झोलाछाप चिकित्सकों पर प्रशासन की मेहरबानी

  झोलाछाप चिकित्सकों पर प्रशासन की मेहरबानी

                 ( ब्यूरो रिपोर्ट )

कसमंडा सिधौली झोलाछाप चिकित्सकों पर प्रशासन की मेहरबानी

जिला संवाददाता नरेश गुप्ता की रिपोर्ट

सिधौली सीतापुर


जिले के सिधौली  नगर व ब्लॉकभर में चल रहे अवैध चिकित्सकीय कारोबार पर अब प्रशासन भी अपनी मेहरबानी का परिचय कराने लगी है। बेरला ब्लॉक के सभी नगरीय व ग्रामीण निकायों में विगत कई दौर से झोलाछाप डॉक्टरों का बोलबाला है। जिस पर प्रशासन व विभाग की मेहरबानी आमजनों के बीच में काफी चर्चित है।


उल्लेखनीय है कि जिला प्रशासन कुछ समयांतराल पूर्व से हाईकोर्ट के आदेश के तहत जिलेभर में अवैध रूप से चल रहे चिकित्सकीय कारोबार व झोलाछाप डॉक्टरों पर शिकंजा कसने की बात कर रही है। लेकिन आज तक वह शुभ घड़ी प्रशासन के लिए नहीं आ पाई। इसके कारण जनपद सीतापुर के विकासखंड सिधौली ब्लॉक सहित जिलेभर में अवैध चिकित्सकीय गतिविधियां खुलेआम चल रही है, और वहीं प्रशासन के आला अफसर आंख मूंदकर तमाशा देख रहे है।

जिससे आम नागरिकों में काफी रोष व्याप्त होने लगा है। क्योंकि इन झोलाछाप डॉक्टरों के झांसे में रोजाना कई मरीज आकर ठगे जा रहे है।बकायदा झोलाछाप चिकित्सक व गैर कानूनी कार्य तो खुलेआम उनके दुकानों व घरों में ही संचालित हो रही है। तो वहीं कई तो घर पहुंच सेवा पूरी व्यवस्था के साथ दे रहे है। जिससे सस्ते इलाज व उपचार के लालच में आकर अपनी स्वास्थ्य व सेहत से खिलवाड़ कर रहे है। वहीं इस मोहमाया के फेर में जिलेभर के सभी शासकीय अस्पतालों व चिकित्सालयों का बुरा हाल है।

क्योंकि एक तो वहां कर्मचारियों व स्टाफ की कमी तो चिकित्सक भी मनचाहे अवकाश लेकर नदारद हो रहे है। वहीं जिले में 108 शासकीय एम्बुलेंस सेवा का भी खस्ता हाल है। इसके कारण अब आम जनता बहुत ही मजबूर हो चुकी है और प्रशासन के संरक्षण में खुलेआम चल रहे इन अवैध चिकित्सकीय प्रतिष्ठानों के चक्कर काटकर अपनी जान से खिलवाड़ करने से जरा भी बाज नहीं आ रहे है। सबसे गंभीर बात इस अवैध कार्य के प्रति आखिर जिला स्वास्थ्य प्रशासन की खुलेआम नरमी से आमलोगों में प्रशासन के प्रति नकारात्मक भाव आ रहे है।

जिसमें ज्यादातर नागरिक इस अवैध कार्य पर कुछ जिम्मेदार विभागीय अफसर व अवैध चिकित्सकीय सरपरस्तों के बीच सांठगांठ होने की बात कर रहे है। क्योंकि जिला प्रशासन का स्वास्थ्य विभाग लंबे अरसे से जिलेभर में बिना लाइसेंसी चिकित्सकीय कारोबार व गतिविधियों पर लगाम लगाने समुचित कार्रवाई करने की बात जरूर कर रहे है, परंतु आज तक कोई भी जरूरी या प्रभावी कदम बिना लाइसेंस-डिग्री के संचालित चिकित्सकों पर नहीं कर पाए है। जिससे आमजन भावना में प्रशासन की शैली व पहचान धूमिल हो रही है।

 

सीतापुर के सिधौली  क्षेत्र में अवैध क्लिनिक का कारोबार जारी

स्वास्थ्य विभाग के  नाक के नीचे  चला रहे  अवैध क्लिनिक 

कहीं सिधौली स्वास्थ्य विभाग की सरपरस्ती में तो नहीं संचालित हो रहे अवैध क्लिनिक

सीतापुर के विकासखंड सिधौली  के कसमंडा  क्षेत्र में दिन प्रतिदिन अवैध चिकित्सकीय कार्य करने वाले झोला छाप डॉक्टरों का हस्तक्षेप बढ़ता ही जा रहा है कसमंडा के ग्राम हरैया ग्राम के निकट पर कुवर्गड्डी बंदरिया बाग बेहमा भांडिया अपना धंधा चमका रक्खा जहा पर  सर्दी जुकाम से लेकर कैसर जैसी बीमारियों का इलाज किया जाता हैं  जिस पर शासन प्रशासन द्वारा कोई सुधि नहीं की जा रही है जिससे कि इन झोला छाप डॉक्टरों के हौसले बुलंद है।इन नौसिखिया    डाक्टर एवम झोला छाप चिकित्सक के कारण इसका खामियाजा लोगो को भुगतना पड़ता

ये झोला छाप डॉक्टर के पास न तो इलाज करने का कोई गुर होता है और न ही कोई मान्यता खुलेआम ग्रामीण क्षेत्र में बसने वाले ग्रामीणों से इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूल कर ले जाते हैं जिससे ग्रामीणों का पैसा तो बरबाद होता ही है वहीं समुचित इलाज के अभाव में उन्हें दर दर भटकना पड़ता है। क्षेत्र में सक्रिय झोला छाप डॉक्टरों से संबंधित शिकायत समय समय पर मीडिया से प्रशासन को मिलती रही है परंतु सक्षम अधिकारियों द्वारा इन झोला छाप डॉक्टर्स पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

झोला छाप डॉक्टर छोटी मोटी बीमारी जैसे जुकाम, भुखार इत्यादि के अलावा बड़े से बड़ी कैसंर जैसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के ऊपर भी हाथ आजमाने से नहीं चूकते। अगर मरीज का इलाज करते हुए अगर थोड़ी सी भी लापरवाही हुई तो मरीज को उससे होने वाले नुकसान का अनुमान भी नही लगाया जा सकता है।

बगैर लाइसेंस पूरी व्यवस्था व सुविधा के साथ चिकित्सकों की सक्रियता

जिले की तहसील  सिधौली  क्षेत्र   में ग्रामीण इलाकों की अधिकता है और पूरे ब्लॉक में मुख्यालय के रूप में एक ही नगर सिधौली का महत्व है। इस कारण ग्रामीण व देहांत होने के कारण पूरे क्षेत्र भर में झोलाछाप चिकित्सकों की जबरदस्त घुसपैठ बनी हुई है। आलम यह है कि ये चिकित्सक डिग्रीधारी की तरह पूरे व्यवस्था के साथ तमाम सुविधाओं से परिपूर्ण होकर आमजन का इलाज व उपचार कर रहे है।

इनके झोले में बड़े-बड़े बीमारियों के इलाज के सामान व उपकरण मौजूद रहते है। वहीं कई तो बकायदा पूरी सुख-सुविधाओं के साथ अपने घर पर ही यह चिकित्सकीय कार्य कर रहे है। एक प्रकार से देखा जाए तो  ब्लॉक सहित जिले में झोलाछाप डॉक्टरों व बगैर डिग्री-लाइसेंस के चिकित्सकों की अच्छी खासी पहुंच पकड़ है। जिससे अधिकारी भी इन पर कार्रवाई करने से बचते नजर आते है।

विभागीय अफसरों की मेहरबानी, आम जनता के लिए आफत

नगरीय केंद्रों में जहां एक ओर शासकीय अस्पतालों व चिकित्सालयों में उचित स्टॉफ व सुविधाओं की कमी है। इसके कारण ग्रामीण आमजन इलाज के लिए सस्ते व सुगम साधन के लिए नजदीक सेवा लेने के चक्कर में इन्हीं चिकित्सकों के चंगुल में फंस जाते है। जो बाद में लापरवाह उपचार से काफी नुकसानदेह व महंगी साबित  होती है। इस पर विभागीय अफसरों व प्रशासन की मेहरबानी आमजनता को समझ मे ही नहीं आती। वहीं कुछ आमजन जो लापरवाह इलाज के कारण प्रभावितों का कहना है कि जिले में कुछ विभागीय अफसरों व गैर रूप से चिकित्सा कार्य कर रहे इनके नुमाइंदों की सांठगाठ रहती  है।

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