खेल परिसर में शुरू हुई तीन दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का समापान किया

खेल परिसर में शुरू हुई तीन दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का समापान किया

सिवानी मण्डी ( सुरेन्द्र गिल )

योग भारत की प्राचीनतम चिकित्सीय पद्धति है। योग से न केवल तन स्वस्थ रहता है, बल्कि मन भी पवित्र रहता है।

योग को हमे दिनचर्या में नियमित रूप से शामिल करना चाहिए। स्थानीय भीम खेल परिसर में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए जारी रिहर्सल में उपमंडल व ब्लॉक स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मचारियों, सरपंच, पंच, पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी, एनसीसी कैडेट, स्काउट कैडेट एवं इच्छुक नागरिकों ने भाग लिया। 

आयुष विभाग के तत्त्वाधान में 21 जून को आयोजित होने वाले अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन के लिए भिवानी खेल परिसर में शुरू हुई तीन दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला के आखिरी दिन गजानंद शास्त्री ने स्कूलों से पीटीआई व डीपीई को योग प्रशिक्षण दिया।

तीन दिवसीय इस योग प्रशिक्षण के बाद 13 से 15 जून तक चलने वाले योग प्रशिक्षण में जिला स्तर पर मंत्रीगण, सांसद, विधायक, प्रशासनिक अधिकारी-कर्मचारी व अन्य सभी सरकारी विभागों, निर्वाचित सदस्य, पुलिस विभाग, संस्थाओं तथा आमजन को भीम खेल परिसर में तीन दिवसीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पंतजलि के योग शिक्षक, शारीरिक शिक्षा प्रवक्ता व पीटीआई, डीपीई, खेल विभाग के योग शिक्षक, पुलिस विभाग के प्रशिक्षित योग प्रशिक्षक तथा आयुष विभाग के योग विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षक दिया जाएगा। 19 जून को सुबह 7 बजे कार्यक्रम की पॉयलेट रिहर्सल का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान आयुष विभाग के डॉ. हरीश चंद्र व डॉ. राजकुमार वैद आदि मौजूद थे।

अधिकारियों व कर्मचारियों को करवाए ये आसन


शिविर में योगाचार्यों ने चालन क्रिया, शिथिलीकरण में जैसे ग्रीवा चालन, स्कंध संचालन, कटि चालन व घुटना संचालन करवाया। खड़े होकर किए जाने वाले आसनों में ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्ध चक्रासन और त्रिकोणासन करवाए गए। बैठ कर किए जाने वाले आसनों में भद्रासन, वज्रासन, वीरासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, शशांकासन, उत्तान मंडूकासन, मरीच्यासन और वक्रासन का अभ्यास करवाया । पेट के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में मकरासन, भुजंगासन और शलभासन करवाए गए ।

इसी तरह से पीठ के बल लेटकर किए जाने वाले आसनों में सेतूबंध आसन, उत्तानपाद आसन, अर्ध हलासन, पवनमुक्तासन और श्वासन करवाए गए। इसके साथ-साथ कपाल भाति और प्राणायाम में नाड़ी सोधन, अनुलोम-विलोम प्राणायाम, शीतली प्राणायाम और भ्रामरी प्राणायाम करवाए गए। अभ्यास के दौरान योगासान व प्राणायाम से होने वाले स्वास्थ्य लाभ के बारे में विस्तार से बताया गया। 

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