दो वर्ष से बूंद-बूंद को तरस रहे परसौनी कला के ग्रामीण

पडरौना विकास खंड के परसौनी कला गांव के लोगों में बढ़ने लगा आक्रोश
 
ओवर टैंक
दो वर्ष पूर्व गांव में बना ओवरहेड टैंक साबित हो रहा हाथी दांत, चटक रहा गला
राघवेंद्र मल्ल

पडरौना, कुशीनगर।विकास खंड पडरौना के गांव परसौनी कला में दो वर्ष पूर्व बना ओवरहेड टैंक हाथी दांत साबित हो रहा है। टंकी बनने के साथ ही जलापूर्ति की पाइप लाइन बिछा दी गई और हर घर में टोटी खड़ी कर दी गयी, लेकिन शुद्ध पेयजल का ग्रामीणों का सपना टूटने लगा है। तेज धूप व परवान चढ़ गर्मी में ग्रामीणों का गला टक रहा है। विभागीय उदासीनता से ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ने लगा है। 

ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल मुहैया कराये जाने के लिये पडरौना-कठकुईयां मार्ग पर महज दो किमी दूर स्थित परसौनी कला गांव का जब चयन हुआ तो यहां के हजारों ग्रामीणों के खुशी का ठिकाना नहीं रहा। गांव के बाहर उच्च क्षमता का ओवरहेड टैंक बनने के साथ ही गांव के हर सड़क व गलियों की खुदाई कर न सिर्फ पाइप लाइन बिछाया गया, बल्कि हर घर में पेयजल स्टैंड पोस्ट खड़ा किया गया।

संक्रामक बीमारियों से मुक्ति की आस में लोगों की खुशियां परवान चढ़ती रहीं। देखते ही देखते ओवरहेड टैंक के निर्माण को दो वर्ष बीत गये, लेकिन अभी तक जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभागीय उदासीनता से जलापूर्ति शुरू नहीं की जा रही है। पाइप लाइन बिछाने के लिये खोदे गये गड्ढ़े अभी भी ढ़के न होने से जानलेवा बनने लगी हैं। रात में तो गिरने से अनेक लोग चोटिल हो चुके हैं।

पुर्व प्रधान भागवत गुप्ता

परसौनी कला के पूर्व प्रधान व सामाजिक कार्यकर्ता भागवत गुप्ता बताते हैं कि गांव में लगभग 200 घरों में जलापूर्ति के लिये टोटियां लगा तो दी गयी हैं, लेकिन ग्रामीण बूंद-बूंद के लिये तरस रहे है। जलापूर्ति का संकट गर्मी में ग्रामीणों का पीछा नहीं छोड़ रहा है।

परसौना कला के पूर्व प्रधान सुरेंद्र चैधरी कहते हैं जल ही जीवन है का सपना यहां टूट रहा है। विभागीय चुप्पी समझ से परे है। अनिद्ध द्विवेदी, रवींद्र द्विवेदी, प्रमोद मद्वेशिया, मोतीलाल मद्धेशिया, अनिल चैधरी आदि ग्रामीणों ने जलापूर्ति शुरू करवाने की मांग की है।

   

FROM AROUND THE WEB