मेरिट पर नहीं प्रोफाइल पर हुआ है फैसला ।....करवरिया बंधु

मेरिट पर नहीं प्रोफाइल पर हुआ है फैसला ।....करवरिया बंधु

‌ फैसला मेरिट पर नहीं प्रोफाइल देख कर हुआ।

‌ उच्च न्यायालय से न्याय पाने का विश्वास।
‌स्वतंत्र प्रभात।
‌ प्रयागराज।
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‌कैद की सजा पाने वाले करवरिया बंधुओं  का मानना है कि उनके साथ मेरिट के आधार पर न्याय नहीं किया गया बल्कि उनके प्रोफाइल को देखकर फैसला दिया गया क्योंकि वह तीनों भाई जनप्रतिनिधि थे जिसमें कपिल मुनि करवरिया पूर्व सांसद उदय भान करवरिया विधायक और सूरज भान करवरिया एमएलसी थे जिससे उनके साथ षड्यंत्र करके इस हत्याकांड में नामजद किया गया जिससे उनका राजनैतिक कैरियर समाप्त किया जा सके ।फैसला आने के बाद कचहरी परिसर में हजारों समर्थकों के बीच पूर्व विधायक उदय भान करवरिया ने पत्रकारों से कहां की पूरा जिला ही नहीं प्रदेश जानता है की हम तीनों जनप्रतिनिधि भाइयों को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया

और तब तक जांच एजेंसियां बदली गई जब तक हम लोग आरोपित नहीं किए गए जबकि शुरुआती कई जांच में हम लोग निर्दोष साबित हुए थे लेकिन लोअर कोर्ट से हुए आज इस फैसले पर मुझे आश्चर्य हुआ कि केस को मेरिट के आधार पर निस्तारित नहीं किया गया बल्कि हमारे लोगों के प्रोफाइल को ध्यान में रखकर फैसला किया गया जिसको हम उच्च न्यायालय में चुनौती देंगे।

‌ उन्होंने कहा कि मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हम ऊपर की अदालत से निर्दोष सिद्ध होंगे और पुनः जनता के बीच में आकर सेवा करेंगे उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वे निराश और हताश ना हो सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं ।


‌उदय भान करवरिया ने यह भी दावा किया उनके तीनों भाइयों के विरुद्ध इस हत्याकांड के अलावा इसके पूर्व 323 धारा की भी रिपोर्ट नहीं है ईश्वर सब देख रहा है और मुझे न्याय मिलेगा ।
‌ बता दें कि समाजवादी पार्टी के बाहुबली विधायक कहे जाने वाले जवाहर यादव पूर्व पंडित कि इलाहाबाद में 13 अगस्त 1996 को दिनदहाड़े एके-47 की गोलियों से छलनी कर दिया था जिसमें उनके भाई स्वर्गीय सुलखीलाल यादव ने कपिल मुनि करवरिया उदयभान करवरिया और सूरज भान करवरिया सहित उनके चचेरे भाई राम चंद्र त्रिपाठी को नामजद करते हुए मुकदमा दर्ज कराया गया था। 23 वर्ष तक चले इस मुकदमे में अनेक उतार-चढ़ाव आए।

और जिले का सबसे चर्चित और हाई प्रोफाइल मामला हो गया था अनेक कानूनी दांवपेच में उलझते उलझते इस मुकदमे को ट्रायल कोर्ट में वर्तमान सरकार ने कुछ माह पूर्व या केस वापस लेने का लिखित अनुरोध किया लेकिन अदालत ने उसे नामंजूर कर दिया था उसके बाद आज यह फैसला आया और तीनों भाइयों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई फैसले को सुनने के लिए कचहरी में हजारों की भीड़ जमा थी और सजा हो जाने के बावजूद भी करवरिया जिंदाबाद के नारे लग रहे थे बता दें कि उदय भान करवरिया की पत्नी नीलम करवरिया वर्तमान में अपने पति के स्थान पर मेजा विधानसभा से बीजेपी के टिकट पर विधायक चुनी गई है।

 


‌ प्रयागराज से दया शंकर त्रिपाठी की रिपोर्ट ।

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