कलाकृति कल्याण समिति द्वारा प्रतियोगिता में उत्तीर्ण बच्चों को वितरित किए गए पुरस्कार

कलाकृति कल्याण समिति द्वारा प्रतियोगिता में उत्तीर्ण बच्चों को वितरित किए गए पुरस्कार

नरेश कुमार गुप्ता

कलाकृति कल्याण समिति द्वारा प्रतियोगिता में उत्तीर्ण बच्चों को वितरित किए गए पुरस्कार

 अनुराग अवस्थी की रिपोर्ट गोंदलामऊ 


जिले के गोंदलामऊ विकास खंड क्षेत्र में 'कलाकृति कल्याण समिति' महिलाओं को शिक्षित, सशक्त और आत्म निर्भर बनाने का बीड़ा उठा रखा है। जिससे कि वह जागरूक होकर सदियों पुरानी रूढि़यों और कुप्रथाओं को मिटाकर अपने अधिकारों की मांग कर सके। सशक्त बनाने में जुटी है। यह समिति वर्ष 2012 से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा देने का भी काम कर रही है। इसके अलावा बच्चों में छुपी प्रतिभा को निखारने का काम भी संस्था द्वारा अनवरत रूप से किया जा रहा है।

संस्था द्वारा महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई, ब्यूटीशियन, खिलौने बनाने, कपड़े व जूट के बैग बनाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का भी काम किया जाता है। जिससे गांव की अल्प साक्षर महिलाओं को भी आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें।

संस्था की अध्यक्ष किरन गुप्ता बताती है कि संस्था द्वारा ग्रामीण बच्चों में छुपी हुई प्रतिभा को निखारने के उद्देश्य से समय-समय पर प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इस दौरान विजेता और प्रतिभागी बच्चों को पुरस्कृत कर उनका हौसला बढ़ाने का भी काम किया जाता हे। वह बताती है कि इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से युवा पीढ़ी को भारतीय संस्कृति व सभ्यता से परिचित कराना भी है। उनका कहना है कि भारत में आज भी सामाजिक तानाबाना ऐसा है, जिसमें अधिकांश महिलाएं पिता या पति पर ही आर्थिक रूप से निर्भर हे,

वह खुद से जुड़े निर्णय लेने के लिए भी परिवार के पुरुष सदस्यों पर निर्भर रहती है। संस्था की सचिव दीप्ती गुप्ता कहती है कि डॉ. भीमराव अंबेडकर कहते थे कि भारतीय नारी श्रम से नहीं बल्कि आंसुओ की ¨चता करते हुए असमान व्यवहार व शोषण से जरूर डरती है। वह कहती है कि महिलाओं के सशक्तीकरण में शिक्षा की अहम भूमिका है। उनके शिक्षित होने पर जागरूकता आएगी, वह अधिकारों को जान सकेंगी साथ ही रुढि़यां, कुरीतियां व कुप्रथाएं समाप्त होंगी। शिक्षित महिलाएं न केवल स्वयं आत्मनिर्भर होकर लाभांवित होंगी, बल्कि आने वाली पीढि़यां भी लाभान्वित करेंगी।

महिला सशक्तिकरण में भी हम उसी क्षमता की बात कर रहे है।परिवार और समाज की हदों को पीछे छोड़ने के द्वारा फैसले, अधिकार, विचार, दिमाग आदि सभी पहलुओं से महिलाओं को अधिकार देना उन्हें स्वतंत्र बनाने के लिये है। समाज में सभी क्षेत्रों में पुरुष और महिला दोनों को बराबरी में लाना होगा। देश, समाज और परिवार के उज्जवल भविष्य के लिये महिला सशक्तिकरण बेहद जरुरी है। महिलाओं को स्वच्छ और उपयुक्त पर्यावरण की जरुरत है जिससे कि वो हर क्षेत्र में अपना खुद का फैसला ले सकें चाहे वो स्वयं, देश, परिवार या समाज किसी के लिये भी हो। देश को पूरी तरह से विकसित बनाने तथा विकास के लक्ष्य को पाने के लिये एक जरुरी हथियार के रुप में है महिला सशक्तिकरण।

भारतीय संविधान के प्रावधान के अनुसार, पुरुषों की तरह सभी क्षेत्रों में महिलाओं को बराबर अधिकार देने के लिये कानूनी स्थिति है। भारत में बच्चों और महिलाओं के उचित विकास के लिये इस क्षेत्र में महिला और बाल विकास विभाग अच्छे से कार्य कर रहा है। अपने विकास और वृद्धि के लिये उन्हें हर पल मजबूत, जागरुक और चौकन्ना रहने की जरुरत है। कलाकृति कल्याण समिति की अध्यक्ष किरन गुप्ता मुख्य उद्देश्य महिलाओं को समर्थ बनाना है क्योंकि एक सशक्त महिला अपने बच्चों के भविष्य को बनाने के साथ ही देश का भविष्य का सुनिश्चित करती है।

पूरे देश की जनसंख्या में महिलाओं की भागीदारी आधे की है और महिलाओं और बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिये हर क्षेत्र में इन्हें स्वतंत्रता की जरुरत है।

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