गोंडा की जनता को राजा भैया की सौगात, सांसद निधि  पैसा किया वापस

गोंडा की जनता को राजा भैया की सौगात, सांसद निधि  पैसा किया वापस

दिनेश पांडेय 

गोंडा, उत्तर प्रदेश।

बीते दिनों देश में भाजपा की सरकार थी। केंद्र में भी भाजपा प्रदेश  में भी भाजपा।  जनता ने बाकी भ्रष्ट पार्टियों से आजीज होकर ही एक तरफा मताधिकार का प्रयोग करते हुवे मोदी जी के नाा पर राजा भैैया को जिताया लेकिन जनता को क्या मिला। बाबा जी का ठुल्लू। 

जनपद को विकास के नाम पर एक मात्र 4 लेन सड़क मिली उसपर भी ग्रहण लग गया। 4 लेन निर्माण में जमकर राजनीति कूटी गई, नतीजा पथिक होटल नहीं बनना था तो नहीं बना। होटल पथिक को बचाने के लिए धुरंधर बाहुबली जनप्रतिनिधियों  ने हर तरह से घोड़े खोलकर होटल को संरक्षित किया इस प्रयास में युवा ब्राम्हण एक्टिविस्ट प्रदीम कात्यायन की भी जान गई। नतीजा वही शीफर। समाज सेवी  संस्था जनसंवाद मंच ने 4 कने सड़क का निर्माण पूूरा करने के लिए कई आंदोलन किए लेकिन नतीजा शीफर। मालवीय नगर में ताजा बनवाई गई सड़कों की बजड़िया उजड़ गई 

सड़कों पर जगह जगह गड्ढे हो गए जिसकी स्थानीय लोगों ने शिकायत भी नतीजा शीफ़र ।क्यों क्यों की मनकापुर नरेश इस बार भाजपा से गोंडा  सांसद थे। इस  बार भी भाजपा  गोंडा से कीरतिवर्धान सिंह को टिकट मिला है। राजा भैया चुनाव सिर्फ इसलिए लड़ते है जिससे ये पॉवर में बने रहें। इन्हें अपना राज पाट बचने के लिए सत्ता में बने रहना जरूरी है। सारी राजनैतिक पार्टियां घूमने के बाद इन्हें भाजपा ने शरण दी

क्योंकि इनके पास पैसा बहुत है और शायद इसीलिए राजा भैया सांसद निधि का पैसा तक तक नहीं खर्च  कर सके और पैसा केंद्र सरकार को वापस भेज दिया गया। राजाभैया का राज पाट मनकापुर में होने के बावजूद ये आज तक अपने महल को जाने वाली सड़क तक नहीं बनवा पाए तो ये जनपद का विकाश क्या करेंगे। देश  में मोदी लहर है हो सकता है राजा भैया इस बार भी पुनः मोदी जी के नाम के सहारे अपनी नैया पार लगा लें लेकिन इनकी जीत में इनका कोई योगदान नहीं होगा। 

राजा भैया की जीत जनता द्वारा राजा को दी गई खैरात है जो गोंडा वासी राजा भैया को भीक में देंगे। इस पर भी फैसला अभी जनता के हाथ में है और चुनाव सर पर है राजा भैया भी दलबदलु नेेताओं को तोड़ मड़ोर  कर अपनी पार्टी में शामिल करने में जी जान से लगे हुवे है।

शाम ढलते ही आचार संहिता का खुला उलंघन करते हुवे गाड़ियों वा समर्थकों की टोलियां गली मोहल्लों में देखी जा सकती है। लेकिन अंतिम निर्णय तो जनता का होगा।  मै तो नोटा का प्रयोग करूंगा आप अपनी उंगली किस बटन पर रखते है ये आपका अपना अधिकार है।

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