पालिका: भ्रष्टाचार के पक्ष में 21 व विरूद्ध में 5 पार्षद

 पालिका: भ्रष्टाचार के पक्ष में 21 व विरूद्ध में 5 पार्षद

पालिका: भ्रष्टाचार के पक्ष में 21 व विरूद्ध में 5 पार्षद


धर्मयुद्ध में जीत किसकी होगी, संख्याबल या सत्य की


नगर की जनता त्रस्त हो चुकी पालिका के भ्रष्टाचार से


ललितपुर। Ravi shankar sen

नगर पालिका में अध्यक्ष व उनके पति द्वारा फैलाये गये भ्रष्टाचार के पक्ष में 21 पार्षद सामने आ गये हैं। पाँच पार्षदों ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठायी है, जिसके कारण प्रशासन ने जाँच कमेटी गठित की, जाँच में भ्रष्टाचार की परतें खुलने लगी हैं। लेकिन कहीं जाँच के दायरे में अध्यक्ष व उनके पति न आये जायें,

इसलिए उन्होंने अपने पक्ष में डेढ़ दर्जन से अधिक पार्षदों को एकजुट कर लिया है। उन्होंने प्रभारी मंत्री को भी एक ज्ञापन के द्वारा पाँच पार्षदों पर विकास कार्य अवरूद्ध करने का आरोप लगाया है। अब देखना यह है कि पालिका में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे धर्म युद्ध में संख्या बल में अधिक कौरवों की हार होगी या फिर एक बार इतिहास दोहराया जायेगा और संख्या बल में कम पाँडवों को विजय तिलक लगेगा। 


नगर पालिका में इन दिनों भ्रष्टाचार चरम पर पहुँच गया है, जिसके खिलाफ आम जनमानस, समाचार पत्रों के अलावा पाँच पार्षदों ने भी बिगुल फूँक दिया है। पार्षदों की शिकायत पर जिला प्रशासन द्वारा जाँच टीम भी गठित की गयी, जिसमें अध्यक्ष पति की बेनामी कम्पनी का ठेकेदार भी फंस गया है।

ऑउट सोर्सिंग ठेके के माध्यम से गरीब कर्मचारियों की वेतन को ठेकेदार व अध्यक्ष पति द्वारा हड़प लिया गया। इसके बाद अध्यक्ष पति के दबाब में पालिका कर्मचारियों ने पूर्ण भुगतान के शपथ पत्र कर्मचारियों के हस्ताक्षर कराने का भी षडय़ंत्र रचा गया। जो कर्मचारियों के हंगामे के बाद असफल हो गया। तो वहीं हालही में शासन द्वारा जनपद के प्रभारी मंत्री के पद में फेरबदल किया गया। पद सम्भालने के बाद पहली बार उनका जनपद में आगमन हुआ है।

उनके जनपद में प्रथम आगमन के पश्चात ऑउट सेार्सिंग कर्मचारी ने ठेकेदार के खिलाफ प्रार्थनापत्र देकर अपने बकाया वेतन की मांग की, तो वहीं भ्रष्टाचार के विरोधी पार्षदों ने जिला प्रशासन द्वारा करायी जा रही जाँच को शीघ्र पूर्ण कराने के लिए भी प्रार्थना पत्र दिया। अध्यक्ष पति को लगा कहीं वह जाँच की जद में न आ जायें तो उन्होंने आनन-फानन में डेढ़ दर्जन से अधिक पार्षदों को एकत्रित कर उनसे प्रभारी मंत्री को विकास कार्यों में अवरोध करने का आरोप लगा डाला।

कुछ पार्षदों ने हस्ताक्षर नहीं किये, किन्तु उनकी भी अध्यक्ष व उनके पति के भ्रष्टाचार के लिए मौन स्वीकृति सी नजर आ रही है। चूैँकि अभी तक उन्होनें कभी भी भ्रष्टाचार के विरोध मेें आवाज नहीं उठायी है। जनपद की पालिका में चल रहे धर्म युद्ध में किसकी जीत होती है, यह तो भविष्य की गर्त में ही छुपा है। 

 

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