सेहत सुरक्षा के तहत मौसमी फलों के महत्व पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

सेहत सुरक्षा के तहत मौसमी फलों के महत्व पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

बरुआ गांव में कृषि गोष्ठी में महिलाओं को गर्मी में सेहत की सुरक्षा हेतु देशी पेय बनाने की विस्तार से जानकारी दी गई।

इस दौरान सेहत सुरक्षा के तहत मौसमी फलों के महत्व पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

बरुआ गांव में आयोजित कार्यशाला में कृषि गृह वैज्ञानिक डॉ.फूल कुमारी ने बताया कि देशीपेय पदार्थ का सेवन को बढ़ावा देना चाहिए। जिससे विदेशी पेय पदार्थों से होने वाले दुष्प्रभाव से बचा जा सके। प्रशिक्षण के दौरान मौसमी फलों के पेय पदार्थ जैसे आम का पना, बेल का शर्बत, नीबू का शर्बत, नीबू स्क्वेश आदि की विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि आम का पना चिलचिलाती धूप में सेहत के लिए वरदान है। इसके सेवन से शरीर को अंदर से शीतलता मिलती है। इसके साथ ही लू से बचाव होता है। यह शरीर के लिए आवश्यक इलेक्ट्रोल की पूर्ति करता है।

इससे शरीर में सोडियम का संतुलन बना रहता है। जिससे हीट स्ट्रोक व दिल का दौरा पड़ने के खतरे को कम करता है। यह पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम, ऑयरन, विटामिन ए, सी, पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। इससे आंख संबंधी समस्या से निजात मिलती है। इंसुलिन के स्तर को सामान्य रखता है। विटामिन सी एनीमिया आदि से शरीर की सुरक्षा करता है।

गर्भवती महिलाओं के लिए यह बहुत ही अच्छा है। इसमें पाये जाने वाला फोलेट गर्भस्थ शिशु के समुचित विकास में सहायक है। बेल का शर्बत पीने से पेट का पाचन तंत्र ठीक रहता है। उन्होंने बताया कि विदेशी पेय पदार्थ मीठा जहर है। इसके सेवन से बचना चाहिए। घर में आने वाले अतिथियों को देशी पेय से स्वागत करें। कार्यशाला में गांव की दो दर्जन से अधिक महिलाएं मौजूद रही।

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