हमें न मालूम है

हमें न मालूम है


हमें न मालूम है
न मालूम करना चाहते हैं।
हमें  इश्क था
हमें  इश्क है,
और इश्क ही
बस करना चाहते हैं।
न जीवन का
ठिकाना पता है,
न मृत्यु का 
अट्हास का सुना है।
हर घड़ी,हर पल
उल्हास में जीवन 
जिया है।
जी रहे हैं 
और बस जीना चाहते हैं।
न दुख की अनुभूतियों में
ग़म किया।
न सुख की अनुभूतियों में
उल्लास किया।
मदमस्त जीवन जिया
और जी रहे हैं 
और जीते रहेंगे।

राजीव डोगरा

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