मौलाना सय्यद सलीम जाफरी की स्मृति में बीती रात अखिल भारतीय मुशायरे का किया गया आयोजन

मौलाना सय्यद सलीम जाफरी की स्मृति में बीती रात अखिल भारतीय मुशायरे का किया गया आयोजन

मौदहा (हमीरपुर)

कस्बे की सबसे प्राचीन शिक्षण संस्था रहमानिया इंटर कॉलेज के संस्थापक मौलाना सय्यद सलीम जाफरी की स्मृति में बीती रात अखिल भारतीय मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें प्रसिद्ध सायर इमरान प्रतापगढ़ी ने अपने अंदाज में बाबरी मस्जिद के फैसले पर कई शेर पढे।

मुशायरे की अध्यक्षता शाकिर भाई ने की तो इसके मुख्य अतिथि समाजसेवी कमरूद्दीन उर्फ जुगनू भाई थे। दूर दराज से आये सायरों ने कौमी एकता देश भक्ति व गीत तथा गजलां से पूरी रात शमा बांधी। वहीं इस मुशायरे का आगाज नाजमें मुशायरा सायर जनाब नदीम फर्रूख थे।

इस मुशायरे का आगाज कॉलेज के संस्थापक मौलाना के जीवन पर चर्चा व नातपाक के साथ आगाज हुआ। मुशायरे में आये शायर इमरान प्रतापगढी के सुनने के लिए एकत्र जनसमूह बेताबी से उनका इंतेजार करता रहा। डैस पर आते ही उनके स्वागत के साथ उनके इन शेरों को सुनते ही लोग तालियां की गडगड़ाहट से उन्हें दाद देते रहे।

“ टूटा हुआ गुम्बद कहता है टूटा मीनार यही कहता है और अदालत क्या करता है टूटा हुआ मेयार सही है -अदल का चेहरा धुंआ धुंआ है आखिर क्यां शफ्फाक नहीं है- तुम इसकों इंसाफ कहोगे लेकिन यह इंसाफ नहीं है।”

इतना ही नहीं प्रतापगढ़ी ने बिना नाम लिये सांसद प्रज्ञा ठाकुर के गोड्से प्रेम पर भी अपने अंदाज में शेर प्रस्तुत किया।

गांधी जिंदाबाद ---- इससे पूर्व प्रसिद्ध सायर भीषम गोपालपुरी “गुलशने हिंद को सींचा है लहु से हमने बीच नफरत के किसी को भी बोने नहीं देंगे हम मुल्क के टुकड़े होने नहीं देंगे, इसकी आजादी में खून हमारा सामिल हमी हैं देश को आजाद कराने वाले”।

जबकि भुसावल महाराष्ट्र से आये सायर हामिद भुसावली के पढ़ने का अपना अलग अंदाज था उनके शेर को पसंद किया गया।

“हम कहां मुफलसी से डरते हैं सिर्फ हम सरमिंदगी से डरते हैं - कल तेरी दुश्मनी से डरते थे अब तेरी दोस्ती से डरते हैं- तू करता कुछ नहीं कहता बहुत है”

मकनपुर से आये सायर आशिक ने अपनी मोहब्बत भरी गजल पेश करते हुए कहा

“ आप के इशारे पर जाने जां चले आये हम कहां थे कैसे थे और कहां चले आये- यह खता सही लेकिन बार बार करते हैं तुमसे प्यार करते थे और तुमसे प्यार करते हैं।”

जबकि प्रसिद्ध सायरा रूखशार बलरामपुरी ने अपने गीत के माध्यम से कौमी एकता तोड़ने वालां को बड़ा श्रृप ही दे ड़ाला।

“ इतना मौला मेरे करम करदे दूर भारत के दर्दगम करदे- हिंदुआें मुस्लिमों को जो लड़ाते हैं ऐसे नेताआें को तू भस्म करदे”

जबकि सायर जौहर कानपुरी ने अपने अंदाज में यह शेर पढा “ रात सबकुछ ठीक था लेकिन सवेरा जब हुआ

- शोर भारत में उठा सरकार चोरी हो गयी” उन्होने वतन के बच्चां के लिए एक शेर पढ़ा “ नफरतों की पुस्तकें न पढाओं हमारे बच्चां को- कि इन फरिस्तों को अब्दुल कलाम होना है” जबकि सायरा निकहत परवीन की यह गजल पसंद की गयी “ मेरे सब सवालां का तुम जवाब बन जाना - लब्ज बन गयी हूं मैं तुम किताब बन जाना” इन्होने मां बाप की खिदमत पर भी सानदार शेर पढा है।

मुशायरे में स्थानीय उभरते हुए युवा  सायर मसी निजामी व कानपुर से आये सायर मौलाना सलीम जाफरी की तीसरी पीढ़ी के अमीन जाफरी की सायरी को भी पसंद किया गया। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुशायरे के संयोजक निजामुद्दीन पावर, बीतू बादशाह, अनीस अहमद, सहित सभासद व स्थानीय युवकों के शानदार सहयोग से यह मुशायरा सफलता की ओर पहुंचा।\ मुशायरे में कस्बे के दो धावक नेशलन चैम्पियन वीर यादव, अरबाब अहमद को पुरस्कृत भी किया गया।फोटो -

 

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