भारतीय संस्कृति का एक एक अंश वैज्ञानिक - कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित

भारतीय संस्कृति का एक एक अंश वैज्ञानिक - कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित

 

भारतीय संस्कृति के रक्षार्थ कार्य करना चाहिए - महन्त नृत्य गोपाल दास


अयोध्या, 7 अप्रैल. हिंदू नव वर्ष मनाने के लिए डॉ राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय स्वामी विवेकानंद सभागार में एक सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री राम जन्म भूमि न्यास समिति के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी थे. अध्यक्षता कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने किया.


मुख्य अतिथि श्री महंत गोपालदास जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति के रक्षार्थ किया जा रहा है यह कार्य प्रशंसनीय है और हिंदू संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित करना है. 


कुलपति आचार्य मनोज दीक्षित ने कहा कि भारतीय संस्कृति का एक एक अंश वैज्ञानिक है. हमारी भारतीय संस्कृति किसी एक व्यक्ति के इर्द-गिर्द नहीं घूमती बल्कि यह धीरे-धीरे नैसर्गिक रूप  में प्रकृति के साथ जन्मी है हमें इसे प्रतिष्ठित करना है यह सहज और आसान नहीं है. उन्होंने क्रांतिकारी कवि दुष्यंत कुमार के शेर का उल्लेख करते हुए "कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो" का उदाहरण देते संकल्प लिया कि यह कार्य हम सबको करना है..


विशिष्ट अतिथि जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्रीराम दिनेशाचार्य जी ने कहा की सनातन धर्म के लिए सब कुछ न्यौछावर है.


कार्यक्रम का आयोजन नववर्ष चेतना समिति के संयोजक महंत गिरीश पति त्रिपाठी ने किया था. उन्होंने कहा कि देश में अमन चैन सनातन संस्कृत की सिद्धि हो इसलिए ऐसे आयोजन किए जाने चाहिए.
नववर्ष की संध्या पर सम्पन्न इस कार्यक्रम में राधेश्याम शास्त्री, डॉक्टर चैतन्य, रघुनाथ दास शास्त्री, महन्त रामदास जी, भाजपा नेता लल्लू सिंह, अवधेश पाण्डेय, दिलीप सिंह, डॉक्टर चयन मिश्रा, विनीत सिंह, सुजीत पांडेय सहित अयोध्या और फैजाबाद शहर के प्रमुख लोगों ने भाग लिया

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