मोदी की नाराज़गी के मायने विश्वजीत राहा 

मोदी की नाराज़गी के मायने विश्वजीत राहा 

यूं तो पूरा मामला विशुद्ध रूप से भारतीय जनता पार्टी का अंदरूनी मामला है। पर, पिछले घटनाक्रमों में प्रधानमंत्री मोदी की अपनी पार्टी के दो सांसदों के प्रति सार्वजनिक नाराजगी कई बातों की ओर इशारा करती है।

इन दो घटनाक्रमों में साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के द्वारा लोकसभा चुनाव के दौरान महात्मा गांधी के हत्यारे को देशभक्त जाना व इंदौर के विधायक आकाश विजयवर्गीय द्वारा नगर निगम अधिकारी की पिटाई किया जाना शामिल है।बहरहाल पहले बात करते हैं लोकसभा चुनाव के दौरान भोपाल से सांसद बन चुकीं प्रज्ञा सिंह ठाकुर के महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को देशभक्त बताने वाले बयान की। मालेगांव ब्लास्ट की आरोपी वर्तमान में भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा ने चुनाव के दौरान कहा था कि नाथूराम गोडसे देशभक्त थे, हैं और रहेंगे। पर इस बयान से उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर पूरी तरह से घिर गई थीं। उनके इस बयान के बाद से बीजेपी का हाई कमान डैमेज कंट्रोल में जुटा हुआ था।

तब न सिर्फ बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, बल्कि प्रधानमंत्री मोदीने भी कड़े शब्दों में प्रज्ञा के बयान की निंदा की थी। एक निजी चैनल को दिए साक्षात्कार में प्रज्ञा के बयान पर नाराजगी जताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि गांधी और गोडसे के संबंध भयंकर खराब है, हर प्रकार घृणा के लायक है, आलोचना के लायक है, सभ्य समाज में ऐसी बातें नहीं कही जा सकती हैं। ऐसा कहने वालों को आगे से सौ बार सोचना पड़ेगा। पीएम मोदी ने आगे कहा था कि उन्होंने भले ही माफी मांग ली हो, लेकिन मैं दिल से कभी उन्हें माफ नहीं कर पाऊंगा।

गौरतलब है कि प्रज्ञा द्वारा इससे पूर्व मुंबई के ताज होटल में आतंकवादी कार्रवाई के दौरान शहीद हुए हेमंत करकरे के बारे में भी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी जिस पर भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं के द्वारा बयान का समर्थन करते हुए सफाई भी दी गई थी। पर, प्रधानमंत्री के द्वारा इस बयान पर तब कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई थी। हालांकि मोदी की नाराजगी दिखाने के अलावे सांसद प्रज्ञा पर अब तक कोई कार्रवाई भारतीय जनता पार्टी के द्वारा नहीं की गई है।

 बहरहाल एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को इंदौर की एक घटना पर कड़ी नाराजगी जताई जिसमें स्थानीय भाजपा विधायक और पार्टी के पश्चिम बंगाल के प्रभारी कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय के बेटे ने नगर निगम अधिकारी को बल्ले से पीटा और जब वो जेल से बाहर आया तो भाजपाई समर्थकों ने उसका स्तुतिगान किया। बीते दिनों भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक को संबोधित करते हुए मोदी ने किसी का नाम तो नहीं लिया लेकिन ‘इंदौर की घटना’ का जिक्र करते हुए कहा ’क्या आप सोचते हैं कि लोगों ने इस वजह से हमें वोट दिया है?... वह कोई भी हो, किसी का भी बेटा क्यों न हो, चाहे कोई विधायक या सांसद हो.. इस तरह का अहंकार, दुव्र्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है...। ’मैं जानना चाहता हूं कि वीडियो में उस शख्स ने ऐसी क्या बहादुरी दिखाई कि पार्टी कार्यकर्ताओं ने उसका इतना बड़ा स्वागत किया।

इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और अगर जरूरत हो तो स्थानीय इकाई को भंग किया जाना चाहिए।’ हालांकि इस पूरे प्रकरण में मोदी ने जाने अनजाने कैलाश विजयवर्गीय के द्वारा मीडिया कर्मियों से औकात पूछने का जिक्र नहीं किया। प्रधानमंत्री की इन नाराजगियों के बावजूद पार्टी ने न तो इंदौर के स्थानीय इकाई को भंग किया है और न ही कोई नोटिस पार्टी पदाधिकारियों को जारी किया है।
ऐसे में यहीं से बहुतेरे सवाल उठ खड़े होते हैं। जब पार्टी किसी पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है तो मोदी की इन नाराजगियों के मायने क्या निकाले जायें? सवाल यह कि देश दुनिया में दमदार प्रधानमंत्री के रूप  में माने व जाने वाले मोदी क्या अपनी ही पार्टी में कमजोर पड़ रहे हैं कि उनकी बातों का पार्टी के भीतर ही अमल नहीं हो रहा है? अगर नहीं

तो उनकी नाराजगीे के बावजूद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर व आकाश विजयवर्गीय पर अब तक कार्रवाई न होने का कारण क्या है? और सवाल यह कि जिस प्रकार से सोशल मीडिया में यह चर्चा चल रही है कि मोदी की नाराजगी सिर्फ अपनी छवि का डैमेज कंट्रोल है इसमें क्या कोई सच्चाई भी है? स्वाभाविक है, जब भी कोई बेतुकी बयानबाजी होती है या फिर विधायक सांसदों के द्वारा इस तरह का काम किया जाता है तो लोगों में व्याकुलता के साथ-साथ एक गुस्सा भी होता है। तो क्या मोदी की नाराजगी लोगों का गुस्सा ठंडा करने का एक प्रयास मात्र है? 

हरहाल प्रधानमंत्री ने गोडसे पर बेमतलब के बयान व आकाश की गुंडागर्दी सरीखे कामों की निंदा करके एक तरह से सही कदम उठाया है। प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल वीवीआईपी लोगों व उनके रिश्तेदारों द्वारा खुलेआम कानून तोड़ने व उसे सुरक्षित और संरक्षित करने की प्रवृत्ति को रोकने का संदेश देने में कामयाब जरूर होती हुई दिखाई देती है।  


लेकिन ऐसे मामले सिर्फ भारतीय जनता पार्टी तक ही सीमित नहीं है। अभी अभी मुंबई में गोवा मुंबई हाइवे पर गढ्डों से नाराज विधायक नितेश राणे ने हाइवे के इंजीनियर को रस्सी से बांध दिया और उसके समर्थकों ने इंजीनियर को कीचड़ से नहलाया। इससे पूर्व तेलंगाना में सत्ताधारी पार्टी के विधायक के भाई ने हाल ही में एक महिला वन रक्षक को डंडों से पीटा। भारतीय राजनीति में गलतबयानी और जनप्रतिनिधियों द्वारा ऐसे कुकृत्य अक्सर मिल जाएंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों ही मामलों में कड़ा रूख अख्तियार करके निश्चित रूप से कड़ा संदेश देने की कोशिश भले की हो पर, पार्टी द्वारा कार्रवाई न होने से उनकी ये कोशिशें नाकाफी प्रतीत होतीं हैं। बेहतर हो कि भारतीय जनता पार्टी सहित सभी राजनीतिक पार्टियों के नेता प्रधानमंत्री की इन नाराजगियों से सीख लेकर ऐसी बेतुकी बयानबाजी व गुंडागर्दी से खुद को दूर रखें।
                                
 
 

Support to Swatantra Prabhat Media

T & C Privacy

Comments