कलान में तहसील होने के बावजूद भी ग्रामीणों को लगाने पड़ रहे जलालाबाद के चक्कर

कलान में तहसील होने के बावजूद भी ग्रामीणों को लगाने पड़ रहे जलालाबाद के चक्कर

कलान में तहसील होने के बावजूद भी ग्रामीणों को लगाने पड़ रहे जलालाबाद के चक्कर
 कलान को तहसील बने होने जा रहे लगभग दो वर्ष

 

उद्धरण खतौनी एवं रजिस्ट्री बैनामा के लिए आज भी जाना पड़ता है जलालाबाद
 

दिनेश मिश्रा
 कलान (शाहजहांपुर)

कलान को तहसील बने लगभग दो वर्ष होने जा रहे हैं। लेकिन जनता को तहसीलों में मिलने वाली सेवाओं के लिए अभी भी कलान मिर्जापुर परौर की जनता को जलालाबाद के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
ज्ञात हो कि कलान तहसील की स्थापना 15 नवंबर 2016 को हुई थी। कलान को तहसील बने लगभग दो वर्ष पूरे होने जा रहे हैं। लेकिन अभी भी कलान मिर्जापुर परौर की जनता उद्धरण खतौनी एवं रजिस्ट्री बैनामा के लिए जलालाबाद तहसील के चक्कर लगाने को मजबूर है। कलान तहसील बनने के बाद सबसे पहले  तीन पोर्टल आय जाति निवास, उद्धरण खतौनी, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ एवं आईजीआरएस आए। इसके बाद जनता एवं अधिवक्ताओं की मांग पर एसडीएम प्रशासन ने तहसील कलान का औचक निरीक्षण किया। जिसमें उन्होंने पाया कि  तहसील में अनियमितताएं हैं तथा एसडीएम तहसीलदार का पोर्टल ना होने के कारण बाद दायरा निस्तारण में काफी कठिनाइयां होती है। इसके बाद जनता की मांग पर एडीएम प्रशासन व डीएमके विशेष सहयोग से एसडीएम कोर्ट व तहसीलदार कोर्ट के पोर्टल आए। जिससे जनता में काफी खुशी प्रतीत हुई कि उन्हें सस्ता एवं सुलभ न्याय मिलेगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पोर्टल  होने के उपरांत भी जनता की अत्यधिक जरूरतमंद उद्धरण खतौनी एवं रजिस्ट्री बैनामा के लिए आज भी कलान परौर मिर्जापुर की जनता जलालाबाद जाने को विवश है। मजे की बात तो यह है कि एक तहसील में एक से अधिक परगना हो सकते हैं और एक परगना में एक ही तहसील हो सकती है। लेकिन जलालाबाद परगना में दो तहसीलें  जलालाबाद एवं कलान संचालित हो रही हैं। एसडीएम कोर्ट का पोर्टल एवं तहसीलदार कोर्ट का पोर्टल अभी लगभग तीन हफ्ते पहले ही हुए हैं। हालांकि अभी तक कार्य सुचारु रुप से न होने के कारण जनता एवं अधिवक्ताओं को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। जिससे अधिवक्ताओं एवं जनता के बीच काफी रोष व्याप्त है। यदि यह कहा जाए कि कृषक आम आदमी को अपना कार्य कराने के लिए दोनों तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ते हैं तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। तहसील पोर्टल होने के बावजूद भी रजिस्ट्रार कानूनगो विधिवत कार्य नहीं करते हैं। जिससे अमल दरामद में काफी दिक्कत का सामना करना पड़ता है और तो और राजस्व संग्रह अमीन भी तहसील पर कार्य न करके जलालाबाद में ही बैठते हैं। जिससे बकायेदारों से वसूली प्रभावित होती है और नो ड्यूज नहीं मिल पाते हैं तथा लाइसेंस नवीनीकरण के लिए भी शस्त्र धारकों को जलालाबाद के चक्कर लगाने पड़ते है। कुल मिलाकर यदि यह कहा जाए कि तहसील कलान स्टाफ की कमी से जूझ रहा है तो यह गलत नहीं होगा।

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