कानपुर दंगे के आरोपियों को अच्छी लगने लगी देवरिया जेल की बैरक

वहीं उसके बाद जिला कारागार में आए दर्जनों की संख्या में बंदियों को दो दिनों के अंदर ही दूसरी बैरक में शि़फ्ट कर दिया गया जबकि ये दोनों अभी भी उसी बैरक में जमे हैं 
 
कानपुर दंगे के आरोपियों को अच्छी लगने लगी देवरिया जेल की बैरक 

स्वतंत्र प्रभात

प्रयागराज और कानपुर दंगे के आरोपी जावेद पम्प और निजाम कुरैशी पिछले करीब दो महीने से देवरिया जिला कारागार के मुलाहिजा बैरक (बैरक नंबर सात) में जमे हैं। नियमत: बैरक नंबर सात में बंदियों को अधिक से अधिक एक सप्ताह तक रखा जाता है। इसके बाद यहां से दूसरी बैरक में शि़फ्ट कर दिया जाता है। बताया जाता है कि इस बैरक में सुविधाएं बेहतर होने के चलते बंदी यहां से जाना नहीं चाहते हैं।जिला कारागार में देवरिया, कुशीनगर के साथ ही दूसरे जिलों और प्रदेश के बंदी और कैदी बंद हैं। जून में प्रदेश के कानपुर में दंगा हुआ था। इसके आरोप में निजाम कुरैशी को पुलिस ने गिऱफ्तार कर कानपुर जेल भेज दिया था। कानपुर की घटना के कुछ दिनों बाद ही प्रयागराज में भी दंगा हुआ था। प्रयागराज दंगे के आरोपी जावेद पम्प को प्रयागराज पुलिस ने गिऱफ्तार किया था।बाद में शासन के निर्देश पर कानपुर से निजाम कुरैशी

और प्रयागराज से जावेद पम्प को 20 जून को देवरिया जेल भेजा गया था। दोनों को देवरिया जिला कारागार पहुंचने पर बैरक नम्बर सात में रखा गया।जिला कारागार के बैरक नम्बर सात को मुलाहिजा बैरक कहा जाता है। जेल में आने में आने वाले बंदियों को एक से दो दिनों तक मुलाहिजा बैरक में रखने के बाद दूसरी बैरक में शि़फ्ट कर दिया जाता है।लेकिन जावेद पंप और निजाम कुरैशी को अभी भी बैरक नंबर सात में ही रखा गया है। वहीं उसके बाद जिला कारागार में आए दर्जनों की संख्या में बंदियों को दो दिनों के अंदर ही दूसरी बैरक में शि़फ्ट कर दिया गया जबकि ये दोनों अभी भी उसी बैरक में जमे हैं। 

   

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