कवि सम्मेलन का भी राम भक्तों ने आनन्द लिया

कवि सम्मेलन का भी राम भक्तों ने आनन्द लिया

कवि सम्मेलन का भी राम भक्तों ने आनन्द लिया

अंधाधुंध प्रकृति को छेड़ा गलती यही हमारी है,पर्यावरण बचाने की हम सबकी जिम्मेदारी है

 संवादाता -नरेश गुप्ता


शाहाबाद हरदोई।

श्री रामलीला मेला, पठकाना के मंच से ऐसी काव्य रस धारा बही कि जहाँ श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए वहीं लोटपोट भी हुए और खूब तालियाँ बजाकर श्रोताओं ने कवियों का उत्साहवर्धन किया।

श्री रामलीला मेला समिति के विशेष सहयोग से हर बर्ष की भाँति इस बर्ष भी परम्परागत रूप से कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
स्थानीय ख्यातिप्राप्त ब्रह्मलीन कवि क्षत्रपाल मिश्र क्षणिक जी की स्मृति में आयोजित कवि सम्मेलन में राज्य भर से प्रमुख हास्य एवँ श्रंगार कवियों ने गीत,गजल,दोहा,छन्द, भजन की प्रस्तुति देकर अपार जन समूह को भावविभोर किया। कार्यकम का शुभारम्भ हरदोई के ख्यातिप्राप्त कवि निशानाथ अवस्थी निशंक और लखीमपुर खीरी के व्यंग्यकार कवि श्रीकांत सिंह ने माँ शारदे की प्रतिमा पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया तथा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि क्षेत्राधिकारी उमाशंकर सिंह ने माता सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया

 तदनन्तर लखनऊ के ख्यातिप्राप्त कवि मनोज अवस्थी शुकदेव ने सरस्वती वन्दना कर कार्यक्रम को गति प्रदान की। तदुपरान्त हरपालपुर हरदोई से पधारे युवा कवि शोभित तोमर ने गाय के त्याग एवँ ममत्व की महत्ता बताते हुए कुछ इस तरह पढ़ा कि "माँ थी अब मैं रह गई केवल तुम्हारी आय हूँ। बेटों के होते कट रही हूँ, मैं अभागन गाय हूँ।। इनके उपरांत लखीमपुर खीरी के ही युवा कवि सुनीत वाजपेयी ने पढ़ा कि "तीन रंगो की खिंची आकाश में रेखा तो है। सामने जग के हमारे शौर्य का लेखा तो है।। छू न पाए हों भले,उसका गुलाबी सा बदन,हमने अपने चाँद को नजदीक से देखा तो है।। इनके उपरान्त हास्य कवि विपिन मलिहाबादी ने पत्नी की शक्ति का कुछ इस तरह वर्णन किया कि" कोई खाता न कोई बही है। पत्नी जो भी कहे वह सही है।। तभी स्थानीय कवि ओमदेव दीक्षित "ओम" को मंच पर आमंत्रित किया गया तो उन्होंने न केवल श्रृंगार रस से सभी श्रोताओं को सराबोर कर दिया बल्कि वीर रस में कुछ इस तरह पढ़ा कि" स्पाइक से सहमा-सहमा पाकिस्तान हुआ असहाय। रोता है इमरान,बाजबा, हर आतंकी करता हाय हाय।। तभी हरदोई के प्रख्यात कवि श्याम पंकज ने कुछ इस तरह पढ़ा कि" गुलाम हिन्द का विचार बात ये नकार दी। तिरंग बाँध पीठ,सिंह ने दहाड़ मार दी।। इनके बाद फिर मनोज अवस्थी सुखदेव ने लोक गीत गजल पढ़कर कुछ इस तरह श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया कि" सुरुज सागर ते निकसे हईं। कमल तलइयन मा बिकसे हईं।। इसी क्रम में जनपद प्रतापगढ़ से पधारे जाने माने कवि आशुतोष आशू ने वर्तमान राजनीति पर कुछ इस तरह कटाछ किया कि' " राजनीति मैं नहीं कोई अब गंगा है। जिसको देखो वही दिख रहा नंगा है।। शोषित पीड़ित हुई हमेशा जनता ही, हर नेता का हाथ लहू से रंगा है।

इनके उपरांत हरदोई से पधारे प्रख्यात कवि एवँ कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे निशानाथ अवस्थी निशंक ने पर्यावरण संरक्षण पर कुछ इस प्रकार अपनी रचना से सभी श्रोताओं को प्रेरित किया कि "अंधाधुंध प्रकृति को छेड़ा गलती यही हमारी है। पर्यावरण बचाने कि हम सबकी जिम्मेदारी है।। और फिर मंच संचालन कर रहे श्रीकांत सिंह ने इस प्रकार पढ़ा कि " सुख अत्याधुनिक। दुख अत्याधुनिक।। मुझे तो लगता है। आदमी की भूख अत्याधुनिक।। इसी श्रंखला में स्थानीय कवि सुशील अवस्थी ने अपना प्रेमालाप कुछ इस तरह अलापा कि "पलकों से कहीं बात तुम्हें याद तो होगी।। तूफानी जमा रात तुम्हें याद तो होगी।।बिजली से डर के वह मेरे सीने से लिपटना, वह पहली मुलाकात तुम्हें याद तो होगी।। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए युवा कवि सम्राट करुणेश दीक्षित सरल ने  प्रीति के गीतों से कुछ इस तरह श्रोताओं को भावविह्वल कर दिया कि "कभी जब उम्र से रिश्ता निभाना जान आओगे। उसी दिन तुम ,निशाने पर निशाना जान आओगे ।।कभी जब प्यार का अहसास तुमको छेड़ जायेगा, किसी को आत्मा में तुम बसाना जान जाओगे।। कार्यक्रम के अंत में मेला समिति के महामंत्री अनुराग मिश्रा मधुप ने सभी अतिथि कवि गणों सहित विराट कवि सम्मेलन के आयोजक ओमदेव दीक्षित "पप्पू" डॉ0 पुनीत मिश्रा व करुणेश दीक्षित का ह्रदय से आभार व्यक्त किया साथ ही साथ कार्यक्रम आगामी बर्ष तक के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस अवसर पर मेला समिति के मन्त्री ऋषि कुमार मिश्र, आशीष मोहन तिवारी " राजू" समेत सुधीर मिश्र ने अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन किया जबकि प्रमुख श्रोतागण के रूप में रामनिवास मिश्र,एडवोकेट चन्द्र प्रकाश दीक्षित सत्यवीर शुक्ल दिलीप मिश्र आलोक दीक्षित अतुल मिश्र राजीव नयन दीक्षित संजय अग्निहोत्री ललित मोहन मिश्र मोनू अरुण श्रीवास्तव कपिल शुक्ला सुदेश मिश्र लल्लू श्याम अवस्थी आदि उपस्थित रहे।

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