कचरा बीन रहा जनपद का भविष्य

कचरा बीन रहा जनपद का भविष्य

कचरा बीन रहा जनपद का भविष्य


बेरोजगारी दूर करने के आँकड़े और हकीकत में फर्क


केन्द्र व राज्य सरकार में है जनपद का प्रतिनिधित्व


श्रम राज्यमंत्री हैं स्थानीय विधायक


फिर भी हालत में नहीं हो रहा सुधार


ललितपुर। Ravi shankar sen/ Antim kumar jain

भले ही राज्य सरकार बाल श्रम एवं बेरोजगारी को समाप्त करने के लिए बड़े बड़े दावे कर रही हो परन्तु हकीकत कुछ और ही है। यहाँ पर परिवार की अजीविका चलाने के गरीब परिवार के बच्चों को कचरा बिनकर परिवार की आय में सहयोग करना पड़ रहा है। जबकि सरकार बेरोजगारी को देश व प्रदेश दूर करने के बड़े-बड़े दावे कर रही हो। परन्तु हकीकत कुछ और ही है। जिसमें जनपद की हालत तो और भी खराब है, जबकि यहाँ पर एक केन्द्र व राज्य सरकार दोनों में जनप्रतिनिधि मंत्री हैं, परन्तु इसका असर जनपद विकास में नहीं दिखायी दे रहा है। 


राज्य सरकार में बुन्देखण्ड का प्रतिनिधित्व करने के लिए महरौनी क्षेत्र के विधायक को मंत्री पद प्रदान किया गया। साथ ही उन्हें श्रम व सेवायोजन जैसा महत्वूपूर्ण विभाग देने के पीछे सरकार मंशा थी, कि यहाँ के लोगों को रोजगार अवसर प्रदान हो सके और मजदूर तबके का जीवनस्तर में सुधार हो। परन्तु एक वर्ष बीत जाने के बाद भी ऐसा कुछ भी दिखायी नहीं दे रहा है। जनपद मुख्यालय पर अभी तक मंत्री के द्वारा स्थायी श्रम कार्यालय खोलने की पहल नहीं की गयी।

यही नहीं मजदूरों के शोषण में भी कोई कमी नहीं देखी गयी है। मजदूरों के बच्चों को स्वास्थ्य एवं शिक्षा का कोई इन्तजाम नहीं है। यही नहीं जनपद में कई मजदूरों को न्यून्तम मजदूरी से कम मजदूरी प्राप्त हो रही है। जिसका परिणाम यह है कि मजदूरों एवं गरीब तबके के परिवार के बच्चों को चाय व अन्य होटलों पर झूठे बर्तन धोकर परिवारिक आय में बढ़ोत्तरी की जा रही है। कुछ नाबालिग बच्चे तो गन्दगी व कचरे से प्लाइस्टिक आदि सामग्री इकत्रित कर उसे बेचकर परिवार आय में सहयोग कर रहे हैं।

स्थानीय मंत्री ने कभी इस ओर ध्यान नहीं दिया है। विधायक व मंत्री बनने के बाद स्थानीय किसी समस्या से विधायक व मंत्री रूबरू होकर उन्हें समाप्त करने की पहल नहीं की है। परिणाम यह है कि जनपद में निरन्तर बेरोजगारी बढ़ रही है। पढ़े लिखे बेरोजगारों का तो जनपद में और भी बुरा हाल है, वह तो मनरेगा मजदूर से कम वेतन पा रहे हैं। चूँकि वह उच्च शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, इसलिए अन्य मजदूरी का कार्य नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे लोगों को अधिकाँश निजी शैक्षिक संस्थान व अन्य जगहों पर देखा जा सकता है। 


बाल श्रम कानून किताबों तक ही सीमित


बाल श्रम रोकने के लिए सरकार ने बाल श्रम कानून बनाया, इस कानून के तहत बाल श्रम करवाने वाले व्यापारी से लेकर माता पिता तक को दोषी बनाये जाने का प्रावधान रखा गया। परन्तु हकीकत इससे कुछ अलग है, कुछ परिवारों की मजबूरी है, कि उनके बच्चे बाल श्रम कर रहे हैं। ऐसा नहीं है कि आलाधिकारियों एवं राजनेताओं को पता न हो, परन्तु बाल श्रम को रोकने के कोई भी सार्थक पहल नहीं गयी है। जबकि जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर राजनेताओं के कार्यालय पर यदाकदा यह बाल मजदूर मेहमान को चाय पिलाते नजर आ ही जाते हैं। 

 

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