एग्री-क्लीनिक एवं एग्री बिजनेस पर प्रशिक्षण प्रारम्भ

एग्री-क्लीनिक एवं एग्री बिजनेस पर प्रशिक्षण प्रारम्भ

 सुल्तानपुर

जनपद के कृषि स्नातको को स्वयं के  रोजगार के लिये एग्री-क्लीनिक एवं एग्री बिजनेस पर प्रशिक्षण का प्रारम्भ हुआ । केन्द्र के अध्यक्ष प्रो.रवि प्रकाश मौर्य ने बताया कि  इस प्रक्षिक्षण का मुख्य उद्देश्य वेरोजगार कृषि स्नातक नवयुवको को प्रशिक्षण उपरान्त  अपने क्षेत्र के किसानो को जानकारी एवं दूसरी सेवाये को मुफ्त या कीमत लेकर उनकी आवश्यकता अनुसार उनके बजट के अनुसार उपलब्ध कराना.

 कृषि का विकास करना   तथा बेरोजगार कृषि आदि के स्नातक को रोजगार का अवसर प्रदान करना है।एग्री-क्लीनिक की  संकल्पना में किसानो को मृदा स्वास्थ्य, पौंध सरंक्षण आदि  सेवाये का बिज़नेस स्थापित करना इसके अन्तर्गत आता है.। एग्री बिजीनेस सेन्टर में व्यापारिक यूनिट की स्थापना प्रशिक्षित लोगो द्वारा की जाती है।

प्रशिक्षण के लिए योग्यता

· कृषि या अलाइड विषय( वेटेरिनरी-पशु चिकित्सा , फिशरी- मछली पालन      आदि ) में स्नातक.  कृषि या अलाइड विषय में स्नातक या स्नाकोत्तर डिप्लोमा स्नातक या स्नाकोत्तर डिप्लोम होना चाहिये।

एग्री-क्लीनिक एवं एग्री-बिजनेस सेन्टर के अन्दर आने वाले व्यवसाय कृषि विस्तार कंसलटेंसी सेवाये. मृदा एवं जल परीक्षण लैब. पौंध सरंक्षण सेवाये. माइक्रो प्रोपेगेसन यूनिट. कस्टम हाईरिंग सेन्टर. बीज उत्पादन

एवं प्रोसेसिंग यूनिट. केचुआ उत्पादन यूनिट. बायो फर्टिलाईजर एवं बायो पेस्टीसाइड उत्पादन यूनिट. मधुमक्खी पालन. कृषि बीमा सेवाये. कृषि पत्राचार, एग्री पर्यटन, मुर्गी एवं मछली की अंडा उत्पादन यूनिट

, पशुचिकित्सा की डिस्पेंसरी, सूचना तकनीकी  , आहार का उत्पादन, मार्केटिंग एंड टेस्टिंग यूनिट, कोल्ड स्टोरेज, पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट सेन्टर धातु व अधातु के भण्डारण की सरंचनाये, उधानिकी की नर्सरी, सब्जी उत्पादन एवं मार्केटिंग, खेती के आदान (खाद बीज , दवाई ) का उत्पादन एवं मार्केटिंग, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग , फसल उत्पादन व प्रदर्शन, मशरूम उत्पादन, सुगन्धित व मेडीसिनल/दवाई के पोंधो का उत्पादन प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग, डेरी मुर्गीपालन सूअर पालन, मछली पालन भेंड पालन, बकरी पालन, एमु पालन, खरगोश पालन आदि की यूनिट की स्थापना करना है। बिषय विशेषज्ञ उधान श्री गौरी शंकर ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान व्यहारिक जानकारी प्रक्षेत्र पर दी जायेगी ।डा.रेखा ने धन्यवाद दिया।प्रशिक्षण मे जनपद के विभिन्न विकास खण्डो से 20 प्रक्षिणार्थी भाग ले रहे है।

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