जिला अस्पताल में डेढ़ वर्षीय मासूम की उपचार के दौरान मौत

जिला अस्पताल में डेढ़ वर्षीय मासूम की उपचार के दौरान मौत

 

 

जिला अस्पताल में डेढ़ वर्षीय मासूम की उपचार के दौरान मौत

परिजनों ने चिकित्सक पर आरोप लगाते हुए घंटाघर पर शव रख जाम लगाकर की नारेवाजी

ललितपुर।

जनपद में प्राईवेट नर्सिग होम के चिकित्सकों व जिला अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा इलाज में हीला हवाली के मामले इन दिनों प्रकाश में आते नजर आ रहे है, विगत दिनों स्टेशन रोड़ पर स्थित डा. विजय चौहान के नर्सिंग होम में तीमारदा को साथ बंधक बनाकर मारपीट करना का मामला अभी ठंडा नही हो पाया था।

कि शनिवार की रात जिला अस्पताल में उपचार के दौरान एक डेढ़ वर्षीय मासूम की मौत के बाद परिजनों ने मासूम के शव को घंटाघर पर रख कर चिकित्सक पर लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए जाम लगाकर जमकर नारेवाजी की, सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे सदर क्षेत्राधिकारी राजा सिंह व शहर कोतवाल एवं स्वास्थ विभाग के अधिकारियों ने उन्हें निष्पक्ष जांच का आश्वाशन किसी तहर तनाव पूर्ण स्थिति पर कावू पाकर जाम खत्म कराया।

थाना जखौरा क्षेत्रांतर्गत गांव विनेकाटोरन निवासी मेघराज का डेढ़ वर्षीय बेटे की तबीयत खराब हो गई थी। बीते शुक्रवार वह अपने बच्चे को लेकर जिला अस्पताल आया और शिशु विशेषज्ञ को दिखाया। डाक्टर के कहने पर उन्होंने अपने बच्चे को वहां भर्ती कर दिया। शनिवार देर शाम बच्चे की तबीयत काफी बिगड़ गई और उसने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद बच्चे के माता-पिता व परिजनों ने उक्त डाक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया।

आरोपित डाक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर पीडि़त परिशन घंटाघर पहुंच गए और उन्होनें शव को सडक़ पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया। देखते ही देखते स्थानीय लोगों व राहगीरों की भीड़ जमा हो गई और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ नारेबाजी होने लगी। सूचना मिलने पर सदर क्षेत्राधिकारी राजा सिंह, सदर कोतवाल मनोज वर्मा, सदर चौकी प्रभारी समेत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा.प्रताप सिंह व डाक्टर अमित चतुर्वेदी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और पीडि़त परिवार की बात सुनी।

इसके बाद अधिकारियों ने जांच कर आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। तब जाकर पीडि़त परिजन माने और प्रदर्शन करना बंद किया। गौरतलब है कि पीडि़त परिजनों का आरोप है कि डाक्टर ने बच्चे को वार्ड में भर्ती तो करा दिया, लेकिन उसको देखने के लिए नहीं आए।

परिवार के लोग ड्यूटी पर तैनात कर्मियों से बार-बार डाक्टर को बुलाने का कहते रहे, लेकिन डाक्टर ने आना जरूरी नहीं समझा और मासूम बच्चे की जान चली गई। उन्होंने लापरवाह डाक्टर व स्टाफ कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई है।

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