गैस एजेंसी मालिक से है सेटिंग, रोजाना मिल जाता है 10 एलपीजी सिलेंडर

गैस एजेंसी मालिक से है सेटिंग, रोजाना मिल जाता है 10 एलपीजी सिलेंडर

अवैध रिफिलिंग से घरेलू उपभोक्ता परेशान, नहीं मिल पा रहा है जरूरत के हिसाब से गैस सिलेंडर

राजधानी में घरेलू उपयोग में आने वाली LPG गैस सिलेंडर का हो रहा कमर्शियल उपभोग, 750 का 14. 5 लीटर गैस सिलेंडर से अवैध 5 लीटर गैस सिलेंडर रिफलिंग का काम और प्रति बड़े सिलेंडर ₹800 की बचत वाले अवैध धंधे आमतौर पर रोड रास्ते देखे जा सकते हैं. जिसमें एजेंसी मालिकों की भूमिका निकल कर सामने आ रही है. आमतौर पर गैस कॉपी पर पर्ची कटाने वाले आम जनता को 21 दिन के बाद दोबारा पर्ची कटवाने को बताया जाता है. अगर घर में इस बीच सिलेंडर खत्म हो जाए तो आम जनता पड़ोसियों के रहमों करम पर बच्चे और परिवार को रोटी खिला पाते है. मतलब साफ है आम जनता को जब भी अगला गैस गोदाम से लेना हो तो 21 दिन बाद ही मिलेगा. लेकिन जरा सोचिए बिना लाइसेंस के अवैध रूप से चलाए जाने वाले गैस रिफिलिंग वाले दुकान और उसको रोजाना 10 सिलेंडर आखिर कहां से मिल जाते हैं.

 जिससे अवैध रूप से चलाए जाने वाले दुकान रोजाना रिफिलिंग का काम करके 5 से 10000 तक की कमाई कर जाते हैं लेकिन लाइसेंस फायर परमिशन के नाम पर सिर्फ और सिर्फ झोपड़ी या गुमटी दिखाकर कमाई पर टैक्स तक नहीं देते हैं. जबकि वही अवैध गैस रिफिलिंग करने वाले दुकानदारों को रोजाना इंडियन गैस, भारत गैस जैसी बड़ी नामी गैस कंपनियों के तरफ से प्रति दुकान 6 से 10 सिलेंडर बिना पर्ची पासबुक के एजेंसी मालिकों के द्वारा मुहैया करवा दी जाती है. आम जनता को गैस एजेंसी मालिकों व मैनेजर 21 दिन के बाद बुलाते हैं आखिर यह खेल कैसे खेली जा रही है. आए दिन राजधानी लखनऊ की सड़क किनारे गुमटी वह पटरी दुकानदार अवैध तरीके से छोटे सिलेंडर भरते नजर आ जाएंगे. सूत्रों की मानें तो अवैध गैस भरने वाले दुकानदार कहते हैं कि फायर वाले महीने के 500 और पुलिस चौकी 500 देकर हमारा काम निकल जाता है यह पैसा हम हर महीने 1 से 10 तारीख तक भिजवा देते हैं ताकि हमारे इस काम को रोका ना जा सके.

जिस दुकानदार को यह पता चल जाता है कि उसकी स्टिंग या वीडियो बन गया है वह सूत्रों व पत्रकारों को चंद रुपयों में आकने लगता है और सेटिंग बनाने या परिचितों  के माध्यम  से आरोपों की लड़ियां लगा देता है. खैर इन सभी बातों से हटकर भी सोचे तो आखिर इतनी बड़ी तादात में हर दुकानदार के पास सिलेंडर पहुंचता कैसे हैं? इस पर मीडिया बंधुओं ने जांच पड़ताल की तो पता चला कि गैस एजेंसी चलाने वाले एजेंसी मालिक अपने सिलेंडर वितरण करने वाले ड्राइवरों से सप्लाई चैन बना रखे हैं. जिसकी वजह से प्रति सिलेंडर 200 की ऊपरी आमदनी गैस मालिक बड़े स्तर पर कर रहे हैं इस तरह की ऊपरी कमाई ड्राइवरों द्वारा ही मालिक तक पहुंचा दिया जाता है. इस तरह मालिकों के साथ ड्राइवर और अवैध दुकानदार की चांदी प्रतिदिन और प्रति महीने हो जाती है. इन सभी बिंदुओं पर नजर डालने के बाद पता चलता है सिर्फ परेशान जनता है. 

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