माखन चोर

माखन चोर

 लेखक मान सिंह नेगी 

आया माखन चोर दिल लुभाने को 

आया चित चोर दिल चुराने को

हमारे दिल मे चुपके से घुस जाएगा 

अपना दीवाना बनाने को

आया माखन चोर दिल चुराने को 

आया चित चोर हम सब को 

अपने रंग मे रंगने को 

भक्ति की इस लौ मे डूब जाओ 

खो जाओ, लींन  हो जाओ 

ये स्वर्ण अवसर जीवन मे कल हो ना हो

ये अवसर ऐसे है, जिनके आने से वो भी तर जाते है 

जिनको नही आस्था भगवान पर 

जो कर्म को ही पूजा मानते है 

कहता हू तुम से फायदा उठा लो 

जब आ ही गया माखन चोर खुशिया लेकर हम सबके द्वार 

एक बार कह दो राधे 

एक हजार बार कृष्ण हो जाए 

राधा कृष्ण मे 

कृष्ण राधे मे 

तभी बने राधेश्याम 

आया माखन चोर दिल लुभाने को 

आया चित चोर दिल चुराने को

तुम डूब जाओ आज के दिन एव रात की जन्माष्टमी रूपी सागर मे 

पार लग जाएगी नैया 

तर जाओगे भव सागर से 

इसलिए अवसर दिया 

भगवान राधेश्याम ने 

इस अवसर से चूको नही 

जब वह स्वयं

आया माखन चोर दिल लुभाने को 

आया चित चोर दिल चुराने को

इतिश्री 

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