छोटे जमीनी कारोबारी को नीचा दिखाने के लिए सही जमीन की फोटो को गलत कब्जा बता कर बना दिया भूमाफिया

छोटे जमीनी कारोबारी को नीचा दिखाने के लिए सही जमीन की फोटो को गलत कब्जा बता कर बना दिया भूमाफिया

लखनऊ /निजी स्वार्थ साधने वास्ते किसी को भी बताया जा सकता है भूमाफिया.

जी ऐसा मैं नहीं बल्कि पीड़ित छोटे प्रॉपर्टी कारोबारी जमीर अली और मुजीब अली पर बड़े जमीनी कारोबारी राकेश कुमार वर्मा के द्वारा भू माफिया बताएं जाने पर कहां गया. खैर बड़ा ही आसान होता है जब कब्जा और रजिस्ट्री सब कुछ जायज हो और कोई प्रतिद्वंदी किसी पर अपना दबाव बनाना चाहता है और उसकी सुनवाई अधिकारियों के पास नहीं हो रही हो तो विपक्षी सामने वाले को बताने लगता है भूमाफिया.

मतलब भूमाफिया शब्द का शाब्दिक अर्थ आज राजधानी के अंदर किसी भी सामाजिक व्यक्ति को कमजोर करने या व्यापारी वर्ग को कमजोर करने का एक साधारण और सुगम रास्ता, जिसके जरिए बड़े पैमाने पर वसूली का जरिया भी बनाया जा रहा है.

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ऐसा ही ताजा मामला राजधानी लखनऊ के ग्राम मूतक्कीपुर से निकल कर आ रहा है. जहां एक छोटे प्रॉपर्टी व्यापारी जमीर अली और मुजीब अली को विपक्षी प्रॉपर्टी व्यापारी ने भूमाफिया बताते हुए जिलाधिकारी और एसएसपी के सामने उपस्थित होकर अपने को राकेश कुमार वर्मा पुत्र छोटेलाल वर्मा जिला आजमगढ़ का निवासी के तौर पर प्रस्तुत कर अपने 16 बिस्वा जमीन और उसके बगल के चकरोड को सरकारी रोड बताते हुए जमीर व मुजीब का कब्जा बताकर भूमाफिया बता दिया.

जबकि जमीर व मुजीब दोनों मित्र हैं और उन्होंने थोड़े जमीन खरीदकर कुछ प्लाट अपने ही जमीन पर काटकर उसमें ही चकरोड निकाला और अपने कस्टमर को बेचा जमीर मुजीब के जमीन और उसके बगल में चकरोड के पास एक बड़े जमीनी कारोबारी राकेश वर्मा आजमगढ़ का प्लाटिंग का काम हुआ है जो अपने कस्टमर के डिमांड पर जमीर व मुजीब के चकरोड से रास्ता बनवाने की मांग की. जब इसके लिए जमीर व मुजीब सुरक्षा के लिहाज से तैयार नहीं हुए तो प्रतिद्वंदी बिजनेसमैन ने आपति दर्शाते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से छवि धूमिल करने की व्यापक स्तर पर कोशिश की. 

क्या कहते हैं जमीर व मुजीब

जमीर मुजीब बताते हैं कि पहले राकेश वर्मा का जमीन का काम बढ़िया चल रहा था तब तक उन्होंने अपने प्लाटिंग एरिया में किसी की एक नहीं सुनी और उसके बाद जब हम लोगों ने अपने खरीदे हुए जमीन पर डेवलपमेंट सही तरीके से कर लिया तो राकेश कुमार वर्मा की आंखें लगने लगी और वह हमारे डेवलपमेंट एरिया से रास्ते की डिमांड पर अड़ गए जबकि उससे 5 साल पहले ही हम लोगों ने बाउंड्री वाल जमीन खरीदने के साथ ही करवा दिया था

तो अब हमें भूमाफिया बता कर वह क्या साबित करना चाहते हैं हम लोगों ने अपने कस्टमर को किए वादे के हिसाब से डेवलपमेंट किया है जिसमें हमने उनके हिसाब से लागत भी लगाई है और अब यह राकेश वर्मा कुछ किसान यूनियन और भू माफियाओं के साथ मिलकर मुझे जबरदस्ती यहां से हटाना चाहते हैं ऐसा सुनने में भी आ रहा है. लेकिन जितने भी प्लाट हमने काटे थे सभी बिक चुके हैं जिसका मलिकाना हक अब हमारे कस्टमरो के पास है.

आवेदन के माध्यम से बड़े जमीनी कारोबारी राकेश वर्मा कहते हैं की जमीर व मुजीब का ऑफिस चकरोड पर बना हुआ है जबकि दोनों कारोबारियों का अपना अपना जमीन लगभग 20 फुट के अंतर पर चकरोड और बाउंड्री वॉल के द्वारा बटा हुआ है फिर भी राकेश वर्मा को सड़क के दूसरी तरफ अपनी जमीन छोड़कर जमीर व मुजीब की जमीन पर आंखें टिकी हुई है अब देखना यह होगा कि बड़े जमीन के कारोबारियों की भाषा प्रशासनिक अधिकारी भी बोलते हैं या छोटे कारोबारियों पर लगाए गए आरोप के खिलाफ भी कार्रवाई होती है.

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