खेती किसानी पिछड़ी: अब अषाढ़ी खेती की बुवाई सावन में करेंगे किसान

खेती किसानी पिछड़ी: अब अषाढ़ी खेती की बुवाई सावन में करेंगे किसान

नरेश कुमार गुप्ता

खेती किसानी पिछड़ी: अब अषाढ़ी खेती की बुवाई सावन में करेंगे किसान


एक दिन बाद शुरू हो जाएगा सावन महीना
     प्रणय कुमार सिंह


  पिछले दिनों देर से हुई  बारिश के चलते अषाढ़ में लगाई जाने वाली खरीफ की कई फसलों की बुवाई  में अब काफी देरी हो चुकी है। पिछले दिनों हुई तेज बारिश से खेतों में काफी नमी है और किसान उसकी जुताई नहीं कर पा रहे हैं। तेज बारिश के चलते जिन किसानों के खेत में पर्याप्त पानी लग गया है

वे किसान खरीफ की प्रमुख फसल धान की रोपाई में लग गए हैं।लेकिन बहुतायत किसान खरीफ में लगाई जाने वाले अन्य प्रमुख फसलों ज्वार,मक्का,अरहर,उड़द,मूंग,तिल, मूंगफली को लेकर चिंतित है।पहले तो आषाढ़ महीने में देर से बारिश हुई और जब बारिश हुई तो खेत में पानी लग गया।लिहाजा जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार की है उन्हें धान रोपे जाने लायक पानी मिल गया है।जबकि बहुतों किसानों के खेत में पर्याप्त नमी आ गई है।ऐसे खेतों में किसान पंपसेट,ट्यूबवेल के माध्यम से सिंचाई कर धान की रोपाई कर लेंगे।


     जिन किसानों को ज्वार मक्का मूंगफली तिल अरहर उड़द मूंग लोबिया की खेती करनी थी वे काफी पिछड़ चुके हैं। इन फसलों की अगैती खेती करने वालों किसानों की तो कमर ही टूट गई है। इन फसलों की अगेती खेती करने वाले किसान बाद में अगेती सब्जी वाली मटर की खेती कर के मुनाफा प्राप्त कर लेते हैं।जो किसान अब इन फसलों को लगाना चाहते हैं उनके सामने मौसम साफ रहने की चुनौती बनी हुई है। अगर इधर बीच बारिश हुई तो खेतों में फिर से नमी आ जाएगी,जिससे उनकी जुताई नहीं हो पाएगी।

खेतों में अधिक नमी के कारण खेत देरी से तैयार हो रहे है तथा अभी बुवाई लायक नहीं हुए हैं।एक दिन बाद सावन महीना शुरू हो जाएगा।खरीफ में बोई जाने वाली फसलों को किसान अषाढ़ी खेती भी कहते हैं क्योंकि इस महीने में पहली बारिश के बाद कई प्रजातियों की बुवाई किसान कर लेते हैं।

"तेरह कातिक, तीन अषाढ़' की कहावत काफी प्रचलित भी है। किसानों को अब अषाढ़ी फसलों की बुवाई सावन महीने में  करनी पड़ेगी। अब जब तक खेत पककर तैयार होगे उसमें बुवाई करते करते सावन महीना लग जाएगा।हालांकि कुछ फसलों की बुवाई का समय अभी है, लेकिन अगेती खेती करने वाले किसान इससे वंचित रह जाएंगे। मूंगफली की बुवाई का उचित समय 15:जून से 10 जुलाई के बीच का है।

मूंगफली की कई प्रजातियों को 15 जून से 30 जुलाई तक भी लगाया जा सकता है।लेकिन यह प्रजातियां देर से तैयार होती है।अरहर के लगाए जाने का उपयुक्त समय मध्य जून से मध्य जुलाई तक है, इसे बोये जाने में भी देरी हो चुकी है।अरहर और मक्का की सह फसली खेती इस समय किसान कर सकते हैं। हालाकि मक्का अनुकूल मौसम में कभी भी लगाया जा सकता है।लेकिन किसान यदि अब मक्का लगाएंगे तो उसकी कुछ प्रजातियां 80 से 90 और 100 से 110 दिन के बीच में तैयार होगा। खरीफ में लगाई जाने वाली तिलहन की प्रमुख फसल तिल की खेती का उपयुक्त समय जून के अंतिम सप्ताह से जुलाई का दूसरा पखवाड़ा है।ऐसे में  तिल की खेती की बुवाई में भी देरी हो गई है।

उड़द मूंग भी किसान अब देर से ही लगा पाएंगे। पशुपालक किसान भूसे के महंगाई से पहले ही प्रभावित थे।बारिश के बाद ज्वार की बुवाई कर उसे किसान हरे चारे के रूप में प्रयोग करते हैं। पशुपालक किसान अब यदि ज्वार की बुवाई करते हैं तो चारे के रूप में पशुओं को खिलाने के लिए ज्वार 60 से 70 दिन के बाद ही पूरी तरह तैयार होगा।

कृषि वैज्ञानिक कहते हैं कि किसान आगे की लगाई जाने वाली फसलों को ध्यान में रखकर ही अपनी खेती करें।खेत खाली रखने से अच्छा है कि किसान भाई देर से लगाए जाने वाली प्रजातियों का चयन कर बुवाई कर ले,जिससे उन्हें कुछ न कुछ उत्पादन मिल जाएगा। जिन खेतों में पानी लगने की समस्या नहीं है वहां किसान सब्जी की विभिन्न प्रजातियों को लगाकर भी अच्छी आमदनी प्राप्त कर सकते हैं।

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments