दूसरे दिन भी सराफा व्यापारियों ने रखा बाजार बन्द

दूसरे दिन भी सराफा व्यापारियों ने रखा बाजार बन्द


दूसरे दिन भी सराफा व्यापारियों ने रखा बाजार बन्द


चोरी के माल खरीदने के आरोप में सराफा व्यापारी को पुलिस ने भेजा जेल


पुलिसिया कार्यवाही से सराफा व्यापारियों में रोष


व्यापारियों ने दिया डीएम व एसपी को ज्ञापन


ललितपुर। Ravi shankar sen/ antim kumar jain

शुक्रवार को दूसरे दिन भी सराफा व्यापारियों ने बाजार बन्द रखा। बहुचर्चित मड़ावरा चोरी में पुलिस ने एक सराफा व्यापारी अनूप नजा को चोरी के माल खरीदने के आरोप में जेल भेज दिया है। जिससे व्यापारियों में काफी आक्रोश दिखायी दिया। जनपद के इतिहास में पहली बार हुआ है कि जब व्यापारमण्डल पुलिस के किसी खुलासे के विरोध में सडक़ों पर उतरी हो।

पुलिसिया कार्यप्रणाली को लेकर आम जनता में गलत संदेश जा रहा है। तो वहीं पुलिस ने इस प्रकरण मे सभी तत्थों को जानते हुये, व्यापारी जानबूझकर जेल भेजा है। जबकि उसने माल की खरीददारी बाजार मूल्य से ही की थी।  


शुक्रवार को भी सराफा व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठानों को बन्द रखते हुये प्रदर्शन किया, इसके बाद उन्होंने जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें बताया गया कि सराफा व्यापारी अनूप नजा ने पूरे प्रकरण में पुलिस का सहयोग किया है, तो ऐसे में उसे आरोपी बनाने का क्या औचित होता है।  देश की आजादी से पहले की प्रतिष्ठित दुकान के संचालक अनूप जैन नजा को पुलिस द्वारा जिस प्रकार से प्रताडि़त कर जेल भेजने का काम किया है, वह काफी निन्दनीय है।

कोई भी सराफा व्यापारी सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े व्यक्ति से सामान खरीदता है तो ऐसी उम्मीद कम ही होती है कि खरीदे जाने वाला सामान चोरी या किसी घटना का हो। उन्होंने कहा कि ऐसी दशा में पुलिस प्रशासन सामान बेचने आने वाले व्यक्तियों का सत्यापन कराने के लिए सराफा बाजार में पुलिस बल को तैनात कर उनका बैरीफिकेशन करे, ताकि व्यापारियों को भी मुसीबतों से राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि नजा शोरूम के संचालक अनूप जैन नजा द्वारा जो कुछ भी सामान खरीदा गया,

वह समाज के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति से खरीदा गया और महज चंद रुपयों के मार्जिन में खरीदा गया। यदि उक्त वस्तु आधे-पौने दामों में खरीदी जाती तो शायद वह वस्तु की खरीद अथवा बिक्री पर संदेह किया जा सकता था। ऐसी स्थिति में पुलिस द्वारा इस प्रकार की कार्यवाही सराफा व्यापारियों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली रही।

बैठक के दौरान सराफा व्यापारियों ने 12 सदस्यीय कमेटी का गठन किया। कमेटी को पुलिस ऐसी वस्तुओं की खरीद-फरोख्त की जानकारी से  पहले अवगत कराये, ताकि पुलिस की जांच टीम का सहयोग किया जायेगा। उन्होंने कहा कि दुकानों पर पुलिस द्वारा पहुंचकर संचालक को बिना कारण बताये हुये ही साथ ले जाना दुकान संचालक की प्रतिष्ठा पर काफी असर डालता है। कहा कि ऐसे मामलों में यदि व्यापारी गलत है तो कमेटी व्यापारी के विरोध में होगी और यदि व्यापारी सही है तो व्यापारी के साथ पूरी सराफा एसोशियेशन होगी।

कोई प्रतिष्ठित व्यक्ति कोई धातु बेचने सराफा में आता है तो कैसे सिद्ध हो कि वह माल चोरी का है या स्वयं उसका है। व्यापारी वह माल उस बस्तु के मूल्य के सापेक्ष खरीद लेता है तो इसमें सराफा व्यापारियों की क्या गलती है? उन्होंने तत्काल प्रभाव से सराफा व्यापारी को केस से अलग कर न्यायुचित कार्य करने के लिए कहा है। पत्र पर सराफा व्यापारियों सहित व्यापार मण्डल के पदाधिकारियों के नाम बताये गये हैं। 

 

Comments