सैयां भये कोतवाल तो अब डर काहें का

सैयां भये कोतवाल तो अब डर काहें का

वरिष्ठ संवाददाता विजय गुप्ता 

लखनऊ 

सैयां भये कोतवाल तो डर काहें का ? 
रोक के बावजूद बनी रही सड़क, 
सीवर लाइन के ढक्कन सड़क के लेवल तक उठाये बगैर बना दी सड़क...

बढ़ते प्रदुषण के कारण सड़क निर्माण पर लगी रोक के बाद, सड़क निर्माण करते हुए पकड़े जाने पर भी ठेकेदार ने दोबारा बनाना शुरू कर दी सड़क, वह भी बिना सीवर लाइन के मैन होल को सड़क के लेवल तक उठाये बगैर ? यानी सीवर चोक होते ही खुदने लगेगी नयी बनी सड़क I नयी बनी सड़क के किनारे अभी कई घरों में सीवर एवं पेयजल कनेक्शन भी नहीं I दिन और रात लगातार एक नहीं कई सड़कों का हुआ अफरा-तफरी में मानकों के विपरीत निर्माण I 

"सैयां भये कोतवाल तो डर काहें का"
जी हां यह सिर्फ कहावत ही नहीं बल्कि आज की वास्तविकता है, शिवाजीपुरम, सेक्टर-14, इंदिरा नगर में नगर निगम के ठेकेदार द्वारा स्थानीय भाजपा पार्षद राम कुमार वर्मा के सामने ही बढ़ते प्रदुषण के कारण सड़क निर्माण पर लगी रोक को दर किनार करते हुए हाल ही में सड़कों का निर्माण किया था, जिसको शहर के सभी प्रमुख समाचार पत्रों दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान, अमर उजाला एवं नव भारत टाइम्स ने 04 नवंबर 2019 को प्रकाशित भी किया था I 

फलस्वरूप कुछ दिन ठेकेदार शांत बैठा रहा, और कल सुबह ही दोबारा शिवाजीपुरम की कई सड़कों पर कंप्रेस्ड एयर मशीन से सड़को की सफाई कर वातावरण में धूल का अम्बार पैदा कर दिया, वहीँ दूसरी ओर डामर जलने से उत्पन्न गहरे धुँए से वातावरण प्रदूषित हो गया I

एक ओर कूड़ा जलाने पर ही नगर निगम आम जनता पर पेनल्टी लगाकर जुर्माना वसूल रहा है, वही बड़े स्तर पर कई किलोमीटर लम्बी सड़कों के निर्माण पर बड़ी मात्रा में डामर जलाकर एवं कंप्रेस्ड एयर मशीन से सड़को की सफाई कर वातावरण में धूल का अम्बार पैदा करने पर नगर निगम इन सड़कों के निर्माण कार्य के ठेकेदारों पर आखिर क्यों मेहरबान है, कहीं इसमें बन्दर बाँट तो नहीं ? सभी को मालूम है आज भी एयर क्वालिटी इंडेक्स 342 है, और सड़कों के निर्माण पर ही नहीं बल्कि पैच वर्क पर भी रोक लगी है I
 
सड़क निर्माण की जानकारी स्थानीय निवासी विजय गुप्ता ने क्षेत्रीय पार्षद (इन्द्रा प्रिय दर्शिनी वार्ड) राम कुमार वर्मा को दी तब उन्होंने सड़क निर्माण पर रोक 05 नवंबर 2019 तक ही लगी होना बताया और स्वयं की निगरानी में ही सड़कों का निर्माण जारी रखा I सड़क निर्माण की जानकारी देने के लिए जब नगर निगम के अधिशासी अभियन्ता मनीष अवस्थी, मुख्य अभियन्ता मनीष सिंह को फ़ोन मिलाया तो दोनों ही अधिकारियों ने फ़ोन ही नहीं उठाया I

क्योंकि इसके पूर्व में भी विजय गुप्ता ने बसंत विहार में पूजा होटल के सामने बिना टेंडर के बन रही सड़क की पोल खोली थी, जिसकी जांच में नगर निगम के अधिशासी अभियन्ता मनीष अवस्थी दोषी भी पाए गए थे, इसी प्रकार करीब 06 माह पूर्व बिना अनुमति के निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा विकास नगर में भूमिगत केबल बिछाने की जानकारी भी गुप्ता ने नगर निगम को दी थी, जिसके जवाब में नगर निगम द्वारा लिखित रूप से बताया गया था कि ठेकेदार के खिलाफ अनाधिकृत रूप से रोड कटिंग के लिए एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है, जो आज करीब 06 माह बाद भी दर्ज नहीं हुई है I आखिर नगर निगम एवं ठेकेदारों के बीच इस रिश्ते को क्या नाम देंगें ? इसकी जानकारी हाल ही में गुप्ता ने मुख्य अभियन्ता मनीष सिंह को भी दी थी I

अफरा-तफरी में मानकों के विपरीत बन रही सड़कों का निर्माण कल दिन भर के साथ रात भर भी चला और शिवाजीपुरम की कई किलोमीटर लम्बी सड़कों का निर्माण कार्य अब सड़क निर्माण पर रोक ही नहीं बल्कि पैच वर्क पर भी रोक के बाद बिना किसी रोक टोक के जारी रहा, क्योंकि आजकल निर्माण कार्य के दौरान अब विभाग के अधिकारी तो निर्माण कार्य स्थल पर होते ही नहीं, पता नहीं आखिर क्यों, और अगर कोई सूचित करना चाहे तो मोबाइल ही नहीं उठाते, वजह आप सब भली-भाँती समझ ही सकते हैं ?

देर शाम सड़क निर्माण के दौरान सीवर लाइन के मैन होल सड़क के नीचे दब जाने पर अदृश्य हो गए, जिसकी सुचना विजय गुप्ता ने नगर आयुक्त इन्द्र मणि त्रिपाठी को दी तो उन्होंने ठेकेदार को सीवर लाइन चैंबर्स को उठाने के आदेश देने की बात कही, लेकिन रात भर मन-मानी कर मानकों के विपरीत सड़कों का निर्माण कर ठेकेदार फुर्र हो गया I 

बताते चले कि जल निगम ने पहले ही सभी विभागों को पत्र जारी कर सड़क निर्माण के दौरान सड़क के नीचे दबे सीवर लाइन के मैन होल को सड़क के लेवल में उठाने की जिम्मेदारी सड़क निर्माण करवा रहे विभाग पर डाल दी है I

अब देखना बाकी यह है कि पिछली बार की तरह रोक के बाद भी सड़क निर्माण करते दोबारा पकड़े जाने पर बिना कोई पेनल्टी लगे इस चहेते ठेकेदार पर दबंगाई पूर्वक पुनः सड़क निर्माण करने पर क्या नगर निगम द्वारा जुर्माना लगता है या नहीं और क्या अब नयी सड़क निर्माण के दौरान सड़क के नीचे दबे सीवर लाइन के मैन होल को उठाने की क्या व्यवस्था की जाती है ? 

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