जिला पंचायत व उप्र लघु उद्योग निगम के अधिकारियोंं ने मिलकर किया शैड घोटाला

जिला पंचायत व उप्र लघु उद्योग निगम के अधिकारियोंं ने मिलकर किया शैड घोटाला

जिला पंचायत व उप्र लघु उद्योग निगम के अधिकारियोंं ने मिलकर किया शैड घोटाला


वर्ष 2018-19 में 6 करोड़ की लागत से 62 सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित कराये गये थे लार्जर-स्पान पाइप ट्यूबलर शैड कार्यदायी संस्था को आपूर्ति आदेश देते ही हो जाता था भुगतान 


राहुल शुक्ला 
ललितपुर। जिला पंचायत ललितपुर मेंं वित्तीय वर्ष 2018-19 में सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित कराये गये, टीनशैड न केवल कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने घटिया गुणवत्ता व मानक विहीन कार्य कराकर घोटाला किया। बल्कि जिला पंचायत के जिम्मेदार  अधिकारियों ने भी मोटा कमीशन लेकर  अपने वारे न्यारे किये है। भ्रष्टाचार का आलम यह रहा कि जिला पंचायत द्वारा टीनशैड स्थापित करने के लिये 6 करोड़ रूपये का भुगतान कार्यदायी संस्था को किया गया। 


हर वर्ष  करोड़ो रूपये का विकास कार्य कराने वाली जिला पंचायत मेंं टीनशैड घोटाले  का मामला प्रकाश में आया है।  यह घोटाला उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड कानपुर व जिला पंचायत ललितपुर के अधिकारियों की मिलीभगत से हुआ है। जानकारी के अनुसार क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड कानपुर ने पत्रांक संख्या 97/ उपसिक/क्षे.का. (का)/ 2018-19 ग्राम 20  अप्रैल 2018 को जिला पंचायत ललितपुर के तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी व अध्यक्ष को एक प्रस्ताव दिया था, जिसमें सार्वजनिक स्थलों पर लार्जर-स्पान पाइप, टयूलर शैड (टीनशैड)  की आपूर्ति एवं स्थापना का कार्य शामिल था। 
तत्कालीन अध्यक्ष व एएमए को उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड का यह प्रस्ताव बहुत अधिक पसंद आया।

अपर मुख्य अधिकारी ने पत्रांक संख्या 716/ जि. पं. ल./ 2018-19 दिनांक 16 नबम्वर 2018 के माध्यम से जिला पंचायत क्षेत्र ललितपुर के अन्तर्गत आने वाले 29 सार्वजनिक स्थलों पर 30 गुणा 60 व 40 गुणा 40 के लार्जर-स्पान पाइप, ट्यूबलर शैड की आपूर्ति व स्थापना 1 माह के अंदर कराकर बिल प्रस्तुत करने का आदेश दिया था। प्रत्येक शैड की लागत  लगभग 9 लाख 50 हजार रूपये थे। परन्तु भ्रष्टाचार के लिये चर्चित जिला पंचायत के अधिकारियों को कमीशन की इतनी जल्दी थी कि कार्यदायी संस्था लघु उद्योग निगम शैड की आपूर्ति भी नही कर पायी और बिल भुगतान के लिये जिला पंचायत मेंं आ गये और लगे हाथ दिनांक 7 दिसम्बर 2018 को चेक संख्या 062913 के माध्यम से क्षेत्रीय प्रबंधक उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम को 2 करोड 8 लाख 85 का भुगतान भी कर दिया गया। 


इसके बाद अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत ने पुन: पत्रांक संख्या 763/ जि.पं.ल. / 2018 -19 दिनांक 7 दिसम्बर 2018 के माध्यम से क्षेत्रीय प्रबंधक को फिर से एक पत्र प्रेषित किया। जिसमें पूर्व मेंं चयनित किये गये 23 सार्वजनिक स्थलोंं पर 40 गुणा 40 व 30 गुणा 60 के लार्जर-स्पान पइप, ट्यूबलर शैड की आपूर्ति व स्थापना एक माह के भीतर कर भुगतान के लिये बिल प्रस्तुत करने के निर्देश दिये। परन्तु इस बार तो जिला पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियोंं ने भ्रष्टाचार की सारी हादें पर कर दी। 20 दिन में कार्यदायी संस्था द्वारा शैड की आपूर्ति स्थापना करके बिल प्रस्तुत कर दिये गये और लगे हाथ 28 दिसम्बर 2018 को चैक संख्या 980130 से क्षेत्रीय प्रबंधक को 1 करोड 92 लाख  19 हजार रूपये का भुगतान फिर से कर दिया गया।

शैड की आपूर्ति व स्थापना की योजना तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष व एएमए को इतनी पसंद आयी की 2 फरवरी 2019 को पत्रांक संख्या 957/ जि.पं.ल. / 2018-19 को फिर से क्षेत्रीय प्रबंधक को पत्र लिखा गया और अबकी बार 10 सार्वजनिक स्थलों पर 30 गुणा 60 के लार्जर-स्पान पाइप, ट्यूबलर शैड की आपूर्ति व स्थापना करने का आदेश दिया गया। परन्तु इस बार भी मात्र 15 दिन मेंं क्षेत्रीय प्रबंधक को चैक संख्या 064744 के माध्यम से 93 लाख  96 हजार रूपये को भुगतान कर दिया गया।

कार्य कराते समय व भुगतान के दौरान अधिकारियों ने इस बात की परवाह नही की कि लघु उद्योग निगम द्वारा जो कार्य कराया जा रहा है उसकी गुणवत्ता क्या है। मोटी कमीशन की लालच मेंं घटिया, मानक विहीन व गुणवत्ताहीन कार्य करा दिया गया। जानकारी के अनुसार जिस  शैड की आपूर्ति लघु उद्योग निगम द्वारा 9 लाख 50 हजार रूपये मेंं की गयी है बाजार मेंं उसकी कीमत मात्र  3.50 लाख रूपये से लेकर 4 लाख रूपये के मध्य है। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार के लिये बदनाम दोनो ही कार्यदायी संस्था जिला पंचायत व लघु उद्योग निगम ने मिलकर बड़ा घोटाला किया है। इसके अलावा प्रत्येक शैड पर लगभग 3.50  लाख की लागत से चबूतरा का निर्माण अलग से कराया गया है। 

शैड कार्य मेंं जिला पंचायत के अधिकारियों को मिली थी 50  प्रतिशत कमीशन 
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम से शैड की आपूर्ति व स्थापना कराने के कार्य की स्क्रिप्ट जिला पंचायत के तत्कालीन अभियंता द्वारा तैयार की गयी थी। जिसमेंं फरवरी माह 2019 मेंं सेवा निवृत्त हुये अपर मुख्य अधिकारी की भी मिली भगत थी। उन्होंने ही मोटी कमीशन को वास्ता देकर जिला पंचायत के जिम्मेदार को इस कार्य के लिये राजी किया था। सूत्रोंं से मिली जानकारी के अनुसार लघु उद्योग निगम ने शैड आपूर्ति व स्थापना के कार्य मेंं जिला पंचायत के अधिकारियेां को 50 प्रतिशत कमीशन दिया था। इस कमीशन का बटवांरा तत्कालीन एएमए के आवास से किया गया था। इसलिये कार्यदायी संस्था को आपूर्ति आदेश देने व भुगतान करने मेंं जल्दबाजी की जाती थी। 

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