान में अब तीन प्रत्याशी बचे हैं। इन पांच पदों के लिए 22 अक्टूबर को मतदान होगा या नहीं, इस पर इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी अपना रुख स्पष्ट नहीं किया है।

‌ इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन भले ही परिसर में शांति के लिए छात्रसंघ के स्वरूप में बदलाव करने की दलील दे रहा हो, लेकिन परिसर की हालिया अशांति तो यही बयान कर रही कि गठन से पहले परिसर अशांत हो गया है।परिसर के अशांत होने के नाम पर इविवि प्रशासन के रहनुमा निर्वाचित छात्रसंघ के स्थान पर छात्र परिषद को सही ठहराने में शिद्दत से जुटे थे अब वही परिसर में अशांति की वजह बन गया।

‌‌इविवि छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष रोहित मिश्रा ने आम छात्रों से चेतावनी भरी अपील करते हुए कहा कि वो छात्र परिषद के चुनाव में हिस्सा न लें। आम छात्र आक्रोशित हैं और इविवि प्रशासन का साथ देने वालों के खिलाफ उनका का गुस्सा फूट सकता है। रोहित ने सवाल उठाया कि अगर विरोध करने वाले छात्रों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था

तो तोडफ़ोड़ का मुकदमा उनके खिलाफ कैसे और क्यों लगाया गया। आरोप लगाया कि नामांकन में प्रत्याशियों की संख्या कम होने पर विभागाध्यक्षों को संदेश भेजकर प्रत्याशियों को भेजने को कहा गया। छात्रसंघ के निवर्तमान अध्यक्ष उदय प्रकाश यादव ने कहा कि छात्र परिषद का चुनाव किसी कीमत पर नहीं सम्पन्न होने दिया जाएगा। चाहे इसके लिए हमें एक और लाल पद्मधर बनना पड़े।

‌प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट

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