लकड़ी ठेकेदार ने खोली वन विभाग के रेंजर की पोल  पेड कटवाने के नाम पर ठेकेदार ने 41 हजार रुपए लेने के बावजूद जेल भेजने का लगाया आरोप

लकड़ी ठेकेदार ने खोली वन विभाग के रेंजर की पोल  पेड कटवाने के नाम पर ठेकेदार ने 41 हजार रुपए लेने के बावजूद जेल भेजने का लगाया आरोप
  •  वन विभाग कर्मचारियों में बंटवारा न हो पाने पर रुपए भी हड़पे, ठेकेदार और उसके साथियों को भी भेजा जेल

खुटार/शाहजहांपुर

वन विभाग के खुटार रेंज में वनरक्षक से लेकर रेंजर तक मोटी रकम लेकर हरे भरे पेड़ों का कटान खुलेआम कराया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला बुधवार को भी सामने आ गया। लेकिन इस मामले में ठेकेदार से रेंजर, कार्यालय लिपिक और वनरक्षक कामता वर्मा द्वारा ली गई 41 हजार रूपये का साथी कर्मचारियों में बंटवारा न हो पाने की वजह से यह मामला मीडिया तक पहुंच गया।

जिसके बाद अधिकारियों को ठेकेदार और उसके तीन साथियों को जहां गिरफ्तार करना पड़ा, तो वही बगैर परमिट के काटे गए सेमल की लकड़ी से भरे ट्रक को कब्जे में लेकर वन रेंज कार्यालय मैलानी पर खड़ा कराया गया। 41 हजार रुपए देने और वन अधिकारियों से सौदा तय होने के बाद भी गिरफ्तारी होने पर ठेकेदार इसरार अहमद ने पूरा राज उगल दिया।

पीडित ठेकेदार इसरार अहमद ने मीडिया को बताया कि रविवार को वनरक्षक कामता बर्मा से नवदिया दरोदग्रह में सेमल के 8 पेड़ कटवाने की बात तय हुई थी। बिना परमिट के पेड़ कटवाने के एवज में वन रक्षक कामता वर्मा को उन्होंने 20 हजार रूपये नगद दिए थे। जिसकी उसके पास वीडियो और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी है।

ठेकेदार इसरार की माने, तो इसी बीच किसी ने बगैर परमिट के काटे जा रहे पेड़ की सूचना वन अधिकारियों को दे दी। जिस पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई और काटी गई

सेमल की लकड़ी ट्रक और उसे व उसके दो अन्य साथियों को पकड़कर मैलानी रेंज कार्यालय ले गए। ठेकेदार इसरार ने बताया कि मैलानी रेंज कार्यालय जाने के बाद उसकी रेंजर डीएस यादव और कार्यालय लिपिक चतुर्वेदी से बात हुई, तो रेंजर ने 50 हजार रुपए रिश्वत देने की बात कही और कहा कि यदि वह 50 हजार रूपये दे देता है,

तो उसे और उसकी लकड़ी को छोड़ दिया जाएगा। जिसके बाद इसरार ने अपनी बाइक अपने गांव जोगराजपुर के ग्राम प्रधान के यहां बिक्री की और 15 हजार रुपए रेंजर के सामने लिपिक चतुर्वेदी को दे दिए और उसके बाद पांच हजार रूपये दोबारा में चतुर्वेदी को दिए।

चार हजार रूपये अगले दिन देने की बात तय हुई ठेकेदार इसरार ने आरोप लगाया कि कामता वर्मा, कार्यालय लिपिक चतुर्वेदी के माध्यम से 41 हजार रूपये लेने के बाद मंगलवार रात रेंजर डीएस यादव ने उससे एक लाख रुपए रुपए मंगवाने की बात कही। लेकिन उसने एक लाख रुपए देने से मना कर दिया।

जिसके बाद बुधवार को उसके खिलाफ मुकदमा लिखवा दिया गया। पीड़ित ठेकेदार ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कराकर वनरक्षक कामता वर्मा, कार्यालय लिपिक चतुर्वेदी और रेंजर डीएस यादव के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उधर, इस संबंध में रेंजर डीएस यादव से बात की गई, तो उन्होंने अपने ऊपर और वनकमियों के ऊपर लगाए गए सारे आरोपों को सिरे से खारिज किया है।

 

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